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अच्छी तेजी के लिए बाजार को नए उत्प्रेरक की जरूरत

पुनीत वाधवा /  March 01, 2021

बीएस बातचीत

बॉन्ड प्रतिफल में तेजी ने भारत समेत वैश्विक वित्तीय बाजारों में बेचैनी पैदा की है। किमेंग सिक्योरिटीज इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी जिगर शाह ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में कहा

कि सीमित दायरे वाले बाजार में समय-आधारित गिरावट की अच्छी संभावना है। पेश हैं मुख्य अंश:

मार्च 2020 के निचले स्तरों से बाजारों में आई तेजी पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

इक्विटी में तेजी वैश्विक घटनाक्रम है और इसे कमजोर वास्तविक दरों, अतिरिक्त नकदी, और सस्ते/हाई स्पीड इंटरनेट ट्रेडिंग से आसान पूंजी की ओर आकर्षण बढ़ाने में मदद मिली है। अच्छी खबरों का प्रवाह विकसित दुनिया में प्रोत्साहनों, टीकाकरण और पिछले 8-10 महीनों में आर्थिक सुधार के साथ शुरू हुआ और इसका बाजार की तेजी में बड़ा योगदान रहा। आय को लेकर उम्मीदें ऊंची हैं, खासकर दिसंबर तिमाही में सकारात्मक बदलाव के संदर्भ में, जब कमजोर बिक्री के बावजूद मुनाफे में तेजी दर्ज की गई। इस सबक का असर निफ्टी के एक वर्षीय पीई में दिखा है, जो 21-22 गुना पर दीर्घावधि औसत के मुकाबले काफी ऊपर है। बाजारों को अब अच्छी तेजी के लिए नए उत्प्रेरकों/आय कारकों की जरूरत हो सकती है। सीमित दायरे वाले बाजार में समय-आधारित गिरावट की अच्छी संभावना है।


तेजी के लिए मुख्य जोखिम क्या हैं?

तीन सबसे बड़े जोखिम हैं - फिर से कोविड-19 मामलों में तेजी और आर्थिक दबाव, टीकाकरण की कमजोर रफ्तार और मुद्रास्फीति तथा ब्याज दरों में वृद्घि। इनमें से कोविड-19 के मामलों में तेजी एक अनिश्चित कारक है। टीकाकरण (भारत में) की गति और कवरेज का स्पष्ट तरीके से पता अगली दो तिमाहियों में चलेगा, लेकिन अन्य देशों के तुलना में यह विलंब से दिखना शुरू होगा, भले ही भारत टीके का आयातक बन गया है। मुद्रास्फीति का जोखिम काफी गंभीर है और इसके समाधान के लिए कुछ सख्त कदम उठाए जाने की जरूरत है। मेरा मानना है कि अमेरिकी फेडरल और अन्य बड़ी संस्थाएं निचली दरों और अतिरिक्त तरलता को समर्थन बरकरार रखेंगी।


बॉन्ड बाजार से आपकी क्या उम्मीदें हैं? क्या इक्विटी निवेशकों को चिंतित रहना चाहिए?

हां, यह एक बड़ा जोखिम है, जिस पर इक्विटी निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए। लगभग हरेक देश के विस्तारित उधारी कार्यक्रम, ऊंची डेट/जीडीपी, और ऊंचे राजकोषीय घाटे को इक्विटी बाजारों के लिए शुभ संकेत नहीं माना जा सकता, क्योंकि मुद्रास्फीति में तेजी से ब्याज दरें चढ़ सकती हैं। बॉन्ड प्रतिफल में तेजी के तौर पर कुछ प्रमाण पहले ही दिख चुके हैं। इक्विटी जोखिम के प्रीमियम में कमी आई है। यदि ब्याज दरें चढ़ती हैं तो इ समें कुछ बदलाव आ सकता है। इसके अलावा, कॉरपोरेट आय के लिए आसान मौद्रिक नीति के लाभ भी समाप्त हो जाएंगे।


कई ब्रोकरों ने अपने एपीएसी पोर्टफोलियो में भारत/भारतीय इक्विटी के लिए अपनी रणनीति में बदलाव किया है। आपका क्या नजरिया है?

इस बारे में हमारे पास ज्यादा स्पष्ट नजरिया नहीं है। एशियाई बाजारों में अपने प्रमुख परिचालन क्षेत्र में कई देशों में सोने में सुधार की संभावना दिखी है और उनके मूल्यांकन भारत के मुकाबले काफी ज्यादा आकर्षक हैं। भारत के लिए आकर्षण उसकी कुछ खास कंपनियों और अच्छी बाजार भागीदारी की वजह से है, जो बरकरार रहेगी। वैश्विक आपूर्ति शृंखला निवेश में कोई बड़ा बदलाव नीतियों और भू-राजनीतिक स्थिति की वजह से भारत के पक्ष में है और अन्य एशियाई बाजारों के मुकाबले यहां वैश्विक फंड आवंटन में बड़ा बदलाव देखा जा सकता है।


स्टाफ खर्च में संभावित वृद्घि और जिंस कीमतों में तेजी की वजह से क्या भारतीय उद्योग जगत अगली कुछ तिमाहियों के दौरान चुनौतियों का सामना करेगा?

सितंबर 2020 और दिसंबर 2020 की तिमाही आय ने निश्चित तौर पर सकारात्मक रूप से चकित किया और भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र की मजबूती को प्रदर्शित किया। लोगों की आवाजाही सामान्य हुई है, फैक्टरी उत्पादन और आपूर्ति शृखला में तेजी आई है और ऊपरी खर्चों में भी तेजी आने की संभावना है।


क्या आप मार्जिन पर दबाव है?

जिंस कीमतें तेजी से चढ़ी हैं। इनका असर ग्राहकों पर नहीं डाला जा सकेगा और इससे रिकवरी की राह प्रभावित होगी। इसका प्रभाव कंपनियों के मार्च 2021 की तिमाही में दिखने की संभावना है। जहां सालाना आधार पर न्यून आधार ने स्थिति को अच्छा बना दिया है, वहीं तिमाही आधार पर मार्जिन दबाव की आशंका ज्यादा है।


वित्त वर्ष 2022 के लिए कॉरपोरेट आय वृद्घि के लिए वास्तविक संभावना क्या है?

ब्लूमबर्ग ने वित्त वर्ष 2022 के लिए निफ्टी शेयरों के लिए 25-35 प्रतिशत की आय वृद्घि का अनुमान जताया है। यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि पिछले कुछ वर्षों से कॉरपोरेट आय वृद्घि काफी सुस्त रही है। सूचकांक के घटकों में भी बदलाव आए हैं। ज्यादा निरंतर आय वृद्घि सॉफ्टवेयर, निजी बैंकों/एनबीएफसी, और उपभोक्ता क्षेत्रों में दिखी है। रिकवरी को काफी हद तक सीमेंट ईपीसी/कॉन्ट्रैक्टर, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी, बिल्डिंग मैटेरियल, प्रॉपर्टी, दूरसंचार क्षेत्र आदि से मदद मिल सकती है।

Keyword: बॉन्ड प्रतिफल, वित्तीय बाजार, किमेंग सिक्योरिटीज इंडिया, जिगर शाह,
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