बिजनेस स्टैंडर्ड - समाचार प्रकाशकों और प्रौद्योगिकी कंपनियों के रिश्तों में तनातनी
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, April 17, 2021 08:07 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

समाचार प्रकाशकों और प्रौद्योगिकी कंपनियों के रिश्तों में तनातनी

मीडिया मंत्र
वनिता कोहली-खांडेकर /  02 26, 2021

बीते दिनों गूगल और फेसबुक जैसी तकनीकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों, तमाम समाचार प्रकाशकों और ऑस्ट्रेलिया की सरकार के बीच एक के बाद एक कई नाटकीय घटनाएं हुईं। पूरा मामला ऑस्ट्रेलिया सरकार के एक विधेयक से जुड़ा हुआ है जिसके पारित होने के बाद गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे समाचार प्रकाशकों की खबरें दिखाने या उनके लिंक का इस्तेमाल करने के बदले उन्हें तयशुदा राशि का भुगतान करें।  

विवाद बढऩे पर पहले तो गूगल ने ऑस्ट्रेलिया से अपना कारोबार समेटने की धमकी दी जबकि माइक्रोसॉफ्ट का खोज इंजन बिंग उसकी जगह लेने की पेशकश के साथ आगे आया। फेसबुक ने ऑस्ट्रेलिया में अपने उपयोगकर्ताओं के लिए समाचार पोस्ट करना और उसे साझा करना रोक दिया था। इसके बाद गूगल ने न्यूजकॉर्प ऑर सेवन वेस्ट मीडिया जैसे ऑस्टे्रलियाई प्रसारकों के साथ समझौता किया कि वह उसकी समाचार वेबसाइटों से खबरें दिखाने के बदले उसे भुगतान करेगा। अब यह सहमति भी बन गई है कि डिजिटल कंपनियों को ऐसा भुगतान शुरू करने के पहले एक माह का नोटिस दिया जाएगा। आने वाले दिनों में इन्हीं बातों के आधार पर ऑस्ट्रेलिया में समाचार प्रकाशकों तथा बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ उनके रिश्ते का भविष्य तय होगा। यह भी तय होगा कि इंटरनेट नि:शुल्क रहेगा या नहीं। हालांकि, विश्लेषकों, नियामकों और प्लेटफॉर्म के बीच बहस के कई बिंदु ऐसे हैं जिन पर अंतिम सहमति बन पाना मुश्किल नजर आ रहा है। कॉमस्कोर के आंकड़ों के मुताबिक भारत में 66.2 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। इनमें से 39.2 करोड़ लोगों ने अक्टूबर में मनोरंजन की सामग्री का इस्तेमाल किया और दिसंबर 2020 में 45.4 करोड़ लोगों ने समाचार देखे। जाहिर है भारत के लिए भी यह काफी अहम होगा।

ऑस्ट्रेलिया में कानून के तहत गूगल और फेसबुक के  लिए यह जरूरी कर दिया गया है कि वे समाचार प्रसारकों की सामग्री दिखाने या उनका लिंक लगाने के लिए उन्हें भुगतान करें। ऑस्ट्रेलिया के प्रतिस्पर्धा एवं उपभोक्ता आयोग (एसीसीसी) को सभी दलों का राजनीतिक समर्थन हासिल है। एसीसीसी ने इस विषय पर 18 महीने शोध और मशविरा किया। उसका मानना है कि यह विचार नवाचार या प्रतिस्पर्धा को रोकता नहीं बल्कि समान कार्य क्षेत्र मुहैया कराता है। उसने पाया कि ऑनलाइन विज्ञापन पर व्यय होने वाले हर 100 ऑस्टे्रलियन डॉलर में से गूगल को 53 डॉलर और फेसबुक को 28 डॉलर मिलते हैं और केवल 19 डॉलर अन्य मीडिया कंपनियों को मिलते हैं।

आंकड़े अलग हो सकते हैं लेकिन दुनिया भर में डिजिटल विज्ञापनों में इन दोनों कंपनियों का ही वर्चस्व है। अमेरिका में डिजिटल विज्ञापनों में इनकी हिस्सेदारी 52 प्रतिशत है। भारत में 2019 में विज्ञापनदाताओं ने ऑनलाइन विज्ञापन पर 22,100 करोड़ रुपये खर्च किए। इसमें गूगल और फेसबुक की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत रही। यानी पाठक चाहे इंडियन एक्सप्रेस की खबर पढ़े या प्रभात खबर की, राजस्व का बड़ा हिस्सा गूगल या फेसबुक के पास जाता है। इसके चलते समाचार प्रकाशकों के कारोबार में लगातार गिरावट आई। विकसित देशों में ऐसा और अधिक हुआ। इस असंतुलन ने पत्रकारिता की गुणवत्ता पर असर डालना शुरू कर दिया। अब फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और यूरोपीय संघों में सरकारों के दबाव के बाद ऐसे विकल्पों पर चर्चा और क्रियान्वयन किया जा रहा है। आप कह सकते हैं कि प्रकाशकों को प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए और यह नि:शुल्क इंटरनेट के खिलाफ है।

यहां अनिवार्य भुगतान संहिता के दो प्रमुख प्रभावों में से पहले की बात आती है। वल्र्ड वाइड वेब के अविष्कारक टिम बर्नर्स ली ने उक्त विधेयक को लेकर ऑस्ट्रेलियाई संसद से कहा, 'मुझे चिंता है कि यह संहिता चुनिंदा ऑनलाइन सामग्री के लिए भुगतान को आवश्यक बनाकर वेब के बुनियादी सिद्घांत का उल्लंघन कर रही है। यदि  इसे दुनिया भर में लागू किया गया तो शायद यह कारगर नहीं रहे।' ली सही हैं लेकिन नियामक भी गलत नहीं हैं।

दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन वितरण प्लेटफॉर्म चुनिंदा कंपनियों के नियंत्रण में हैं। ऐपल के पास 1.5 अरब उपयोगकर्ता और 274 अरब डॉलर का राजस्व है। गूगल के पास 1.7 अरब उपयोगकर्ता हैं और उसका राजस्व 183 अरब डॉलर का है। फेसबुक के पास 2.8 अरब उपयोगकर्ता और 86 अरब डॉलर का राजस्व है जबकि एमेजॉन का राजस्व 386 अरब डॉलर है।

एक समाचार पत्र, एक गीत या एक शो, एक फिल्म या एक गेम के दर्शकों या श्रोताओं तक केवल उन्हीं शर्तों पर पहुंचा जा सकता है जो ये कंपनियां तय करें। अगर वे सहमत नहीं हैं आप वैश्विक बाजार से एक पल में बाहर हो सकते हैं जैसे गत सप्ताह ऑस्ट्रेलियाई मीडिया का एक बड़ा हिस्सा फेसबुक से गायब रहा। इन सभी बड़ी कंपनियों ने बार-बार संभावित प्रतिस्पर्धियों को खरीद लिया है।

दूसरा असर बाजार के इन बड़ी कंपनियों के पक्ष में होने के रूप में सामने आएगा। कई ब्रांड, भारी भरकम आधार और मोलतोल की शक्तियों वाली कंपनियां मसलन सेवन वेस्ट और न्यूज कॉर्प ने पहले ही गूगल के साथ समझौता कर लिया है। बाकी कंपनियां भी अनुसरण करेंगी। एक अनुमान के मुताबिक गूगल और फेसबुक को उनके कुल ट्रैफिक का तीसरा हिस्सा समाचारों से मिलता है।

आप कह सकते हैं कि यदि बाजार भुगतान संचालित हो या भुगतान की ओर बढ़ रहा हो तो इसमें कुछ कमी आ सकती है। भारत में हर बड़ा प्रकाशक अपनी वेबसाइट पर सामग्री को भुगतान योग्य बना रहा है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि महामारी के दौरान विज्ञापन राजस्व में कमी आई और ऑनलाइन ट्रैफिक बढ़ा। भुगतान की व्यवस्था छोटे, मझोले और विशेषज्ञता वाले प्रकाशकों के लिए बेहतर है। ऐसा यह मानते हुए कि उनकी विषयवस्तु में गंभीरता होती है और वे उपभोक्ताओं पर निर्भर हैं। लेकिन बिना गूगल और फेसबुक के यह भी कठिन काम होगा। इस विषय में निर्णायक रूप से कुछ भी कहना मुश्किल है।

Keyword: समाचार प्रकाशक, प्रौद्योगिकी कंपनियां, गूगल, फेसबुक, विवाद, बिंग, ऑस्ट्रेलिया,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या अमेरिका को कच्चे माल के निर्यात पर हटानी चाहिए पाबंदी?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.