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एकीकृत कंपनी बनेगी ऑयल इंडिया

त्वेष मिश्र / नई दिल्ली 02 21, 2021

नुमालीगढ़ रिफाइनरी (एनआरएल) में हिस्सेदारी खरीदने के साथ ही ऑयल इंडिया (ओआईएल) की नजर एकीकृत तेल कंपनी बनने पर है। एनआरएल में भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) की हिस्सेदारी फिलहाल 61.65 फीसदी है जबकि कंपनी में ओआईएल की हिस्सेदारी 26 फीसदी है। इसके अलावा एनआरएल में असम सरकार की 12.35 फीसदी हिस्सेदारी है।

ऑयल इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, 'इस रिफाइनरी की मौजूदा क्षमता ऑयल इंडिया के कच्चे तेल के उत्पादन स्तर के लगभग बराबर है। हमारे कारोबार में कुछ तालमेल पहले से ही है। एनआरएल में हमारी 26 फीसदी हिस्सेदारी है। एनआरएल ऑयल इंडिया के कच्चे तेल का सबसे बड़ा ग्राहक है। हम अपनी पाइपलाइन के जरिये उसे कच्चे तेल की आपूर्ति करते हैं और हमारी पाइपलाइन के जरिये एनआरएल के अधिकांश उत्पादों की ढुलाई सिलीगुड़ी तक होती है। यदि यह अधिग्रहण सफल रहा तो इससे हमारा समूह पेट्रोलियम क्षेत्र का एक एकीकृत समूह बन जाएगा जिसके पास अपस्ट्रीम एवं डाउनस्ट्रीम यानी उत्खनन एवं वितरण दोनों कारोबार होंगे।'

अधिकारी ने कहा, 'पेट्रोलियम वितरण कारोबार में हमारा कुछ निवेश पहले से ही मौजूद है लेकिन यदि यह सफल रहा तो यह वितरण क्षेत्र में ओआईएल का पहला बड़ा अधिग्रहण होगा।'


सौदे का वित्त पोषण

ओआईएल प्रस्तावित सौदे के लिए रकम की व्यवस्था ऋण एवं आंतरिक संसाधनों से करेगी। यह सौदा होने के बाद कंपनी के समेकित पोर्टफोलियो को कच्च्चे तेल की कीमतों में उतार-

चढ़ाव के जोखिम से बचने में मदद मिलेगी।

अनुमान है कि समेकित समूह स्तर पर ओआईएल का ऋण बनाम इक्विटी अनुपात लगभग 0.5:1 है। यहां तक कि एनआरएल के अधिग्रहण के बाद भी यह अनुपात लगभग 0.75-0.78:1 रहने की उम्मीद है। ऋण बनाम इक्विटी अनुपात का स्तर 1 से नीचे रहने का मतलब कंपनी के लिए कम जोखिम है क्योंकि उस पर ऋण की तुलना में अधिक संपत्ति (इक्विटी के रूप में) होती है।


संयुक्त बोली

पिछले हफ्ते इंजीनियर्स इंडिया (ईआईएल) ने कहा कि वह ओआईएल के साथ कंसोर्टियम में नुमालीगढ़ रिफाइनरी में बीपीसीएल की हिस्सेदारी हासिल करने के लिए बोली लगाएगी। इसे बीपीसीएल में सरकार के विनिवेश के परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की इस महारात्न रिफाइनिंग एवं विपणन कंपनी का निजीकरण करने जा रही है। यह आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) के नवंबर 2019 के निर्णय के अनुरूप है जिसके तहत बीपीसीएल में सरकार की 53.29 फीसदी हिस्सेदारी के रणनीतिक विनिवेश की घोषणा की गई थी।

उस समय घोषणा की गई थी कि एनआरएल में बीपीसीएल की इक्विटी हिस्सेदारी की बिक्री तेल एवं गैस क्षेत्र में कारोबार करने वाली किसी अन्य केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम को की जाएगी। इस पहल की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि यह रिफाइनरी 15 अगस्त 1985 को हस्ताक्षरित ऐतिहासिक 'असम समझौते' के तहत भारत सरकार की प्रतिबद्धता के लिए आवश्यक है। इस रिफाइनरी की स्थापना समझौते के प्रमुख प्रावधानों में शामिल है। उसी समझौते के बाद असम से अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने के लिए छह साल तक चलने वाला हिंसक आंदोलन खत्म हुआ था।


पूंजीगत व्यय

चालू वर्ष के लिए ओआईएल का पूंजीगत व्यय लक्ष्य (वित्त वर्ष 2020-2021) लगभग 3,900 करोड़ रुपये है। अधिकारी ने कहा, 'दिसंबर 2020 तक लगभग 65 फीसदी लक्ष्य हासिल किया गया है। हम पूंजीगत व्यय लक्ष्य को काफी हद तक हासिल कर लेंगे। अगले साल के लिए कंपनी ने लगभग 4,100 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय की योजना बनाई है। पूंजीगत व्यय की यह योजना एनआरएल अधिग्रहण में प्रस्तावित निवेश से अगल होगी।'

Keyword: एकीकृत कंपनी, ऑयल इंडिया, एनआरएल, ओआईएल, बीपीसीएल,
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