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डेट फंड की ओर अमीर पीएफ निवेशक

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई February 18, 2021

स्वैच्छिक भविष्य निधि (वीपीएफ) खाते में अपनी अतिरिक्त रकम जमा कराने वाले धनाढ्य निवेशक अपने कोष का कुछ हिस्सा डेट म्युचुअल फंडों में लगा सकते हैं। मौजूदा कर प्रावधानों के तहत भविष्य निधि पर ब्याज को कर से छूट मिलती है। हालांकि 2021-22 के बजट में प्रस्ताव रखा गया है कि अगर भविष्य निधि में कर्मचारी का योगदान 2.5 लाख रुपये सालाना से ज्यादा होगा तो उन पर मिलने वाला ब्याज करयोग्य होगा, जो 1 अप्रैल, 2021 से प्रभावी होगा। इस प्रस्ताव से उच्च आय वर्ग वाले या स्वैच्छिक भविष्य निधि में बड़ी रकम जमा कराने वालों पर इस प्रस्ताव का असर पड़ सकता है और उनके कराधान में बदलाव संभव है। यह मानते हुए कि कुल वेतन का 50 फीसदी मूल वेतन हो तो 41 लाख रुपये या इससे ज्यादा सालाना वेतन वेतन पाने वालों पर इसका असर पड़ेगा। यह कहना है विशेषज्ञों का।

निप्पॉन इंडिया म्युचुअल फंड के उप-मुख्य बिजनेस अफसर अश्विन दुग्गल ने कहा, निवेशकों के पास काफी विकल्प नजर आ सकता है। हालांकि जब आप कर लाभ, रिटर्न, दोबारा निवेश के जोखिम और क्रेडिट जोखिम जैसे मानकों पर नजर डालें तो कुछ ही विकल्प रह जाते हैं।

उनका मानना है कि कुछ निश्चित डेट फंड उच्च क्रेडिट, तरलता, चक्रवृद्धि रिटर्न और पूंजीगत लाभ पर लंबी अवधि के कराधान जैसे लाभ की पेशकश करते हैं, जो ऐसे निवेशकों के लिए आकर्षक बन जाता है।

मिरे ऐसेट एमएफ के सीईओ स्वरूप मोहंती ने कहा, डेट फंड में निवेश पर जोखिम ज्यादा होता है, लेकिन कर का बोझ कम करने और रिटर्न अधिकतम करने के लिए धनाढ्य निवेशकों के पास इस विकल्प पर नजर डालने के अलावा कोई और विकल्प नहीं होगा।

अभी ईपीएफ-वीपीएफ पर वित्त वर्ष 19-20 के लिए ब्याज की दर 8.5 फीसदी है। 30 फीसदी कर की दर और 4 फीसदी उपकर के हिसाब से कर्मचारी को 2.5 लाख रुपये सालाना के ऊपर अपने योगदान पर ईपीएफ-वीपीएफ में कर के बाद 5.8 फीसदी ब्याज मिलेगा। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ)  2020-21 के लिए ब्याज दर घटा सकता है और 4 मार्च को सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक होने वाली है।

छह डेट श्रेणियों ने पिछले साल 7.1 फीसदी व 7.6 फीसदी के बीच रिटर्न दिया। तीन साल या इससे ऊपर निवेशित रहने वालों के लिए लंबी अवधि का पूंजीगत लाभ कर 20 फीसदी है।

दुग्गल ने कहा, चूंकि ईपीएफ-वीपीएफ निवेशक लंबी अवधि में पूंजी की सुरक्षा व स्थिर रिटर्न चाहते हैं, ऐसे में इक्विटी या रियल एस्टेट का विकल्प नहीं हो सकता। अन्य विकल्पों मसलन एनएससी, डाकघर और आरबीआई बॉन्ड पर अब कर लगता है। सरकार और कर मुक्त बॉन्ड जारी नहींं कर रही है और जो द्वितीयक बाजार में उपलब्ध है उस पर 4.5-5 फीसदी प्रतिफल मिल रहा है।

आम बजट में खुदरा निवेशकोंं को सरकारी प्रतिभूतियां खरीदने में सक्षम बनाने का प्रस्ताव रखा गया है लेकिन इस पर मिलने वाला ब्याज निवेशकों के हाथ में करयोग्य होगा। दुग्गल ने कहा, निवेशक लंबी अवधि के गिल्ड फंड पर नजर डाल सकते हैं।

Keyword: डेट फंड, पीएफ निवेशक, वीपीएफ, धनाढ्य निवेशक, क्रेडिट जोखिम,
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