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भारतीय अमेरिकियों की भारतीय लोकतंत्र को लेकर मिलीजुली राय

आदिति फडणीस /  February 09, 2021

अमेरिका में भारतीय अमेरिकियों के राजनीतिक दृष्टिकोण और धारणाओं पर एक नया सर्वेक्षण मंगलवार को जारी हुआ, जिसमें कुछ नए और चौंकाने वाले नतीजे आए हैं। इस सर्वेक्षण को 'भारतीय अमेरिकी भारत को कैसे देखते हैं? 2020 भारतीय अमेरिकी दृष्टिकोण सर्वेक्षण के नतीजे' नाम दिया गया है। भारतीय अमेरिकियों की भारतीय लोकतंत्र की मौजूदा दिशा को लेकर मिलीजुली राय है। जहां मामूली बहुमत नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार का समर्थक है, वहीं अहम अल्पमत उनके पक्ष में नहीं है। भारतीय अमेरिकी विशेष रूप से भारत के भविष्य के सामने मौजूद सरकारी भ्रष्टाचार और धीमी पड़ती आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंतित हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अमेरिकियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे लोकप्रिय राजनीतिक दल है। एक-तिहाई प्रत्युत्तरदाता सत्तारूढ़ भाजपा का समर्थन करते हैं, जबकि महज 12 फीसदी कांग्रेस पार्टी के पक्ष में हैं। हालांकि हर पांच भारतीय अमेरिकियों में से दो खुद को किसी राजनीतिक दल से नहीं जोड़ते हैं। वे भारत में हरेक राजनीतिक दल से दूरी बनाकर रखते हैं। भाजपा और प्रवासियों ने मोदी की अमेरिकी यात्रा के दौरान उनके भारतीय अमेरिकियों के साथ जुड़ाव के लिए जितना समय, धन और ऊर्जा खर्च की थी, उसे मद्देनजर रखते हुए ये नतीजे मोदी के पक्के समर्थकों को निराश कर सकते हैं।

यह रिपोर्ट  भारतीय अमेरिकी दृष्टिकोण सर्वेक्षण (आईएएएस) पर आधारित है। आईआईएएस कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनैशनल पीस, जॉन्स हॉपकिंस-एसएआईएस और यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया का गठजोड़ है। आईएएएस 1,200 भारतीय अमेरिकी वयस्कों पर पूरे अमेरिका में एक प्रतिनिधि ऑनलाइन सर्वेक्षण है। यह 1 सितंबर से 20 सितंबर 200 के बीच किया गया था यह संभवतया अमेरिका में प्रवासी भारतीयों के राजनीतिक दृष्टिकोण पर पहला व्यवस्थित सर्वेक्षण है। यह रिपोर्ट सुमित्रा बद्रीनाथ (यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया में शोधार्थी) देवेश कपूर (प्रोफेसर और जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी) में एशिया कार्यक्रम के निदेशक) और मिलन वैष्णव (कार्नेगी एंडोमेंट में दक्षिण एशिया कार्यक्रम के निदेशक) ने लिखी है। ये तीनों ही प्रतिष्ठित भारतीय अमेरिकी शिक्षाविद हैं। किसान आंदोलन और अन्य मुद्दों पर पक्ष और विपक्ष के शोर-शराबे को मद्देनजर रखते हुए प्रवासियों के विचार महत्वपूर्ण हैं।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अमेरिकियों के मोदी के बारे में अनुकूल विचार हैं। सभी भारतीय अमेरिकियों में से करीब आधे प्रधानमंत्री के रूप में मोदी के प्रदर्शन का अनुमोदन करते हैं। उनके सबसे ज्यादा समर्थक रिपब्लिकन, हिंदू, इंजीनियरिंग पेशे के लोग, अमेरिका में नहीं जन्मे लोग और उत्तर एवं पश्चिम भारत के लोग हैं। लेकिन इसमें कहा गया है कि प्रत्युत्तरदाता इस बारे में समान रूप बंटे हुए हैं कि इस समय भारत सही राह पर बढ़ रहा है या गलत राह में जा रहा है। 36 फीसदी भारतीय अमेरिकियों का कहना है कि भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, जबकि 39 फीसदी का मानना है कि वह गलत दिशा में जा रहा है। 25 फीसदी प्रत्युत्तरदाताओं ने कोई राय जाहिर नहीं की। इसकी तुलना में 67 फीसदी प्रत्युत्तरदाताओं ने कहा कि अमेरिका गलत राह पर चल रहा है, जबकि महज 33 फीसदी का मानना है कि वह सही दिशा में जा रहा है। ये आंकड़े सितंबर 2020 के नजरिये को दर्शाते हैं। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे नहीं आए थे।

लेखकों का कहना है कि नरेंद्र मोदी ने 2014 में सत्ता में आने के बाद भारतीय प्रवासियों को एकत्र करने को अपनी विदेश नीति का अहम हिस्सा बनाया है। उनकी विशेष रूप से अमेरिका में प्रवासियों के साथ संपर्क अहम रहा है, जहां भारतीय अमेरिकी दूसरा सबसे बड़ा प्रवासी समूह है।

लेकिन भारतीय अमेरिकी खुद को भारत से कितना जुड़ा हुआ महसूस करते हैं? वे हाल के भारतीय राजनीतिक घटनक्रमों को लेकर क्या सोचते हैं? और वे अमेरिका के भारत के साथ जुड़ाव को किस तरह देखते हैं? ये ऐसे कुछ सवाल हैं, जो सर्वेक्षण में भागीदारों से पूछे गए थे। भारतीय अमेरिकी व्यापक रूप से अमेरिका-भारत संबंध के समर्थक हैं। ज्यादातर भारतीय अमेरिकी भारत के लिए अमेरिका के मौजूदा सहयोग को पर्याप्त मानते हैं, जबकि ज्यादातर की चीन को लेकर प्रतिकूल राय है।

क्षेत्र के लिहाज से मोदी के सबसे अधिक समर्थक उन लोगों में हैं, जो हिंदी (66 फीसदी) या गुजराती या मराठी जैसी पश्चिमी भारत की भाषाएं (65 फीसदी) बोलते हैं। मोदी के सबसे कम समर्थक पूर्वी भारतीय (असमी, बांग्ला, उडिय़ा बोलने वाले) 38 फीसदी और मुख्य रूप से अंग्रेजी भाषी परिवार 34 फीसदी हैं।

Keyword: भारतीय लोकतंत्र, अमेरिका, राजनीतिक दृष्टिकोण, सर्वेक्षण,
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