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किसान मुद्दे पर संसद में हंगामा

बीएस/ एजेंसियां /  February 03, 2021

विवादों में घिरे तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग दोहराते हुए बुधवार को लोकसभा में कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव से पहले किसानों के मुद्दे पर अलग से चर्चा कराने की मांग को लेकर भारी हंगामा किया। विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण निचले सदन की बैठक तीन बार के स्थगन के बाद शाम सात बजे रात्रि 9 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। सदस्यों के हंगामे के कारण बुधवार को भी लोकसभा में प्रश्नकाल और शून्यकाल की कार्यवाही नहीं चल सकी।

वहीं राज्यसभा में भी कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने विवादों में घिरे तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए सरकार को नसीहत दी कि इस विषय को प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बनाया जाना चाहिए। हालांकि सत्ता पक्ष की ओर से कहा गया कि बातचीत के द्वार खुले हुए हैं तथा यह मामला एक और शाहीन बाग नहीं बने।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आसन के समीप आकर विरोध जता रहे विपक्षी सदस्यों से नाराजगी जताते हुए कहा कि संसदीय मर्यादाओं के उल्लंघन पर उन्हें कार्रवाई करनी पड़ेगी। सदन की बैठक शुरू होने पर कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से प्रश्नकाल निलंबित कर सबसे पहले किसानों के मुद्दे पर चर्चा शुरू कराने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में दुनिया में भारत की छवि खराब हो रही है। बिरला ने इसकी अनुमति नहीं दी और प्रश्नकाल चलाने का निर्देश दिया।

इस बीच कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक के कुछ सदस्य और आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान नारेबाजी करते हुए आसन के नजदीक आ गए। वे विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लेने की अपनी मांग जारी रखी। अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल भी अपनी सीट से आगे निकलकर हाथों में तख्ती लेकर नारे लगा रही थीं। हंगामा थमता नहीं देख अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही शाम 5 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

सदन की बैठक पांच बजे फिर शुरू हुई तो लोकसभा अध्यक्ष ने नारेबाजी कर रहे सदस्यों से कहा कि जिस लिए आपको चुनकर भेजा गया है, आप जनता के उन मुद्दों को शून्यकाल के माध्यम से सरकार तक पहुंचा सकते हैं। शाम सात बजे बैठक शुरू होने पर भी सदन में पहले जैसा ही नजारा था। हंगामा थमता नहीं देख उन्होंने सदन की कार्यवाही रात्रि 9 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

राज्यसभा में चर्चा

उच्च सदन में बुधवार को राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को लेकर हुई चर्चा के दौरान विभिन्न दलों के सदस्यों ने किसान आंदोलन के मुद्दे पर अपनी राय विस्तार से रखी। इस मामले पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच बनी सहमति के बाद उच्च सदन में इस चर्चा के समय को 10 घंटे से बढ़ाकर 15 घंटे करने के निर्णय की घोषणा सभापति एम वेंकैया नायडू ने की ताकि सदस्यों को किसान से जुड़े मुद्दे उठाने का समय मिल सके। धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली के लाल किले में हुई हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए लेकिन निर्दाेष किसानों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

टिकैत की हुंकार

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बुधवार को जींद में आयोजित महापंचायत में कहा कि तीनों कृषि कानूनों की वापसी के अलावा किसान मानने वाला नहीं है। उन्होंने सरकार को चेताया कि किसानों ने सिर्फ कानून वापसी की बात कही है अगर किसान गद्दी वापसी की बात पर आ गए तो उनका क्या होगा इसलिए सरकार को अच्छी तरह सोच लेना चाहिए।

जल्द हो समाधान: राहुल

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेना होगा तथा समस्या का जल्द समाधान निकाला जाना चाहिए। उन्होंने यह सवाल भी किया कि सरकार दिल्ली में किलेबंदी क्यों कर रही है, क्या किसान दुश्मन हैं या ये किसानों से डरते हैं? उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री कहते हैं कि प्रस्ताव बरकरार है कि कानूनों के क्रियान्वयन को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया जाए। मेरा मानना है कि इस समस्या का समाधान जल्द करना जरूरी है। किसान पीछे नहीं हटेंगे। अंत में सरकार को पीछे हटना पड़ेगा। इसमें सबका भला है कि सरकार आज ही पीछे हट जाए।'  


ट्रैक्टर परेड हिंसा पर सुनवाई से इनकार

उच्चतम न्यायालय ने गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के मामले की शीर्ष अदालत के नियुक्त पैनल द्वारा निश्चित समय अवधि में जांच का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर विचार करने से बुधवार को इनकार कर दिया। अदालत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि कानून अपना काम करेगा। न्यायालय ने कहा कि वह इस चरण पर हस्तक्षेप नहीं करना चाहता। इन याचिकाओं में से एक याचिका अधिवक्ता विशाल तिवारी ने दायर की थी जिसमें शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच आयोग गठित करने का अनुरोध किया गया था जो इस मामले में साक्ष्यों को एकत्र करे, उन्हें रिकॉर्ड करे और समयबद्ध तरीके से रिपोर्ट न्यायालय में पेश करे। इस तीन सदस्यीय आयोग में उच्च न्यायालय के दो सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को शामिल करने का भी आग्रह किया गया था।


किसानों के साथ नहीं हो रही अनौपचारिक वार्ता

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को कहा कि केंद्र प्रदर्शनकारी किसानों के साथ किसी तरह की अनौपचारिक वार्ता नहीं कर रहा है। उन्होंने प्रदर्शन स्थल के आसपास अवरोधक मजबूत किए जाने और इंटरनेट पर रोक लगाने को स्थानीय प्रशासन से संबंधित कानून-व्यवस्था का मुद्दा बताया। प्रदर्शन में शामिल 41 किसान संगठनों और केंद्र के बीच 11वें दौर की वार्ता 22 जनवरी को बेनतीजा रही थी। केंद्र ने किसान संगठनों से कृषि कानूनों को 18 महीने के लिए स्थगित करने के सरकार के प्रस्ताव पर फिर से विचार करने को कहा है। सरकार अगले दौर की वार्ता कब करेगी और क्या वह किसान संगठनों के साथ अनौपचारिक तौर पर बातचीत कर रही है, यह पूछे जाने पर तोमर ने ना में जवाब दिया। प्रदर्शनकारी संगठनों ने कहा है कि पुलिस और प्रशासन द्वारा प्रताडऩा रोके जाने और हिरासत में लिए गए किसानों को रिहा किए जाने तक सरकार के साथ औपचारिक बात नहीं होगी। इस बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा, 'उन्हें पुलिस आयुक्त से बात करनी चाहिए। मैं कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। यह मेरा काम नहीं है।'

Keyword: किसान, संसद, हंगामा, कृषि कानून, लोकसभा, विपक्षी दल,
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