बिजनेस स्टैंडर्ड - कर्ज रियायत समाप्त करने की जरूरत
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, June 23, 2021 02:46 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

कर्ज रियायत समाप्त करने की जरूरत

अनूप रॉय और सुब्रत पांडा / मुंबई January 29, 2021

आर्थिक समीक्षा की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि कोविड-संबंधित ऋण छूट समाप्त होने के बाद बैंकों का एक और परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा (एक्यूआर) चरण होना चाहिए, भले ही इस तरह के पिछले प्रयास में बैंकों में फंसे कर्ज की अनिश्चितता का सही तरीके से पता लगाने में सफल नहीं रहने के लिए आरबीआई की आलोचना हुई है।

समीक्षा में कहा गया है कि कर्ज से संबंधित माफी या रियायत (फॉरबिएरेंस) के मौजूदा दौर को लंबे समय तक नहीं खींचा जाना चाहिए, लेकिन इसे तब बंद किया जाना चाहिए जब अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिखने लगें।

नीति निर्माताओं को आर्थिक सुधार की सीमा तय करनी चाहिए जिसकी मदद से ऐसे रियायत संबंधित उपायों को वापस लिया जाए। ये सीमाएं बैंकों के साथ मिलकर तय की जानी चाहिए जिससे कि वे इसके लिए पूरी तरह से तैयार हो सकें।

2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद चलाया गया छूट का आखिरी चरण 2011 में समाप्त हो जाना चाहिए था। समीक्षा में कहा गया है, 'मौजूदा बैंकिंग संकट की जड़े 2008 और 2015 के बीच अपनाई गई छूट संबंधित नीतियों के समान हैं।' इस वजह से बैकों, कंपनियों और अर्थव्यवस्था के लिए अनपेक्षित और नुकसानदायक परिणाम सामने आए हैं।

सकल एनपीए 2014-15 के 4.3 प्रतिशत से बढ़कर 2015-16 में 7.5 प्रतिशत हो गया और 2017-18 में यह 11.2 प्रतिशत पर पहुंच गया। बैंकिंग संकट के शुरुआती समाधानों से नुकसान सीमित हो सकता था, लेकिन आरबीआई को इसमे विफलता नहीं मिली। इसका परिणाम यह निकला कि एनपीए को लेकर हालात और बदतर हो गए।

बैंकों ने कंपनियों के ऋण पुनर्गठन के संबंध में प्रावधान संबंधित शर्तों में नरमी का लाभ उठाया। बढ़े हुए मुनाफे का भुगतान लाभांश के तौर पर मालिकों को किया गया, जिनमें सरकार भी शामिल है। इससे बैंक गंभीर रूप से कमजोर हुए। इससे जोखिम वाली उधारी प्रणालियों को बढ़ावा मिला, जिनमें 'जोम्बीज' को उधारी भी शामिल है। जोम्बीज एक ऐसी प्रणाली है जिसमें बड़ी पूंजी फंसे कर्ज को आकर्षक दिखाने के लिए दी जाती है।

फॉरबिएरेंस विंडो के दौरान चूक से संबंधित कंपनियों का अनुपात उनके ऋणों के पुनर्गठन के बाद 51 प्रतिशत तक बढ़ गया, जो पूर्व फॉरबिएरेंस समय में महज 6 प्रतिशत वृद्घि से काफी ज्यादा है। इस तरह से ऐसी रियायत से बैंकों को अपने फंसे कर्ज छिपाने में काफी हद तक मदद मिली।


घरेलू निवेश के लिए भी उपयोग हो आरबीआई कोष

आर्थिक समीक्षा में एक बार फिर सुझाव दिया गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को केवल बिना प्रयोग के रखे रहने या विदेशों में कम उपज वाली संपत्ति में निवेश करने के बजाय अपने भंडार का घरेलू उद्देश्यों के लिए भी उपयोग करना चाहिए।

समीक्षा में कहा गया, 'भारत जैसे विकासशील देश को अपने विकास की गति बढ़ाने के लिए घरेलू निवेश पर खर्च करने की आवश्यकता है। इसलिए हालिया अधिशेष, वित्त वर्ष 2021-22 में निवेश पर खर्च में बढ़ोतरी के लिए पर्याप्त सुविधा देता है।' पिछली आर्थिक समीक्षा में आरबीआई द्वारा भंडार की पर्याप्तता बनाए रखने के बारे में बातचीत की गई थी और सुझाव दिया गया था कि बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के साथ ही इसे बुनियादी ढांचे पर खर्च किया जाना चाहिए। 22 जनवरी को, आरबीआई का विदेशी मुद्रा भंडार 585.33 अरब डॉलर पर था, जो एक साल पहले 466.7 अरब डॉलर था। भंडार का वर्तमान स्तर लगभग 18.4 महीने के आयात एवं देश के लघु अवधि ऋण का 236 प्रतिशत है।  बीएस

Keyword: कर्ज रियायत, आर्थिक समीक्षा, रिपोर्ट, बैंक, एक्यूआर,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या आगामी महीनों में सुधरेगी वाहनों की बिक्री?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.