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तेजी में शेयर बेचने से चूकी सरकार

निकुंज ओहरी / नई दिल्ली January 25, 2021

ऐसे समय पर जब बाजार में लगातार तेजी बनी हुई है, सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (पीएसयू) में अपनी हिस्सेदारी को बेचने और उनका निजीकरण करने के अवसर को गंवा रही है। यह राय विशेषज्ञों ने व्यक्त की है।

बाजार में मौजूदा तेजी के बीच सरकार अब तक केवल पांच पीएसयू में ही बिक्री के लिए पेशकश (ओएफएस) के जरिये अपनी हिस्सेदारी में कटौती कर सकी है जिसमें से पांचवे में अभी सौदा होना बाकी है। बेंगलूरु डॉ बीआर अंबेडकर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के कुलपति एनआर भानुमूर्ति ने कहा कि ऐसे समय पर जब बाजार अपने रिकॉर्ड ऊंचाई पर है तो सरकार को उन कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटा लेनी चाहिए जिनमें न्यूनतम शेयरधारित नियमों का पालन नहीं हो सका है। हालांकि, विनिवेश में अगले वर्ष तेजी आने की उमीद है।

सूचीबद्घ पीएसयू में न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता 25 फीसदी रहनी चाहिए।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने हाल ही में कहा था कि सरकार को इक्विटी बाजारों में आई तेजी का लाभ उठाना चाहिए और पीएसयू में अपनी हिस्सेदारी की बिक्री करनी चाहिए।

उन्होंने कहा, 'वास्तव में किसी भी चीज का निजीकरण नहीं हुआ है। जब आप कठिन परिस्थिति में हों तो आपको प्रत्येक उपक्रम में से हिस्सेदारी बेचनी चाहिए।'

निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में सरकार ने चार सरकारी कंपनियों हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स, इंडियन रेलवे केटरिंग ऐंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी), भारत डायनेमिक्स और भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) में ओएफएस की घोषणा की थी।

सरकार ने टाटा कयुनिकेशंस में भी हिस्सेदारी बिक्री की घोषणा की थी। इसमें से आंशिक हिस्सेदारी की बिक्री ओएफएस के जरिये और बाकी की बिक्री रणनीतिक साझेदार के माध्यम से करने की घोषणा की गई थी।

इन चार पीएसयू में हिस्सेदारी बिक्री से विनिवेश प्राप्ति करीब 13,000 करोड़ रुपये रही है। अब तक, चालू वित्त वर्ष में विनिवेश प्राप्ति 17,958 करोड़ का है जबकि लक्ष्य 2.1 लाख करोड़ रुपये था।

गुरुवार को सेंसेक्स 50,184 अंकों के साथ एकदिनी कारोबार के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचकर 49,625 अंकों पर बंद हुआ था। शुक्रवार को यह 1.5 फीसदी फिसलकर 48,878.54 अंकों पर बंद हुआ था।

बहरहाल, पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि बाजार ने सिंतबर से तेजी पकड़ी है लेकिन पीएसयू के शेयरों में उस अनुपात में उछाल नहीं आई। उन्होंने कहा कि कुछ पीएसयू के स्टॉक की कीमतें तो पिछले वर्ष के स्तर से भी नीचे है।

उन्होंने कहा, 'यह कहना सही नहीं होगा कि सरकार विनिवेश के मोर्चे पर आगे नहीं बढ़ी है।' उन्होंने कहा कि सरकार ने आईपीओ की घोषणा की और जैसे ही परिस्थिति में सुधार आने लगा सरकार ने ओएफएस की घोषणा कर सेल और आईआरसीटीसी जैसी कंपनियों में हिस्सेदारी की बिक्री शुरू कर दी।

केवल हिस्सेदारी बिक्री में ही नहीं, निजीकरण के मोर्चे पर भी सरकार धीमी गति से आगे बढ़ी जिसका सबसे बड़ा कारण महामारी और कुछ हद तक इसमें निवेशकों की कम रुचि का भी योगदान है।

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), शिपिंग कॉपोर्रेशन ऑफ इंडिया (एससीआई) और कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकॉर) जैसे बड़े आकार के निजीकरण की घोषणा नवंबर, 2019 में की गई थी वह रुकी हुई है। निवेशकों की ओर से अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिलने से एयर इंडिया और पवन हंस के निजीकरण की योजना को आगे बढ़ा दिया गया है।

Keyword: शेयर, पीएसयू, हिस्सेदारी, निजीकरण, बिक्री, ओएफएस,
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