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कृषि को बजट से मिल सकता है पर्याप्त धन

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली January 25, 2021

किसानों की ओर से जारी विरोध प्रदर्शन के बीच आगामी केंद्रीय बजट में कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के लिए आत्मनिर्भर भारत पैकेज में घोषित उपायों को पर्याप्त संसाधन आवंटित करने पर ध्यान दिया जा सकता है। इनमें फार्म गेट स्तर पर भंडारण का बुनियादी ढांचा खड़ा करने के लिए निधि और मनरेगा जैसी अग्रणी योजना शामिल है।

सूत्रों ने नई योजनाओं और घोषणाओं के संदर्भ में कहा कि कृषि क्षेत्र में खासकर इनपुट के पक्ष में आगे के सुधार के लिए कोई खाका नजर आ सकता है।

एक लाख करोड़ रुपये के कृषि बुनियादी ढांचा कोष (एआईएफ) की घोषणा आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत की गई थी। इस पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। इसके साथ ही फार्म गेट और संग्रह स्थल पर कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और यार्ड जैसी बुनियादी ढांचा की परियोजनाओं को धन मुहैया कराने के लिए नाबार्ड द्वारा विकसित वित्त निकाय पर बजट में ध्यान दिया जाएगा। एक बार विवादित कृषि सुधारों के लागू हो जाने पर एपीएमसी को समाप्त करने की आशंकाओं के समाधान के लिए सूत्रों ने बताया कि 2018-19 के बजट में घोषित ग्रामीण एग्रीकल्चर मार्केट (ग्राम) योजना को तेजी से पूरा करने के लिए आगामी बजट में अतिरिक्त धन दिया जा सकता है।

इस योजना के तहत केंद्र सरकार ने ग्रामीण कृषि बाजारों को विकसित करने और मौजूदा 22,000 ग्रामीण हाटों का ग्रामीण कृषि बाजारों के तौर पर उन्नत करने की योजना बनाई थी जिनमें मनरेगा और अन्य दूसरी योजनाओं का उपयोग कर भौतिक बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा। केंद्र ने 22,000 ग्राम और 585 कृषि उत्पाद बाजार समितियों (एपीएमसी) में कृषि विपणन बुनियादी ढांचा का विकास करने और उनको उन्नत करने के लिए 2,000 करोड़ रुपये की धनराशि से एक कृषि बाजार अवसंरचना कोष स्थापित करने की भी घोषणा की थी। मनरेगा के मामले में पिछले वित्त वर्ष में करीब 1 लाख करोड़ रुपये के आवंटन को इस वित्त वर्ष में भी बरकरार रखा जा सकता है। कोरोना के समय में लॉकडाउन के दौरान ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए यह कार्यक्रम रीढ़ की हड्डी साबित हुआ था। इस साल रिकॉर्ड संख्या में ग्रामीण परिवारों को इसमें रोजगार मिला था।      

कोविड के संकट के दौरान सरकार ने मनरेगा के तहत आवंटन की राशि में 40,000 करोड़ रुपये का इजाफा किया था जिससे वित्त वर्ष 2021 में कुल आवंटित रकम 1 लाख करोड़ रुपये के पार हो गई थी। लॉकडाउन के दौरान वापस लौटे प्रवारी मजदूरों के कारण मनरेगा के तहत रोजगार की मांग में तेजी से इजाफा हुआ था। इस साल अब तक 7 करोड़ परिवारों को इसके तहत रोजगार मिला है जो कि एक दशक से भी पूर्व शुरू हुई इस योजना का सर्वोच्च स्तर है।

दिसंबर में करीब 2.634 करोड़ लोगों ने मनरेगा के तहत काम की मांग की थी जो कि पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 113.13 फीसदी और नवंबर 2020 के मुकाबले 16 फीसदी अधिक है।

मनरेगा की वेबसाइट से पता चलता है कि दिसंबर के अंत तक वित्त वर्ष 2021 के लिए आवंटित 1.01 लाख करोड़ रुपये में से करीब 80 फीसदी खर्च हो चुका है जबकि काम की मांग प्रचंड बनी हुई है। 1 जनवरी के मुताबिक उपलब्ध रकम और खर्च हो चुकी रकम के बीच 5,700 करोड़ रुपये का अंतर है। विभिन्न राज्य का कोष ऋणात्मक हो चुका है।

आत्मनिर्भर भारत पैकेज में केंद्र सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये का कृषि अवसंरचना कोष बनाने की घोषणा करने के अलावा 15,000 करोड़ रुपये का पशुपालन बुनियादी ढांचा विकास कोष स्थापित करने की भी घोषणा की थी।

Keyword: कृषि, बजट, किसान, विरोध प्रदर्शन, ग्रामीण क्षेत्र,
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