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ऐप फर्मों के वसूली एजेंटों पर सख्ती बरतेगा आरबीआई

अनूप रॉय और सुब्रत पांडा / मुंबई January 19, 2021

ऐप के जरिये कर्ज देने वाली फर्मों का अध्ययन करने के लिए गठित भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की कार्य समिति वसूली एजेंटों की ज्यादतियों, खास तौर पर छोटी रकम के देर से भुगतान के लिए ग्राहकों की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के प्रयासों को रोकने के उपायों के बारे में सुझाव दे सकती है।

आरबीआई के जानकार सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय बैंक की राय है कि डिफॉल्टरों या देर से भुगतान करने वालों की छवि खराब करने के मकसद से संपर्क सूची में शामिल लोगों को वसूली एजेंट द्वारा टेक्स्ट संदेश भेजने के लिए निजी मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल करने से रोकने के तत्काल उपाय होने चाहिए।

ऐप के जरिये कर्ज देने वाली फर्में जरूरतमंदों को कुछेक सौ या कुछ हजार रुपये तक का कर्ज देती हैं लेकिन उस पर ऊंची दरों पर ब्याज वसूला जाता है। कर्ज लेने वाला अगर भुगतान में देरी करता है तो ऋणदाता का टेली-कॉलर संबंधित ग्राहक के संपर्क सूची में शामिल सभी लोगों या परिवार के सदस्यों को लगातार संदेश भेजना शुरू कर देता है। कई बार आधार और स्थायी खाता संख्या (पैन) जैसे संवेदनशील जानकारियां भी स्कैन करके भेज दी जाती हैं।

जब यह ऐप डाउनलोड किया जाता है तो वसूली एजेंटों के पास संबंधित व्यक्ति के संपर्कों की पूरी सूची आ जाती है। इसका इस्तेमाल वे बाद में कर्जदारों को धमकाने में कर सकते हैं। इस तरह के ऐप को जब इन्स्टॉल किया जाता है तो संपर्क सूची, गैलरी और मैसेज तक पहुंचने की अनुमति देने के लिए कहा जाता है। अनुमति मिलने के बाद कर्जदाता के पास संबंधित व्यक्ति के फोन की सारी जानकारी उपलब्ध हो जाती है।

चाइनीज ऐप के तौर पर जाने जाने वाले कर्ज देने वाले ऐसे ऐप के मामले में यह बात सही साबित होती है। ग्राहकों और सरकारी एजेंसियों से शिकायत मिलने के बाद इनमें से कई ऐप को गूगल ने पिछले हफ्ते प्ले स्टोर से हटा दिया था।

इस तरह की शिकायतों को देखने वाले सूत्रों का कहना है कि इस तरह की कार्यप्रणाली केवल चाइनीज ऐप द्वारा ही नहीं अपनाई जाती है बल्कि कुछ विनियमित फर्में भी ऐसा ही करती हैं। अक्सर दोनों तरह की फर्मों के लिए वसूली एजेंट समान होते हैं।

फिनटेक एसोसिएशन फॉर कंज्यूमर इम्पावरमेंट (फेस) के संस्थापक सदस्य और अर्लीसैलरी के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी अक्षय मेहरोत्रा ने कहा, 'विनियमित डिजिटल ऋणदाताओं को वीडियो केवाई के लिए लोकेशन एक्सेस की जरूरत होती है। इसके लिए जीपीएस लोकेशन का उपयोग किया जाता है।' मेहरोत्रा ने कहा, 'विनियमित इकाइयों के पास ब्यूरो डेटा की पहुंच होती है, जिसका मतलब है कि उनकी ग्राहक के वैकल्पिक मोबाइल नंबरों तक पहुंच होती है। लेकिन गैर-विनियमित इकाइयों के पास ब्यूरो की पहुंच नहीं होती है, ऐसे में वे ग्राहकों के कॉन्टैक्ट बुक और फोटो गैलरी तक पहुंच बनाते हैं।' अधिकांश विनियमित इकाइयां कॉन्टैक्ट बुक और फोटो गैलरी तक पहुंच नहीं चाहती हैं। किसी भी तरह की विशिष्ट अनुमति के लिए वे नियामकीय प्रारूप के अंतर्गत अनुमति मांगते हैं। इसमें ग्राहक पता कर सकते हैं कि क्यों और किस तरह की जानकारी ली जा रही है। मेहरोत्रा ने कहा, 'वेे अनुमति देने या उससे इनकार कर सकते हैं। इसमें दो बार सहमति देनी होती है, एक बार हमें और एक बार गूगल ऐंड्रॉयड पॉप-अप पर।'

ऐप के जरिये कर्ज देने वाली फर्मों के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार कुछ ऐप को ग्राहकों की गैलरी और संपर्क सूची तक पहुंच की जरूरत होती है। उनका दावा है कि वे संपर्क सूची की पहुंच का उपयोग अंडरराइटिंग नियमों को पूरा करने के लिए करते हैं और गैलरी के जरिये कर्ज लेने वालों की वास्तविकता का आकलन किया जाता है।

क्रेडिटबी के मुख्य कार्याधिकारी और फेस के सह-संस्थापक मधुसूदन एकामबरम ने कहा, 'यह पूरी तरह से अनुचित है। कई ऐप न केवल उपयोगकर्ता से उनकी संपर्क सूची की पहुंच मांगते हैं, बल्कि उसे टेली-कॉलिंग वसूली एजेंट को भी मुहैया कराते हैं, जो ग्राहकों का उत्पीडऩ करते हैं।'उन्होंने कहा कि नियामक द्वारा इस दिशा में सख्ती बरतने की उम्मीद है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने और दिशानिर्देश बनाए जाने की उम्मीद है। इससे कुछ फर्में अलग-अलग नाम से बाजार में वापस नहीं लौट पाएंगी।

लॉकडाउन के दौरान ऐसे ऐप की बाढ़ आ गई और कर्जदारों का उत्पीडऩ भी बढ़ गया। इसी शिकायतों को देखते हुए आरबीआई ने कार्य समिति बनाई है। सूत्रों ने बताया कि समिति की पहली बैठक इसी हफ्ते होगी। ऐप के जरिये कर्ज देने वाली फर्मों के लिए नियम बदले जाने की उम्मीद है।

इससे पहले 2010 में सूक्ष्म वित्तीय संस्थाना को लेकर शिकायतें मिलने के बाद आरबीआई ने नियमों को सख्त किया था। वसूली एजेंट के मामले में नियमों का पालन नहीं करने वाली एनबीएफसी पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। सूत्रों ने कहा कि नियामक भविष्य में गूगल और ऐपल से ऐसे ऐप को संपर्कों, संदेश और ईमेल की पहुंच देने से इनकार करने की मांग करेगा।

Keyword: ऐप फर्म, वसूली एजेंट, आरबीआई, अध्ययन, मैसेजिंग ऐप,
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