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डिजिटल लेन-देन में तेजी, फिर भी नकदी का राज

अभिजित लेले और अनूप रॉय / मुंबई January 14, 2021

ऐसे समय में जब यूनीफाइड पेमेंट्स सिस्टम (यूपीआई) के माध्यम से लेन देन का आंकड़ा 4 लाख करोड़ रुपये से पार पहुंच गया है, प्रचलन में मुद्रा (सीआईसी) पूरे कैलेंडर वर्ष में 22 प्रतिशत बढ़ी है। सीआईसी वह मुद्रा है, जो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से जारी मुद्रा और व्यवस्था से हटाई गई मुद्रा का अंतर होता है।

अगर कैलेंडर वर्ष 2019 में हुई 11.8 प्रतिशत वृद्धि से तुलना करें और पूरी तरह या आंशिक लॉकडाउन के हिसाब से देखें तो सीआईसी में वृद्धि आश्चर्यजनक रूप से ज्यादा है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी व्याख्या आर्थिक अवधारणा 'सावधानी के लिए नकदी धारण करने' के रूप में की जा सकती है।

नकदी जमा करने की शुरुआत 2020 की शुरुआत से ही हो गई, जब कोरोनावायरस महामारी का वैश्विक प्रसार होने लगा। महामारी के डर से लोगों ने आपातकाल में इस्तेमाल के लिए नकदी बनाए रखना शुरू किया।

मार्च के अंत तक देश में पूरी तरह लॉकडाउन हो गया। उस समय पीएमसी बैंक की विफलता और कुछ बड़ी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की चूक की वजह से वित्तीय व्यवस्था पर भरोसा प्रभावित था। लॉकडाउन के पहले भी आर्थिक वृद्धि में सुस्ती नजर आ रही थी। इन सभी वजहों के कारण लोगों ने नकदी जमा करना शुरू कर दिया। कैलेंडर वर्ष के शुरुआती चार महीनों में सीआईसी में वृद्धि पूरे 2019 की तुलना में ज्यादा थी।

जनवरी और 1 मई के बीच प्रचलन में मुद्रा की बढ़ोतरी 2.66 लाख करोड़ रुपये थी। इसकी तुलना में पूरे 2019 के दौरान (जनवरी से दिसंबर) वृद्धि 2.4 लाख करोड़ रुपये थी। 1 जनवरी 2021 को प्रचलन में मुद्रा 27.7 लाख करोड़ रुपये थी।

वित्त वर्ष में अब तक सीआईसी में 3.23 लाख करोड़ रुपये वृद्धि हुई है।

भारतीय स्टेट बैंक समूह के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्यकांति घोष ने कहा कि वर्ष 2020 परंपरागत साल था। परंपरागत रूप से जनता के बीच मुद्रा और जमा दोनों अलग अलग दिशा में जाते हैं। घोष ने कहा, 'बहरहाल मौजूदा परिदृश्य में दोनों साथ साथ चल रहे हैं, क्योंकि महामारी के कारण धन बचाने की प्रवृत्ति बढ़ी है और साथ ही लोग नकदी भी रख रहे हैं।' दिलचस्प है कि इसका एक और पक्ष भी है। नोटबंदी और लॉकडाउन जैसी वजहों से डिजिटल मनी को बल मिला है।

बैंकों और नकदी प्रबंधन कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि महामारी के दौरान खासकर शहरी इलाकों में डिजिटल लेन देन में बढ़ोतरी हुई है। उपनगरीय और ग्रामीण इलाकों में अभी भी अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा नकदी है। एक दिलचस्प स्थिति यह भी देखने को मिली है कि वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद ऑनलाइन की गई है, लेकिन डिलिवरी होने पर भुगतान नकद हुआ है।

सीएमएस इन्फोसिस्टम्स के नकदी सूचकांक से पता चलता है कि तीसरी तिमाही में त्योहारों और विवाह के सीजन में पूरे देश में नकदी की मांग उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। वर्ना वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही के दौरान नकदी सूचकांक, सकल घरेलू उत्पाद में संकुचन के अनुपात में गिरा है। सीएमएस इन्फोसिस्टम्स के अध्यक्ष अनुष राघवन ने कहा कि एटीएम से निकासी दिसंबर 2020 में कोविड के पहले के स्तर के 95 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, क्योंकि ग्रामीण व उपनगरीय इलाकों में तेज रिकवरी हुई है।

वरिष्ठ बैंकरों का कहना है कि नकदी का इस्तेमाल ज्यादा था और यह शहरों व छोटे कस्बों में बढ़े स्तर पर बना रहेगा क्योंकि शहरी इलाकों की तुलना में इन जगहों पर रिकवरी तेज है। हालांकि उनका माना है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था 2021 में और उसके बाद स्थिर रहेगी। उन्होंने कहा कि नीति निर्माण के हिसाब से रिजर्व बैंक के लिए चुनौती है।

Keyword: डिजिटल लेन-देन, यूपीआई, सीआईसी, आरबीआई,
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