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जरूरी कागज ही रखें बचाकर ताकि ढोना न पड़े रद्दी

बिंदिशा सारंग /  January 10, 2021

एक दशक पहले तक वित्तीय मामलों से जुड़े जरूरी दस्तावेज सहेजना बहुत आसान था। बैंक लॉकर किराये पर लेकर उसमें रख दीजिए या घर पर संदूक और तिजोरी में रख दीजिए। मगर आज उन्हें संभालकर रखना बहुत मुश्किल हो गया है। फिनसेफ इंडिया की निदेशक और वित्तीय सलाहकार मृण अग्रवाल कहती हैं कि आज किसी भी शख्स के पास कई तरह के वित्तीय दस्तावेज होते हैं जैसे बैंक खाते, म्युचुअल फंड, शेयर, दूसरे निवेश, कर्ज से जुड़े कागजात।

दलील दी जा सकती है कि ये दस्तावेज अब डिजिटल शक्ल में आते हैं। लेकिन हमारे इनबॉक्स इतने अधिक स्रोतों से आई जानकारी से भर जाते हैं और उन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है। स्क्रिपबॉक्स के सह-संस्थापक एवं मुख्य व्यवसाय अधिकारी प्रतीक मेहता कहते हैं, 'आज ग्राहकों पर संदेशों और चि_ी-पत्री की बौछार होती रहती है। इससे परेशान होकर वे उन्हें पढऩा ही बंद कर देते हैं और जरूरी दस्तावेज तलाशने के लिए या तो सर्च बार का सहारा लेते हैं या सीधे वित्तीय संस्था से बात करते हैं।' दस्तावेजों की बाढ़ के साथ ही आपको केवाईसी के नियमों से भी जूझना पड़ता है और कई बार अपने जीवनसाथी के वित्तीय मसलों से जुड़ा काम भी आपके ही जिम्मे होता है। ऐसे में अगर आप यह नहीं जानते हैं कि कौन से कागजात बहुत पुराने हो गए हैं और कौन से दस्तावेज नष्ट करने का समय आ गया है तो आप अनचाहे ही सभी दस्तावेज संजोते रहेंगे और आपके पास उनका ढेर लगता जाएगा।

कौन सा कागज कब तक संभालें

सबसे पहले आपको यह पता होना चाहिए कि किस वित्तीय कागज को अपने पास रखना है और कब तक रखना है।

 कर

आयकर रिटर्न से जुड़े कागज कब तक संभालकर रखने चाहिए? एनए शाह एसोसिएट्स के पार्टनर गोपाल बोहरा की सलाह है, 'करदाता को पिछले वित्त वर्ष से कम से कम सात वर्ष पहले तक के आयकर विवरण और दूसरे कागज सहेजार रखने चाहिए। ऐसा इसलिए जरूरी है कि क्योंकि आयकर अधिनियम के तहत कर विभाग पिछले सात साल के कर आकलन की दोबारा जांच कर सकता है।' कोई पुराना मामला अदालत में हो तो उसके निपटारे तक जरूरी दस्तावेज अपने पास रखें। बोहरा की सलाह है, 'अगर करदाता के घर, दफ्तर आदि में तलाशी के दौरान अगर 50 लाख रुपये से अधिक की अघोषित आय या संपत्ति का पता लचता है तो आकलन अधिकारी 10 साल पहले तक के रिकॉर्ड दोबारा जांच सकता है।' इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति विदेशी स्रोत से कमा रहा है या उसके पास विदेशी संपत्ति है तो उस व्यक्ति को उस वित्त वर्ष से 17 साल पहले तक के कागज संभालकर रखने चाहिए। यदि अधिकारी को लगता है कि आय छिपाई गई है तो कानूनन वह 17 साल पहले तक के रिकॉर्ड खोल सकता है।

 बैंकिंग

सबसे ज्यादा ऊहापोह उस कर्ज के कागजों के बारे में होती है, जिसे हमने चुका दिया है। हमें पता नहीं होता कि ये कागज कर्ज खत्म होने के कितने साल बाद तक रखने होंगे। बैंकबाजार के मुख्य कार्याधिकारी आदिल शेट्टी कहते हैं, 'आपको कर्ज खत्म होने के बाद 8 साल तक कागज अपने पास रखने चाहिए। कर्ज से जुड़ा कोई भी विवाद इतने साल के भीतर ही सामने आता है।' इसके अलावा आरबीआई के पैमानों के मुताबिक बैंकों को भी कर्ज का रिकॉर्ड 5 से 8 साल अपने पास रखना पड़ता है। इसलिए भी आपको 8 साल तक कागज रखने चाहिए। शेट्टी कहते हैं, 'अगर आपने घर की मरम्मत के लिए कर्ज लिया है या इस काम के लिए पर्सनल लोन लिया है और आप उस पर पूंजीगत लाभ का दावा करना चाहते हैँ तो आपको संपत्ति की बिक्री तक कागज रखने होंगे।' यह भी पता होना चाहिए कि कौन से कागजात रखने हैं। आम तौर पर बैंक से आपको नो-ड्यूज सर्टिफिकेट मिल जाता है, जिसमें लिखा होता है कि कर्ज पूरी तरह चुका दिया गया है। शेट्टी कहते हैं, 'अगर आपने आवास ऋण लिया है तो आपको मकान के कागजात पर लिखी कर्ज की बात भी हटवानी होगी। ऐसा होने पर ही कर्ज खत्म माना जाएगा और आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में भी दिखेगा कि आप पर आवास ऋण नहीं है।'


बीमा

बीमा से जुड़े सभी कागज सहेजकर रखना अच्छी बात है। क्या पता रीइंबर्समेंट के बाद भी कागज दिखाने की नौबत आ जाए। पॉलिसीएक्स डॉट कॉम के मुख्य कार्याधिकारी नवल गोयल का कहना है, 'यदि ग्राहक कर संबंधी फायदा या छूट चाहता है तो उसे रसीदें संभालकर रखनी चाहिए और रिटर्न दाखिल करते समय लगानी चाहिए।' अब सवाल उठता है कि सामान्य बीमा होने पर रीइंबर्समेंट होने के बाद भी अस्पताल में भुगतान के कागज कब तक रखे जाएं? या वाहन बीमा की रकम मिलने पर भी कार की सर्विस के कागज कब तक रखे जाएं? अस्पताल में भुगतान के कागज तो जब तक रख सकें उतना अच्छा है। रीइंबर्समेंट यानी बीमा कंपनी से पैसा मिलने के बाद भी अस्पताल की रसीदें और कार मरम्मत के कागज संभालकर रखे रहें। गोयल कहते हैं, 'पोर्टेबिलिटी के समय भी आपको इससे मदद मिलेगी। आपको कई मौकों पर सत्यापन के लिए ये कागजात बीमा कंपनी को दिखाने होंगे।' कार बीमा में भी यही होता है। आप ई-बीमा खाते का इस्तेमाल कर सकते हैं, जहां आपके सभी बीमा दस्तावेज होते हैं।  इन दिनों लगभग सभी बीमा कंपनियां ई-बीमा खाते की सुविधा प्रदान कर रही हैं, जहां आप अपने और परिजनों के बीमा कागजात सहेज सकते हैं।


 म्युचुअल फंड

मेहता कहते हैं, 'नैशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के समेकित खाता विवरण (सीएएस) में आपके सभी म्युचुअल फंड निवेश, शेयर निवेश और बॉन्ड आदि रहते हैं। आप किसी परिजन के ईमेल पर या अपने ईमेल पर यह पूरा विवरण मंगा सकते हैं।' म्युचुअल फंड के लिए आप कंप्यूटर एज मैनेजमेंट सर्विसेज (कैम्स) पोर्टल का इस्तेमाल कर सकते हैं। मृण अग्रवाल कहती हैं, 'अपने निवेश की जानकारी एक ही जगह हासिल करने के लिए साल के अंत में अपने कैम्स खाते की जानकारी हासिल करना अच्छी आदत है।' आयकर रिटर्न भरने के लिए अपने सालाना शेयर एवं म्युचुअल फंड विवरण को तीन साल तक संभालकर रखें। अगर आपका अपना रोजगार है तो यह विवरण छह साल तक रखना होगा।


 अन्य दस्तावेज

संपत्ति की खरीद, बिक्री, ट्रांसफर या उसमें मरम्मत अथवा बदलाव से जुड़े कागज सात साल तक संभालिए क्योंकि कर विभाग इतने साल में किसी भी समय दोबारा कर आकलन कर सकता है। बोहरा कहते हैं, 'करदाताओं को अपनी मिल्कियत (जैसे जेवरात, पेंटिंग की खरीद और मकान, दुकान की मरम्मत के कागज) संभालकर रखने चाहिए ताकि बिक्री के समय कागजों की कमी का हवाला देकर कर विभाग कर कटौती का फायदा देने से इनकार नहीं कर सके।' समूचे निवेश की सूची भी आपके पास होनी चाहिए। इसकी तुक समझाते हुए मेहता कहते हैं कि 20 साल के लिए खरीदी बीमा पॉलिसी को आप 5-6 साल बाद भूल भी सकते हैं। इसलिए निवेश की सूची रखिए।

डिजिटल सुरक्षा

इन्फ्रासॉफ्ट टेक के उपाध्यक्ष एवं प्रमुख (उत्पाद तथा नवाचार) मनोज चोपड़ा कहते हैं, 'दस्तावेजों को या तो अपने डेस्कटॉप, लैपटॉप, पेन ड्राइव में सहेजें या किसी सुरक्षित क्लाउड सेवा पर रख लें।' अक्सर लोग डिजिटल तरीके से सहेजने के नाम पर कागजों को ई-मेल में ही छोड़ देते हैं। चोपड़ा आगाह करते हुए कहते हैं, 'ईमेल में सहेजना असुरक्षित है। हमेशा कागज डाउनलोड करें और पासवर्ड के साथ सुरक्षित कर रखें। बेहतर सुरक्षा के लिए आप बिटलॉकर का उपयोग भी कर सकते हैं।' बिटलॉकर में एन्क्रिप्शन होता है और यह माइक्रोसॉफ्ट विंडोज में मिलता है। आप गूगल डॉक्स, आईक्लाउड और ड्रॉपबॉक्स में भी दस्तावेज रख सकते हैं। इनमें रजिस्टर करें और कागजों को स्कैन कर अपलोड कर दें। इसके बाद जब चाहेंगे आपको कागजात मिल जाएंगे। चोपड़ा कहते हैं, 'लैपटॉप या पेनड्राइव के साथ दो क्लाउड सेवा प्लेटफॉर्म पर भी कागजात सहेजें। भारत सरकार का डिजिलॉकर इस मामले में शानदार है।' इन सुझावों पर चलेंगे तो आपके कागज ज्यादा व्यवस्थित रहेंगे। मगर ध्यान रखें कि कम से कम एक व्यक्ति को पता हो कि आपने कागज कहां सेव किए हैं और पासवर्ड भी उसके पास हो ताकि अनहोनी की स्थिति में कागज मिल सकें। साथ ही अगर कागज में आपकी निजी जानकारी है तो रद्दी की टोकरी में फेंकने से पहले उसके पुर्जे-पुर्जे जरूर कर दें।

Keyword: दस्तावेज, बैंक लॉकर, म्युचुअल फंड, आयकर रिटर्न, बैंकिंग,
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