बिजनेस स्टैंडर्ड - ठेके पर खेती करने की रिलायंस की योजना नहीं
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ठेके पर खेती करने की रिलायंस की योजना नहीं

बीएस संवाददाता / मुंबई/नई दिल्ली January 04, 2021

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने आज कहा है कि कंपनी ठेके पर खेती (कॉन्ट्रैक्ट या कॉर्पोरेट फार्मिंग) से नहीं जुड़ी है और उसका ऐसा करने का कोई इरादा भी नहीं है। कंपनी ने कहा कि आपूर्तिकर्ताओं द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अनाज खरीदने के नियम का पालन किए जाने पर जोर देती है और वह किसान संगठनों की चिंता से सहमत है।

रिलायंस कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के निशाने पर रही है और पंजाब में उसके टावर क्षतिग्रस्त किए गए हैं। संगठित खुदरा क्षेत्र द्वारा की जाने वाली फलों व सब्जियों की बिक्री में इस समूह की खुदरा इकाई का आधा हिस्सा है, जिससे प्रदर्शनकारी कंपनी को नए कृषि कानून का लाभार्थी मान रहे हैं।

सोमवार को कंपनी ने एक बयान जारी कर कृषि और खुदरा पर अपन स्थिति साफ की। कंपनी ने आज पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का भी रुख किया और तोडफ़ोड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की और कहा कि ऐसा करने वाले निहित स्वार्थी तत्वों व कारोबारी प्रतिस्पधिर्यों से प्रेरित हैं। प्रतिस्पर्धी टेलीकॉम फर्मों  एयरटेल और वोडाफोन ने पहले ही आरोपों का खंडन कर दिया है।  अपने बयान में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कहा कि कंपनी और उसकी सहायक इकाइयां किसी तरह की कॉर्पोरेट या कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग नहीं कर रही हैं और इसकी इस कारोबार में उतरने की कोई योजना नहीं है। इसने कहा है कि कंपनी ने कॉर्पोरेट या कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के मकसद से कोई भी जमीन प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से नहीं खरीदी है।

कंपनी ने आगे कहा कि समूह की खुदरा इकाई कोई भी खाद्यान्न किसानों से सीधे नहीं खरीदती है। रिलायंस ने बयान में कहा है, 'किसानों से अनुचित लाभ लेने के लिए हमने कभी लंबी अवधि का खरीद अनुबंध नहीं किया है। हमने न ही कभी ऐसा प्रयास किया है कि हमारे आपूर्तिकर्ता किसानों से लाभकारी मूल्य से कम पर खरीद करें और न कभी ऐसा करेंगे।'  कंपनी ने कहा है कि वह आपूर्तिकर्ताओं को प्रेरित करेगी कि वे सरकार द्वारा तय किए गए न्यूनतम समर्थन मूल्य या अन्य किसी लाभकारी मूल्य व्यवस्था का पालन करें।

सूत्रों का कहना है कि रिलायंस रिटेल अपने रिलायंस फ्रेश (पड़ोस की दुकानों) और रिलायंस स्मार्ट (सुपर मार्केट) के माध्यम से रोजाना 200 मीट्रिक टन से ज्यादा फलों और 300 टन से ज्यादा सब्जियों की बिक्री करती है और संगठित खुदरा क्षेत्र द्वारा फलों व सब्जियों की बिक्री में इसकी हिस्सेदारी 50 प्रतिशत है।

एक महीने से ज्यादा समय से दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आरोप लगाया है कि तीन कृषि कानूनों को लागू किए जाने से बड़े कॉर्पोरेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियां उनकी जमीनों पर कब्जा कर लेंगी, क्योंकि इनके कुछ प्रावधान किसानों के हितों के खिलाफ हैं।

दूसरे राज्यों से दिल्ली आने के कुछ रास्तों पर विरोध कर रहे किसानों ने डेरा डाल दिया है और वे बारिश व ठंड से जूझते हुए अपनी मांग पर दृढ़ हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे घर नहीं लौटेंगे।  विरोध प्रदर्शन कर रहे करीब 200 किसान संगठनों के संगठन आल इंडिया किसान संघर्ष समन्यव समिति (एआईकेएस) ने उच्च न्यायालय में रिलायंस द्वारा दायर याचिका को अपने कारोबारी हितों को लाभ पहुंचाने की कवायद करार दिया है। समिति ने कहा, 'किसानों की नाराजगी के दबाव में दाखिल किया गया रिलायंस इंडस्ट्रीज का शपथ पत्र झूठे दावों से भरा हुआ है कि वे फसल बाजार में प्रवेश नहीं कर रहे हैं और खेती की जमीन पर कब्जा नहीं करेंगे।'

एआईकेएससीसी ने बयान में कहा है, 'रायगड़, महाराष्ट्र व अन्य जगहों पर रिलायंस ने भारी मात्रा में जमीन अधिग्रहण किया है और कोई झूठा दावा करने के पहले  निश्चित रूप से इसे वापस करना चाहिए।'


एयरलाइन परिचालकों के साथ समुद्री विमान सेवा चलाने पर विचार

सरकार एयरलाइन परिचालकों के साथ मिलकर दिल्ली-अयोध्या समेत विभिन्न मार्गों पर समुद्री विमान सेवा (सीप्लेन) शुरू करने की तैयारी में है। बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि समुद्री विमान सेवा से देश भर में यात्रा तीव्र और आसान होगी और यह सेवा पासा पलटने वाली साबित होगी। बयान के अनुसार, 'बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय संभावित एयरलाइन परिचालकों के जरिये विशेष उद्देश्यीय इकाई (एसपीवी) रूपरेखा के तहत चुनिंदा मार्गों पर समुद्री विमान सेवा शुरू करने की प्रक्रिया में है।' परियोजना का क्रियान्वयन सागरमाला विकास कंपनी लि. के जरिये किया जाएगा।  भाषा

Keyword: ठेके पर खेती, रिलायंस इंडस्ट्रीज, कॉर्पोरेट फार्मिंग, किसान संगठन,
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