बिजनेस स्टैंडर्ड - टीकों पर अगला कदम
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टीकों पर अगला कदम

संपादकीय /  January 03, 2021

केंद्रीय मानक औषधि नियंत्रण संस्थान ने ऑक्सफर्ड विश्वविद्यालय और दवा निर्माता कंपनी ऐस्ट्राजेनेका द्वारा विकसित टीके एजेडडी1222 के देश में आपातकालीन इस्तेमाल की इजाजत दे दी है। चूंकि ऐस्ट्राजेनेका ने पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) को इस टीके के निर्माण का लाइसेंस दिया है इसलिए भारत में यह टीकाकरण कार्यक्रम में प्रमुख रूप से शामिल रहेगा। एसएसआई के पास अमेरिका की कंपनी नोवावैक्स द्वारा विकसित टीका भी है जिसके बारे में ड्यूक विश्वविद्यालय के वैश्विक स्वास्थ्य नवाचार केंद्र ने बताया है कि वह इसकी भी एक अरब खुराक तैयार करेगा। इसके अलावा एजेडडी1222 की 50 करोड़ खुराक तैयार की जाएंगी। नोवावैक्स ने नवंबर में ब्रिटेन में तीसरे चरण के परीक्षण आरंभ किए थे। पिछले दिनों अमेरिका और मैक्सिको में भी तीसरे चरण के परीक्षण आरंभ कर दिए गए। भारतीय औषधि नियामक ने यहां परीक्षण को मंजूरी देने के पहले कुछ अन्य जानकारी मांगी है ताकि मंजूरी की प्रक्रिया तेज की जा सके। समय सीमा से पीछे होना अवश्य दिक्कत की वजह बन सकता है क्योंकि अधिक से अधिक परीक्षण किए जा रहे हैं और प्रभावी टीके बनने शुरू भी हो चुके हैं। ऐसे में परीक्षण की गति धीमी पड़ेगी क्योंकि उसके लिए वॉलंटियर घटते जा रहे हैं। यह सही है कि भारत बायोटेक के बनाए टीके को 'जनहित में आपात परिस्थितियों में अत्यंत सावधानी के साथ सीमित तौर पर इस्तेमाल' करने की इजाजत दी गई और उसने भी अब तक तीसरे चरण के परीक्षण पूरे नहीं किए हैं। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि मंजूरी के लिए इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है जबकि किसी नियामक ने अभी तक इसके आंकड़े नहीं परखे हैं और न ही कहीं और इसका परीक्षण पूरा हुआ है।

सीरम इंस्टीट्यूट के प्रमुख समेत कुछ पर्यवेक्षकों ने यह भी कहा है कि मौजूदा योजना के तहत टीकाकरण की प्रक्रिया तेजी से नहीं शुरू की जा सकती। यह महामारी आबादी में जितना अधिक तेजी से फैलेगी, वायरस के स्वरूप बदलने का जोखिम भी उतना ही अधिक होगा। टीके के प्रतिकूल प्रभाव के आकलन और कोल्ड चेन की गुणवत्ता की जांच आदि के लिए सरकार ने पूर्वाभ्यास का आयोजन किया। इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि इस महीने के दूसरे सप्ताह से कोल्ड चेन के बुनियादी ढांचे का विकास शुरू हो जाएगा। टीका लगाने, उसकी निगरानी और बाद में उसके प्रभाव का आकलन करने में सरकार के सभी स्तरों को शामिल होना होगा लेकिन हमेशा की तरह वास्तविक प्रबंधन का अधिकांश काम राज्यों की राजधानी में पूरा होगा। राज्यों की क्षमता अलग-अलग है और केंद्र सरकार को संभावित समस्याओं के हल के लिए दस्ते तैयार रखने होंगे। सरकार को आशा है कि को-विन ऐप टीकाकरण के लिए समय लेने, बाद में हालात के आकलन और निगरानी में अहम भूमिका निभा सकता है। इस ऐप के महत्त्व को देखते हुए इसका प्रबंधन पारदर्शी होना चाहिए। इसके अलावा आसान ऑफलाइन प्रक्रिया भी होनी चाहिए ताकि जिनकी पहुंच स्मार्ट फोन तक नहीं है उन्हें दिक्कत न हो। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रैकिंग कैसे होगी।

भले ही सरकार कह रही है कि जनवरी में टीकाकरण शुरू हो जाएगा लेकिन अभी काफी कुछ किया जाना है। शुरुआती टीकाकरण अगले महीने तक पूरा हो सकता है लेकिन सवाल यह है कि व्यापक टीकाकरण कैसे होगा। सरकार लंबे समय तक व्यापक टीकाकरण रोक नहीं सकती क्योंकि भारी पैमाने पर तैयार हो रहे टीकों को समय रहते इस्तेमाल भी करना होगा। कीमत को लेकर भी कुछ सवाल हैं। सबके लिए नि:शुल्क टीके का दावा समझदारी भरा प्रतीत नहीं होता। इससे सरकारी संसाधन दबाव में आ जाएंगे। जो भुगतान कर सकते हैं उन्हें समांतर निजी नेटवर्क के जरिये टीके की कीमत चुकानी चाहिए।

Keyword: टीके, ऑक्सफर्ड विश्वविद्यालय, ऐस्ट्राजेनेका, एसआईआई, नोवावैक्स,
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