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निपटान योजना पर सुस्त प्रतिक्रिया

श्रीमी चौधरी / नई दिल्ली December 31, 2020

गैर-नकदी शेयर ऑप्शन में कथित तौर पर छेड़छाड़ में शामिल इकाइयों के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की एकमुश्त निपटान योजना गुरुवार को समाप्त हो गई। इस योजना को धीमी प्रतिक्रिया मिली। सूत्रों के अनुसार, करीब 250 कंपनियों ने इस अवसर का लाभ उठाया है और उन्होंने महज 10-12 करोड़ रुपये जुटाए थे। इस घटनाक्रम से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा, 'यह एक शुरुआती अनुमान है और आंकड़े गुरुवार तक दर्ज किए गए थे। इसलिए इसकी ज्यादा संभावना है कि आंकड़ों में बदलाव आ सकता है, क्योंकि यह योजना गुरुवार की आधी रात तक खुली है।'
 
हालांकि आधिकारिक लक्ष्य की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन नियामक को कम से कम 1,500-2,000 करोड़ रुपये एकत्रित होने का अनुमान है, और 14,000 लोगों द्वारा इस विकल्प का लाभ उठाए जाने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि ठंडी प्रतिक्रिया के बावजूद, नियामक इस योजना की समय-सीमा बढ़ाने के पक्ष में नहीं था। हालांकि महामारी की वजह से उद्योग संस्थाओं ने नियामक को यह समय-सीमा बढ़ाकर 31 मार्च तक किए जाने के लिए पत्र लिखा थ। योजना के तहत एकमुश्त निपटान अवधि 1 अगस्त से खुली हुई थी, जिसे शुरू में ढ़ाकर 31 अक्टूबर किया जाना था, लेकिन बाद में महामारी के हालात को देखते हुए इसे 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया गया। उद्योग के जानकारों ने इस योजना में ठंडी प्रतिक्रिया के लिए ऊंची निपटान लागत और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों से कार्रवाई की आशंका को जिम्मेदार बताया है। सेबी की सामान्य कानूनी कार्रवाई के तहत जुर्माना 5-10 लाख रुपये है। इस योजना के तहत निपटान राशि 60 लाख रुपये हो सकती है।
 
सेबी ने 27 जुलाई को उन इकाइयों के लिए निपटान का एकमुश्त अवसर पेश किया था जिनके खिलाफ कार्रवाइयां 1 अप्रैल, 2014 और 30 सितंबर, 2015 के बीच बीएसई के स्टॉक ऑप्शन सेगमेंट में फर्जी कारोबार के संबंध में शुरू की गई थीं। कर बचाने के प्रयास में उन्होंने अपने कारोबारों में नुकसान दिखाया, जिसे अगले दिन प्रतिपक्षों द्वारा पलट दिया गया था। यह योजना आयकर विभाग समेत अन्य एजेंसियों द्वारा अभियोग से प्रतिरक्षा प्रदान नहीं करती है। लेकिन इस योजना की अनदेखी करना कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।
 
सेबी ने कहा कि उसे पता चला था कि ऐसे सौदे करने वाली 21,652 इकाइयों में से 14,720 समान दिन नॉन-जीनियन और रिवर्सल ट्रेड्स कर कृत्रिम कारोबार दिखाने से जुड़ी हुई थीं। उसने 567 इकाइयों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की थी। कुछ मामलों में, ऑर्डर जारी किए गए हैं, जिनमें लगाए गए जुर्माने 10 लाख रुपये से कम के हैं। सेबी ने 20 अगस्त को इस योजना की खामियों के बारे में सवाल उठाए थे। कई मानकों का हवाला देते हुए सेबी ने एक लिंक भी साझा किया था जिस पर कोई इकाई पात्रता जांच सकती है और पैन विवरण डालकर निपटान राशि पता लगाई जा सकती है। इसके जरिये कृत्रिम कारोबार और गैर-वास्तविक सौदों की गणना भी देखी जा सकती है। 
Keyword: share market, SEBI, company,,
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