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कोयला खनन में खुला निजी निवेश का दरवाजा, बिजली वितरण में सुधार नहीं

श्रेया जय / नई दिल्ली December 30, 2020

कोयला खनन क्षेत्र में इस साल ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला जब निजी कंपनियों ने कोयले के वाणिज्यिक खनन और बिक्री के क्षेत्र में कदम रखा। देश में 47 वर्ष पहले कोयला खनन का राष्ट्रीयकरण हुआ था।  केंद्र सरकार ने मई 2020 में कोयला खनन (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 में संशोधन कर कोयला नीलामी को गैर-खनन, एमएसएमई और विदेशी कंपनियों के लिए खोल दिया। दो हिस्सों में नीलामी पिछले महीने पूरी हुई। कंपनियों ने पेशकश पर कुल 38 कोयला ब्लॉकों में से 19 के लिए तकनीकी बोली जमा कराई। 
 
बोली जीतने वालों में अदाणी एंटरप्राइजेज, हिंडाल्को, वेदांत लिमिटेड, आदित्य बिड़ला समूह की एस्सेल माइनिंग, जिंदल स्टील ऐंड पावर लिमिटेड और अरविंदो रियल्टी, यजदाणी इंटरनैशनल, जेएमएस माइनिंग तथा बोल्डर स्टोन मार्ट जैसी विभिन्न नई और गैर-खनन कंपनियां थी। कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि करीब 65 फीसदी बोलीदाता गैर-प्रत्यक्ष उपयोगकर्ता थे। कोयला मंत्रालय का अनुमान है कि इन 19 खदानों से उसके जीवन भर मंत्रालय को प्रत्येक वर्ष 6,636 करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व प्राप्त होगा। आरंभ में ही इससे 1,048 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।
 
कोयला मंत्रालय के सचिव ए के जैन ने कहा, 'वाणिज्यिक खनन की सफलता ने कोयला बाजारों को खोलने का रास्ता तैयार कर दिया है और यह कोल इंडिया लिमिटेड को टक्कर दे रहा है।' बिजली आपूर्ति शृंखला वाला छोर जहां फल फूल रहा है वहीं बिजली वितरण वाले छोर के लिए यह साल संकट भरा रहा। बिजली की मांग में रिकॉर्ड स्तर की कमी आई और सरकारी स्वामित्व वाली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को ऐतिहासिक स्तर का उच्च बकाया झेलना पड़ा। इसका परिणाम हुआ कि इस क्षेत्र में हुए पहले के सभी सुधारों का असर बहुत कम हो गया। पूर्व की डिस्कॉम सुधार योजना उदय वित्त वर्ष 2020 में पूरी हुई जिसमें अधिकांश राज्य अपने निर्दिष्ट लक्ष्यों को पाने में नाकाम रहे। माना जा रहा था कि वित्त वर्ष 2020 तक समग्र तकनीकी और वाणिज्यिक (एटीऐंडसी) नुकसान या अक्षम प्रणालियों के कारण विद्युत आपूर्ति नुकसान 15 फीसदी पर आ जाएगी और डिस्कॉम की औसत लागत राजस्व (एसीएस-एआरआर) शून्य हो जाएगी।  उदय पोर्टल के मुताबिक हालांकि फिलहाल एटीऐंडसी नुकसान 24.05 फीसदी पर है और लागत-राजस्व अंतर 0.94 पैसे पर है। ये आंकड़े वित्त वर्ष 2020 के सभी डिस्कॉम के अंतिम तौर पर उपलब्ध आंकड़ों और वित्त वर्ष 2021 के दौरान 14 राज्यों के संकेतक आंकड़ों का राष्ट्रीय औसत है। डिस्कॉम का बिजली उत्पादन कंपनियों पर बकाया इस साल के शुरुआती महीनों में ही 1 लाख करोड़ रुपये की सीमा तक पहुंच गया था। जून में वित्त मंत्री ने अर्थव्यस्था में जान फूंकने के लिए आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत बीमार बिजली वितरण क्षेत्र के लिए एक विशेष तरलता निवेश योजना की घोषणा की थी। ऋण योजना का आकार 90,000 करोड़ रुपये था जिसकी सहायता से डिस्कॉम को बिजली उत्पादक कंपनियों का बकाया चुकता करना था।  उसी आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत केंद्र ने देश में सभी केंद्रशासित प्रदेशों के निजीकरण और बिजली वितरण क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ाने की भी घोषणा की थी। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने भी सरकारी बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण के लिए एक मानक बोली दस्तावेज (एसबीडी) का मसौदा तैयार किया। यह अपने डिस्कॉम को निजी कंपनियों के हाथ में सौंपने के इच्छुक राज्य सरकारों के लिए भी एक दिशानिर्देश दस्तावेज के रूप में कार्य करेगा।
 
हालांकि, योजना अभी तक शुरू नहीं हुई है। केंद्र शासित प्रदेशों में केवल चंडीगढ़ ने ही अपने डिस्कॉम के निजीकरण के लिए निविदा दस्तावेज जारी किए। लेकिन डिस्कॉम के इंजीनियरों और दूसरे कर्मचारियों की ओर से इसका विरोध किए जाने के बाद पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने चंडीगढ़ की बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण पर स्थगन लगा दिया है।  ओडिशा को छोड़कर किसी भी राज्य को अब तक अपनी बिजली आपूर्ति के लिए निजी भागीदार को ढूंढने में सफलता नहीं मिली है। ओडिशा ने हाल ही में टाटा पावर को अपने चार सर्कलों के लिए बिजली वितरण लाइसेंस जारी किया। उसने पूर्ण निजीकरण के लिए अपनी तीन बिजली आपूर्ति कंपनियों के लिए भी निविदा जारी की है।
 
उत्तर प्रदेश सरकार भी अपनी पांच बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) में से एक पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निजीकरण पर विचार कर रही थी। हालांकि, उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन के इंजीनियरों और कर्मचारियों की ओर से विरोध किए जाने के बाद सरकार ने इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।  संशोधित विद्युत अधिनियम, 2003 को संसद में पेश किया जाना बाकी है और नैशनल टैरिफ पॉलिसी पर 2018 से ही मंथन हो रहा है, इसे भी जारी किया जाना बाकी है। विद्युत अधिनियम का मसौदा भी किसान के कृषि अधिनियम के विरोध में शामिल है। इस मसौदे में किसान सहित सभी ग्राहकों के लिए सब्सिडी वाली बिजली की सुविधा को समाप्त करने का प्रस्ताव है। 
 
Keyword: coal, mining, company, block,,
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