बिजनेस स्टैंडर्ड - ई-कॉमर्स बिक्री 2021 में तेजी से बढऩे का संकेत
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ई-कॉमर्स बिक्री 2021 में तेजी से बढऩे का संकेत

पीरजादा अबरार /  December 30, 2020

महामारी फैलने के बाद जब आर्थिक गतिविधियों को फिर से खोलने की शुरुआत होने जा रही थी, तब वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली ऑनलाइन फैशन रिटेलर मिंत्रा अपनी सबसे प्रमुख एंड ऑफ रीजन सेल (ईओआरएस) के जून संस्करण की तैयारी कर रही थी। हालांकि उस समय हरेक डेटा और रिपोर्ट यह दर्शा रहे थे कि फैशन को उबरने में अन्य क्षेत्रों से अधिक समय लगेगा। उस समय फैशन क्षेत्र को लेकर एक भी रिपोर्ट उत्साहजनक नहीं थी। मिंत्रा के मुख्य कार्याधिकारी अमर नागाराम ने कहा, 'इससे हमारे पास दो विकल्प थे- या तो हम एंड ऑफ रीजन सेल शुरू करें या नहीं। हमने यह सेल लाने का फैसला किया।' उन्होंने कहा, 'यह बहुत अच्छा फैसला साबित हुआ क्योंकि सही मायनों में हमने इस देश में फैशन उद्योग को फिर से खोला। ब्रांड साझेदारों को एक उम्मीद की किरण नजर आने लगी। दबी हुई मांग और उपभोक्ताओं के प्लेटफॉर्म पर आने पर हमारा दांव सही साबित हुआ।'

 
शुरुआती झटके के बाद महामारी के चलते लोगों का 2020 में ई-कॉमर्स की तरफ रुझान बढ़ा है क्योंकि ऑनलाइन खरीदारी करने वाले लोगों की तादाद बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश में ई-कॉमर्स को अपनाने की दर इतनी तेजी से बढ़ी है कि यह क्षेत्र यह सामान्य स्थितियों में इस मुकाम पर कई वर्ष बाद या वर्ष 2025 तक पहुंचता।  एंड ऑफ रीजन सेल के पहले ही दिन प्लेटफॉर्म पर रिकॉर्ड तोड़ 1.5 करोड़ लोग आए, जिससे सामान्य कारोबार में 110 फीसदी वृद्धि हुई। मिंत्रा ने इस सेल में पहले चौबीस घंटों में करीब 30 लाख उत्पाद बेच दिए। मिंत्रा की 16 से 22 अक्टूबर तक बिग फैशन फेस्टिवल सेल के दौरान भी 40 लाख लोगों ने खरीदारी की और विभिन्न श्रेणियों के 1.3 करोड़ उत्पाद खरीदे। इसने पिछले संस्करण की तुलना में ऑर्डरों एवं ग्राहकों में दो गुना वृद्धि दर्ज की। 
 
इससे मिंत्रा ने ब्रांडों को जोडऩे के अपने प्रयास तेज किए। आज 200 से अधिक ब्रांडों के 1,800 से अधिक स्टोर इसके नेटवर्क का हिस्सा हैं। जून की एंड ऑफ रीजन सेल के दौरान सफलतापूर्वक जोडऩे से खरीदारों का अनुभव बेहतर हुआ और साझेदार ब्रांडों के ऑफलाइन खुदरा स्टोरों में बिक्री बढ़ी। कंपनी ने 'मिंत्रा-मॉल' बनाया, जिससे खरीदार अपने पसंदीदा ब्रांडों का अनुभव ले पा रहे हैं। एमेजॉन, फ्लिपकार्ट, मिंत्रा जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए इस साल त्योहारी सीजन बिक्री के लिहाज से सफल रहा है। सलाहकार कंपनी रेडसीर की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अक्टूबर से नवंबर में एक महीने के दौरान 8.3 अरब डॉलर की ऑनलाइन त्योहारी बिक्री हुई, जिसमें ब्रांडों और विक्रेताओं की बिक्री भी शामिल है। यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 65 फीसदी अधिक है। 
 
इस समय छोटे और मझोले शहर ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए अहम बाजार हैं। ये बाजार खपत और स्टाइल के लिहाज से महानगरों एïवं बड़े शहरों से ज्यादा पीछे नहीं हैं। इस साल त्योहारी सीजन में ग्राहकों की संख्या पिछले साल के मुकाबले 88 फीसदी बढ़ी है, जिसमें से 40 फीसदी खरीदार मझोले और छोटे शहरों के थे।  रेडसीर के सहायक साझेदार उज्ज्वल चौधरी ने कहा, 'भारत (मझोले एïवं छोटे शहर और देश के ग्रामीण इलाके) लंबे समय के लिए लगातार एक रुझान बना हुआ है। त्योहारी सीजन इस चीज का अच्छा मापक है कि ई-कॉमर्स कैसे उभर रहा है और अगले साल ऑनलाइन खुदरा उद्योग कैसा रहेगा।'
 
उन्होंने कहा कि इस उद्योग में इस साल अच्छी वृद्धि रही है और अगले पांच वर्षों में करीब 40 फीसदी की दर से बढ़ोतरी जारी रहने की संभावना है।  ज्यादातर वृद्धि 'भारत' में होने की संभावना है क्योंकि ई-कॉमर्स कंपनियां देश के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी तगड़ी पकड़ कायम कर रही हैं। दैनिक उपयोग की जरूरतें पूरी करने के लिए ई-कॉमर्स पर निर्भरता बढ़ती जा रही है, इसलिए लॉकडाउन के बाद फ्लिपकार्ट के नए यूजर की वृद्धि दर करीब 50 फीसदी है। अनलॉक (जुलाई-सितंबर) के दौरान छोटे शहरों के नए यूजर में सबसे अधिक 65 फीसदी बढ़ोतरी हुई। मझोले और छोटे शहरों के उपभोक्ता प्लेटफॉर्म पर सबसे ज्यादा समय बिताते हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि प्लेटफॉर्म के साथ यूजर का जुड़ाव लगातार बढ़ रहा है और खरीदारी की वरीयताओं में बदलाव आ रहा है। 
 
फ्लिपकार्ट ने यह सुनिश्चित किया है कि पहली बार इस्तेमाल कर रहे लोगों को खरीदारी में आसानी हो। इसके लिए कंपनी ने किराना खंड में वॉयस असिस्टेंट और हिंदी, तमिल, तेलुगू और कन्नड़ समेत विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में खरीद की सुविधा शुरू की है। इस साल ई-कॉमर्स क्षेत्र से और अधिक उपभोक्ता जुड़े हैं, इसलिए अपनी भाषा में खरीद को प्राथमिकता भी देखी गई है। इस साल कोविड से पहले से लेकर त्योहारी अवधि (जनवरी से नवंबर 2020) के दौरान क्षेत्रीय भाषाओं को अपनाने में 2.5 गुना बढ़ोतरी हुई है। 
 
रेडसीर के निदेशक विवेक पाठक ने कहा कि सोशल कॉमर्स भी अहम बनता जा रहा है, जिसके वर्ष 2025 तक ई-कॉमर्स बाजार में कम से कम पांच फीसदी योगदान देने की संभावना है।  दिग्गज तकनीकी कंपनी एमेजॉन ने भारत में दस लाख से अधिक लघु एवं मझोले उद्यमों (एसएमबी) को डिजिटल बनाया है। केवल इस साल ही डेढ़ लाख से अधिक विक्रेता इस मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं। एमेजॉन इंडिया के उपाध्यक्ष मनीष तिवारी ने कहा कि कोविड के बाद विक्रेता पंजीकरण 60 फीसदी बढ़ा है।  रेडसीर शैडोफैक्स लॉजिस्टिक्स इंडेक्स (आरएसएलआई) के मुताबिक भारत में ई-कॉमर्स बाजार अगले पांच वर्षों के दौरान 40 फीसदी चक्रवृद्धि सालाना वृद्धि दर से बढऩे का अनुमान है। ऑलाइन बिक्री का कुल उत्पाद मूल्य वित्त वर्ष 2025 तक बढ़कर 180 अरब डॉलर होने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2020 में 32 अरब डॉलर था। इसका मतलब कि वित्त वर्ष 2025 में 10.5 अरब उत्पादों की आपूर्ति होगी, जो वित्त वर्ष 2020 की तुलना में चार गुना होगी। यह इंडेक्स रेडसीर और लॉजिस्टिक्स कंपनी शैडोफैक्स ने मिलकर विकसित किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को सीधे अपने उत्पाद बेचने वाले डायरेक्ट टू कंज्यूमर ब्रांड (डी2सी) इस साल तेजी से उभरे हैं और उनके अगले साल अहम भूमिका निभाने की संभावना है। एवेंड्स कैपिटल की एक रिपोर्ट के मुताबिक डी2सी ब्रांडों के लिए वर्ष 2025 तक 100 अरब डॉलर का बाजार बन सकता है। एवेंड्स कैपिटल वित्तीय सेवा कंपनी एवेंड्स समूह की निवेश बैंकिंग शाखा है। एवेंड्स के मुताबिक भारत विश्व के सबसे बड़े खुदरा बाजारों में से एक है, जिसके वर्ष 2025 तक 1.7 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार करने की संभावना है। देश में पिछले तीन साल के दौरान 8 करोड़ ऑनलाइन खरीदार बढ़े हैं, जिससे कुल ऑनलाइन ग्राहक 13 करोड़ हो गए हैं। 
 
 
Keyword: covid-19, lockdown, e commerce,,
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