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केबल उद्योग को सुदृढीकरण से बल

यश उपाध्याय / मुंबई December 24, 2020

काफी हद तक असंगठित केबल उद्योग में तेजी से हो रहा सुदृढीकरण बड़े विनिर्माताओं के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इससे उनकी लाभप्रदता और वृद्धि की संभावनाओं में सुधार होगा।  विश्लेषकों द्वारा चैनलों की जांच से पता चलता है कि कोविड वैश्विक महामारी ने छोटी एवं क्षेत्रीय कंपनियों के लिए नकदी का संकट पैदा कर दिया है। मांग में सुधार होने के साथ ही कार्यशील पूंजी जरूरतों में वृद्धि के कारण बेहतर क्षमता, दमदार बहीखाते और विविध पोटफोलियो वाली प्रतिस्पर्धी कंपनियों के लिए बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर पैदा हुआ है। 
 
विश्लेषकों के आकलन के अनुसार, इस क्षेत्र में असंगठित कंपनियों की हिस्सेदारी 2024 में घटकर 26 फीसदी रह जाएगी जो 2018 में करीब 25 फीसदी थी। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में केवल एवं वायर श्रेणी में कमजोर वृद्धि के बावजूद एडलवाइस सिक्योरिटीज का कहना है कि डीलरों से हुई बातचीत से पता चलता है कि इस क्षेत्र में बड़ी कंपनियों के लिए मांग में वृद्धि बेहतर है। इससे बाजार हिस्सेदारी में संभावित बदलाव का पता चलता है।  एडलवाइस सिक्योरिटीज के अनुसंधान विश्लेषक अमित महावर ने कहा, 'दूसरी और तीसरी तिमाही के दौरान कुछ श्रेणियों (खुदरा वायर) में बड़ी कंपनियों के लिए सालाना आधार पर बिक्री में धीरे-धीरे सुधार हुआ है।' उन्होंने कहा, 'मूल्य निर्धारण और मात्रात्मक बिक्री में बेहतर वृद्धि होने के कारण डीलरों को वित्त वर्ष 2021 के लिए अपने लक्ष्यों तक पहुंचने की उम्मीद है। हाल के महीनों में सरकारी मांग में भी काफी सुधार हुआ है।'
 
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के संस्थागत अनुसंधान विश्लेषक नवीन त्रिवेदी ने भी इसी तरह की राय जाहिर की। उन्होंने कहा, 'हाल के महीनों में मात्रात्मक बिक्री में धीरे-धीरे सुधार हुआ है। असंगठित क्षेत्र के मुकाबले संगठित कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर रहा है और उनकी बाजार हिस्सेदारी बढ़ी है। संगठित कंपनियां अपनी बड़ी क्षमताओं और मजबूत बहीखाते के कारण बेहतर स्थिति में हैं जबकि असंगठित क्षेत्र आपूर्ति शृंखला संबंधी व्यवधान जैसी समस्याओं से अब भी जूझ रहा है।' लॉकडान संबंधी व्यवधान के बाद मांग परिदृश्य में सुधार के साथ ही तांबा, एल्युमीनियम और पॉलिविनाइल क्लोराइड (पीवीसी) जैसे प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में भी उल्लेखनीय तेजी आई है। लेकिन इसके बावजूद बाजार में चिंता की स्थिति नहीं है। आमतौर पर कंपनियां कच्चे माल की बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों के कंधों की ओर सरका देती हैं। गौरतलब है कि हाल के महीनों में लागत बढऩे के कारण कंपनियां कीमत में वृद्धि कर रही हैं।
 
एडलवाइस के आकलन के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के दौरान इन कंपनियों के राजस्व में 1 से 5 फीसदी के दायरे में वृद्धि होगी जिसे मुख्य तौर पर मूल्य वृद्धि से रफ्तार मिलेगी। जबकि राजस्व के स्थिर रहने अथवा उसमें 9 फीसदी के संकुचन का अनुमान जाहिर किया गया था। इस दौरान मार्जिन में भी 60 से 130 आधार अंकों के दायरे में वृद्धि दिख सकता है। ऐसे में अचरज की बात नहीं है कि पिछले तीन महीनों के दौरान पॉलिकैब इंडिया, केईआई इंडस्ट्रीज और हैवेल्स जैसे शेयरों में 21 से 35 फीसदी की वृद्धि हुई है।
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