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रोजगार परिदृश्य में दिख रहे सुधार के संकेत

श्रम-रोजगार
महेश व्यास /  December 24, 2020

दूसरी तिमाही के वृद्धि अनुमान उम्मीद से बेहतर रहने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत में सुधार की उम्मीदें मजबूत हुई हैं। पहली तिमाही में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 23.9 फीसदी का संकुचन हुआ था। दूसरी तिमाही के आंकड़े नवंबर 2020 के आखिर में जारी होने की पूर्व संध्या पर रॉयटर्स के सर्वेक्षण ने 8.8 फीसदी संकुचन का पूर्वानुमान लगाया था। लेकिन दूसरी तिमाही में महज 7.5 फीसदी के ही संकुचन से अर्थव्यवस्था ने सबको अचंभे में डाल दिया। इसने अपेक्षा से अधिक तेजी से हालात सुधरने की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।

 
अक्टूबर की शुरुआत में तीसरी तिमाही के दौरान वास्तविक जीडीपी में 3.1 फीसदी संकुचन का अनुमान जताया गया था। दिसंबर की शुरुआत होने तक यह अनुमान सुधार के साथ 2 फीसदी संकुचन का ही रह गया।  अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाली संस्था सीएमआईई के उपभोक्ता पिरामिड हाउसहोल्ड सर्वे से हासिल रोजगार आंकड़ों से पता चला कि साल-दर-साल तुलना में रोजगार पहली तिमाही में 20.3 फीसदी तक गिरा था जबकि दूसरी तिमाही में यह गिरावट 3.5 फीसदी रही। दोनों ही तिमाहियों में वास्तविक जीडीपी की गिरावट रोजगार से कहीं अधिक तीव्र रही। लेकिन वास्तविक जीडीपी एवं रोजगार में बदलाव, दोनों ही पैमानों से एक ही संदेश मिला। वह संदेश था कि पहली तिमाही में बहुत तीव्र गिरावट रही थी और दूसरी तिमाही में संकुचन दर कम होने से हालात में खासा सुधार आया। 
 
भारत में वास्तविक जीडीपी बदलाव के आधिकारिक तिमाही आंकड़े संगठित क्षेत्रों के प्रदर्शन को ही काफी हद तक दर्शाते हैं। सीएमआईई के रोजगार आंकड़े संगठित एवं असंगठित दोनों ही क्षेत्रों को कहीं बेहतर ढंग से समाहित करते हैं। यह उस दिशा के बारे में काफी हद तक गहरी नजर प्रदान करता है जिधर अर्थव्यवस्था बढ़ती हुई नजर आ रही है। रोजगार आंकड़ों के साथ फायदा यह है कि यह जीडीपी आंकड़े से कहीं अधिक तेजी से उपलब्ध होता है। जीडीपी आंकड़े तिमाही खत्म होने के दो महीने बाद जारी किए जाते हैं। दूसरी तरफ रोजगार आंकड़ा तिमाही खत्म होने के अगले ही दिन उपलब्ध हो जाता है। इससे भी अहम है कि रोजगार आंकड़े मासिक एवं साप्ताहिक आधार पर भी उपलब्ध हैं। इन मासिक एवं साप्ताहिक पूर्वानुमानों से यह आभास मिल जाता है कि अमुक तिमाही किस स्थिति में खत्म होगी? लिहाजा रोजगार आंकड़े हमें वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में रिकवरी के बारे में  क्या बताते हैं?  इसके जवाब के लिए हम रिकवरी प्रक्रिया या इसकी गति को समझते हैं और फिर एक आकलन करते हैं। 
 
मार्च 2020 में समाप्त तिमाही में भारत में कुल 40.6 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ था। वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में यह तीव्र गिरावट के साथ 32.06 करोड़ पर आ गया। सितंबर तिमाही में इस गिरावट के बड़े हिस्से की भरपाई हो गई जब रोजगार फिर से बढ़कर 39.49 करोड़ हो गया। हालांकि यह मार्च तिमाही और एक साल पहले के स्तर से फिर भी कम था। फिर भी यह एक असरदार एवं तीव्र रिकवरी थी। दूसरी तिमाही के हरेक महीने में रोजगार इससे पहले के महीने से अधिक था। रिकवरी में बढ़त हो रही थी। लेकिन यह इनमें से हरेक महीने में यह थोड़ी सुस्त रफ्तार से बढ़ रही थी। इसे आंशिक रूप से समझा जा सकता है क्योंकि शुरुआती लाभ बड़े हो सकते हैं स्वरोजगार में लगे लोग अर्थव्यवस्था के खुलते ही अपने कारोबार में लग गए और हताशा में दैनिक कामगारों को कम मजदूरी पर भी किसी भी तरह का रोजगार स्वीकार करने के लिए बाध्य होना पड़ा। जल्द ही ये विकल्प भी खत्म हो गए और दूसरी तिमाही में रिकवरी की रफ्तार धीमी पड़ गई। 
 
तीसरी तिमाही के पहले महीने यानी अक्टूबर में रोजगार में किसी भी तरह का अतिरिक्त सुधार नहीं दिखा और असल में इसमें फिसलन देखी गई। सितंबर की तुलना में अक्टूबर में करीब 5 लाख रोजगार चले गए। यह सांख्यिकीय रूप से बेहद कम एवं महत्त्वहीन है। यह भी हो सकता है कि सितंबर से अक्टूबर के दौरान रोजगार में किसी भी तरह का बदलाव न हो। लेकिन ऐसा होता है तो भी वह एक खराब नतीजा होगा। नवंबर 2020 में रोजगार आंकड़े में 35 लाख की बड़ी गिरावट आई। कुल मिलाकर बीते दो महीनों में रोजगार में 40 लाख तक की गिरावट आई है। नवंबर 2020 में 39.36 करोड़ पर आंकड़ा होने के बावजूद यह मार्च 2020 तिमाही के स्तर से करीब 1 करोड़ नीचे है। दिसंबर के पहले तीन हफ्तों के साप्ताहिक पूर्वानुमानों से संकेत मिलता है कि नवंबर की तुलना में कुल रोजगार में आंशिक सुधार आने की संभावना है। हम साप्ताहिक आधार पर तीन बड़े अनुपात ही पैदा करते हैं, न कि रोजगार में लगे लोगों की कुल संख्या जैसा समग्र मूल्य। श्रम भागीदारी दर (एलपीआर) की स्थिति सुधरी है। दिसंबर के पहले तीन हफ्तों में औसत एलपीआर 41.4 फीसदी था जो कि नवंबर के 40 फीसदी से काफी अधिक है। हालांकि श्रमिक के लिए श्रम बाजार में प्रवेश करने के उत्साह को काफी अधिक बेरोजगारी दर का सामना करना पड़ा। नवंबर में 6.5 फीसदी पर रही बेरोजगारी दर दिसंबर के पहले तीन हफ्तों में 9.5 फीसदी औसत पर जा पहुंची। इसका नतीजा यह हुआ कि रोजगार दर मामूली बढ़त के साथ 37.5 फीसदी हो गई। इस तरह दिसंबर के अंतिम 10 दिनों में अगर किसी तरह की उठापटक नहीं होती है तो यही संभावना है कि दिसंबर 2020 में रोजगार आंकड़ा बढ़कर 39.4 करोड़ के करीब रहेगा। इस तरह वित्त वर्ष 2019-20 की तीसरी तिमाही 39.5 करोड़ रोजगार के साथ खत्म होगी। इस तरह दिसंबर तिमाही में रोजगार आंकड़ा दिसंबर 2019 तिमाही के 40.5 करोड़ रोजगार की तुलना में 2.5 फीसदी कम होगा। साफ है कि अर्थव्यवस्था सितंबर 2020 तिमाही की तुलना में कम संकुचित होगी।
 
(लेखक सीएमआईई के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी हैं)
Keyword: employment, economy, GDP,,
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