बिजनेस स्टैंडर्ड - कोविड-19: आदतों में आया सुधार
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कोविड-19: आदतों में आया सुधार

विवेट सुजन पिंटो /  December 06, 2020

आईपीजी नेटवर्क से जुड़ी मीडिया एजेंसी लोडस्टार यूएम के एक नए अध्ययन में कोविड-19 महामारी के कारण लोगों की आदतें और चलन में कुछ स्थायी रुझानों का संकेत मिला है। इसमें अपना काम खुद से करने, डिजिटल सामग्री की खपत बढऩे, घर में खाना पकाने और सबके संपर्क में रहने की अहमियत को समझने जैसी आदतें और चलन भी शामिल हैं। बिज़नेस स्टैंडर्ड से भी इस अध्ययन के कुछ निष्कर्षों को साझा किया गया है जिससे अंदाजा मिलता है कि पिछले कुछ महीनों में किस तरह स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं और यह चिंता महामारी के खत्म होने के बाद भी बरकरार रहेगी। 

 
मूल रूप से, लोडस्टार यूएम सोशल मीडिया के संवाद पर नजर रखती है और इसने इस बात का जायजा लिया कि लोग मार्च और जुलाई के बीच क्या सर्च कर रहे थे ताकि यह अंदाजा मिले कि महामारी के पहले चरण के दौरान आखिर किन बातों पर गौर किया जा रहा था। इस प्रारूप का इस्तेमाल यह पहचानने के लिए किया गया है कि उपभोक्ता अब अपनी आदतों में क्या बदलाव ला रहे हैं। लोडस्टार यूएम इंडिया की मुख्य रणनीति अधिकारी अदिति मिश्रा ने कहा, 'महामारी के शुरुआती 180 दिनों में सांस्कृतिक बदलाव देखा गया जिसे चार तरह के बदलावों में देखा जा सकता है। इनमें किसी परिस्थिति का मुकाबला करना, नई जुगत से मन बहलाना और काम को अंजाम देना, पीछे हटना, सीमारहित दुनिया को प्रभावित करना शामिल हैं।'
 
वह कहती हैं, 'इनमें मन बहलाने के लिए नए उपाय करना एक ऐसा विषय है जिसे हमने महामारी के दूसरे चरण में भी जारी रखा गया है और इसके तहत सोशल मीडिया पर जूम कॉल, ग्रुप हैंगहाउट्स और ई-लर्निंग जैसे विकल्प अपनाए जा रहे हैं।' अब आजकल घर और दफ्तर के काम के बीच संतुलन बिठाने के अलावा पूरी चर्चा भी डिजिटल भुगतान और इससे जुड़ी चुनौतियों से जुड़ी होती है। हाल ही में मैकिंजी की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि  60 से 70 और 40 से 50 के आयु वर्ग के उपभोक्ताओं ने काफी तेजी से डिजिटल से जुड़ी आदतों को अपनाया है। 
 
मैकिंजी ने कहा कि 60 और 70 के आयु वर्ग वाले लगभग 55 प्रतिशत लोग महामारी के दौरान ऑनलाइन थे जबकि 40 से 50 साल के 59 प्रतिशत लोग अपनी जरूरत की खरीदारी के लिए सर्च करने से लेकर ईमेल, चैटिंग करने के साथ-साथ सीख रहे थे और अपना मनोरंजन भी कर रहे थे। यह अध्ययन पिछले कुछ महीनों में विभिन्न शहरों में विभिन्न आयु समूहों के लोगों से बात करके किया गया था। मैकिंजी के मुताबिक मिलेनियल्स यानी साल 2000 के बाद जन्मी पीढ़ी सबसे ज्यादा यानी करीब 60 फीसदी ऑनलाइन रहे।
 
मिश्रा कहती हैं कि कोविड-19 महामारी की वजह से लोगों में घरेलू वस्तुओं के इस्तेमाल को लेकर काफी कुशलता आई है और लोग ऑनलाइन बातचीत के लिए फोन स्टैंड बनाने से लेकर नए तरह का कीटाणुनाशक स्प्रे, पीपीई सूट और सामाजिक दूरी बरतने के लिए जरूरी उपकरण तैयार करने में सफल रहे हैं। जाहिर है कि अब पूरी बातचीत इस पर टिकी है कि टीका कितनी तेजी से बाजार में उपलब्ध होगा, यह कितना प्रभावी होगा और इसका सामान्य जनजीवन पर कितना प्रभाव पड़ेगा। 
 
ब्रांडों के लिए सबक
 
मिश्रा का कहना है कि उपभोक्ता वस्तुओं से लेकर वाहन और फैशन क्षेत्र के ब्रांड मसलन मैकडॉनल्ड्स, कोका कोला, मिंत्रा, फोक्सवैगन जैसे ब्रांडों ने महामारी के दौरान स्वास्थ्य, स्वच्छता, सुरक्षा और सामाजिक दूरी को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को लॉन्च किया है। अमूल जैसे कुछ अन्य ब्रांडों ने घर में बने भोजन को बढ़ावा देने की बात पर जोर दिया है जिसका पालन लॉकडाउन के दौरान सख्ती से किया गया। हालांकि अनलॉक का चरण शुरू होने के बाद उपभोक्ता अब और अधिक यात्रा कर रहे हैं लेकिन लोग सावधानी बरतते हुए सुरक्षा का ध्यान रखकर सामाजिक दूरी के उपायों पर अमल भी कर रहे हैं। 
 
मिश्रा का कहना है कि कहीं ठहरने या काम वाली जगह पर ही छुट्टियां मनाने जैसे रुझानों में तेजी देखी गई है और यह रुझान आगे भी बरकरार रहने की संभावना है। वह कहती हैं, 'कुछ और भी खास बातें हमारे अध्ययन में सामने आई हैं। इसमें अच्छा करने, सकारात्मक रहने और कृतज्ञ रहने का चलन भी शामिल है। लोगों ने इन आंतरिक विशेषताओं पर ध्यान दिया जिससे उन्हें मुश्किल दौर से उबरने में मदद मिल रही है। इससे उन्हें अगले चरण में भी मदद मिलनी चाहिए।'
Keyword: covid, lifestyle, IPG network,,
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