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हेटरो बनाएगी स्पूतनिक-5 की खुराक

सोहिनी दास /  November 27, 2020

हैदराबाद स्थित हेटरो प्रति वर्ष स्पूतनिक-5 की 10 करोड़ खुराक का उत्पादन करने के लिए रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) के साथ काम करेगी। एक बयान में कहा गया है कि दोनों पक्षों का इरादा वर्ष 2021 के आरंभ में स्पूतनिक-5 का उत्पादन शुरू करने का है। इस सप्ताह की शुरुआत में रूस के सॉवरिन धन कोष आरडीआईएफ के मुख्य कार्याधिकारी किरिल दिमित्रिएव ने कहा था कि वे वर्ष 2021 में दुनिया भर को स्पूतनिक-5 की एक अरब खुराक की आपूर्ति करने की योजना बना रहे हैं और उन्होंने भारत, चीन, ब्राजील, कोरिया, हंगरी तथा कुछ अन्य देशों के साथ साझेदारी की है। आरडीआईएफ ने दावा किया है कि स्पूतनिक-5 टीके की 1.2 अरब खुराकों के लिए 50 से ज्यादा देशों से मांग आई है।

दिमित्रिएव का कहना है कि हमें आरडीआईएफ और हेटरो के बीच समझौते की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है जिससे भारतीय भूमि पर सुरक्षित और अत्यधिक प्रभावी स्पूतनिक-5 टीके के उत्पादन का मार्ग प्रशस्त होगा। टीके के क्लीनिकल परीक्षण के अंतरिम परिणाम पहली खुराक के बाद 42वें दिन 95 प्रतिशत असर दिखा रहे हैं। उन्हें इस बात का भरोसा है कि स्पूतनिक-5 हर उस देश के राष्ट्रीय टीका पोर्टफोलिया का जरूरी हिस्सा बन जाएगा जो अपने लोगों को कोरोनावायरस से बचाना चाहता है। इसका श्रेय हेटरो के साथ हमारी साझेदारी को जाता है। हम महत्त्वपूर्ण रूप से उत्पादन क्षमता बढ़ा पाएंगे और इस वैश्विक महामारी के चुनौतीपूर्ण समय में भारत के लोगों को कारगर समाधान प्रदान कर सकेंगे। हेटरो लैब्स के निदेशक (अंतरराष्ट्रीय विपणन) बी मुरली कृष्ण रेड्डी ने कहा कि स्थानीय स्तर पर इस उत्पाद का विनिर्माण रोगियों के लिए शीघ्र पहुंच के लिए खास है। हैदराबाद स्थित अन्य कंपनी डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज (डीआरएल) इस टीके के वितरण और क्लीनिकल परीक्षण के लिए भारत में आरडीआईएफ की साझेदार है। इसी महीने उसने इस बात के संकेत दिए थे कि भारत में उसके साझेदारी वाले स्थलों पर (विनिर्माण के लिए) प्रौद्योगिकी स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जल्द ही अन्य स्थलों पर भी ऐसा शुरू होगा। क्लीनिकल परीक्षण के लिए स्पूतनिक-5 टीकों की पहली खेप भी आ चुकी है। स्पूतनिक-5 के दाम 10 डॉलर प्रति खुराक रखे गए हैं। इसमें दो खुराकों का कोर्स होता है। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स को आसान बनाने के लिए इसकी एक और किस्म विकसित की जा रही है जो 2-8 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर रहेगी। यह हिम शुष्कन संस्करण होगा। हिम शुष्कण या फ्रिज ड्राइंग को आमतौर पर कम तापमान वाली निर्जलीकरण प्रक्रिया के रूप में जाना जाता है जिसमें उत्पाद को ठंड करना, दबाव कम करना और फिर बर्फ हटाना शामिल रहता है। इस तरह स्पूतनिक-5 के शुष्क रूप से लॉजिस्टिक संबंधी बाधाएं काफी कम हो जाएंगी और लोगों तक इसकी पहुंच में भी सुधार होगा। फिलहाल इसे स्थिर रहने के लिए -18 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है।

इस बीच क्लीनिकल परीक्षण के आंकड़ों के दूसरे अंतरिम विश्लेषण से पता चला है कि पहली खुराक के बाद 28वें दिन स्पूतनिक-5 टीके की कारगरता 91.4 प्रतिशत रही है। पहली खुराक के बाद 42वें दिन इस टीके की कारगरता 95 प्रतिशत से अधिक रहती है। अंतरिम अनुसंधान के आंकड़ों को गामालेया सेंटर के दल द्वारा विश्लेषण करने वाले प्रमुख अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पत्रिकाओं में से किसी में प्रकाशित किया जाएगा। स्पूतनिक-5 टीके के तीसरे चरण के क्लीनिकल ​​परीक्षण संपन्न होने के बाद गामालेया सेंटर इस क्लीनिकल परीक्षण की पूरी रिपोर्ट उपलब्ध कराएगा।

फिलहाल रूस में स्पूतनिक-5 टीके के तीसरे चरण में 40,000 स्वयं-सेवक हिस्सा ले रहे हैं जिनमें से 22,000 से ज्यादा स्वयंसेवकों को पहली खुराक दी गई थी और 19,000 से ज्यादा स्वयंसेवकों को पहली और दूसरी खुराक दी गई थी। तीसरे चरण के क्लीनिकल परीक्षणों को मंजूरी दी जा चुकी है और बेलारूस, यूएई, वेनेजुएला तथा अन्य देशों में ये परीक्षण चल रहे हैं। भारत में दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण चल रहे हैं।

'नियामक टीके का करे आकलन'

ब्रिटेन की सरकार ने शुक्रवार को कहा कि देश के दवा नियामक को औपचारिक तौर पर कहा गया है कि वह आकलन करे कि क्या एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफर्ड विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किए गए कोरोनावायरस के टीके को इस्तेमाल के लिए अधिकृत किया जा सकता है। टीके के परीक्षण के प्रारंभिक परिणामों पर उठे सवालों के बीच यह कदम उठाया गया है। कंपनी और विश्वविद्यालय ने बताया कि उनके निष्कर्ष का सबसे उत्साहजनक हिस्सा यह है कि वह खुराक की गलतियों के कारण सामने आया है। ब्रिटेन के स्वास्थ्य सचिव मैट हैनकॉक ने कहा कि उन्होंने दवा एवं स्वास्थ्य उत्पाद नियामक एजेंसी से कहा है कि तय करे कि क्या टीका कठिन सुरक्षा मानकों को पूरा करता है।      भाषा

Keyword: हेटरो, स्पूतनिक-5, खुराक, आरडीआईएफ, टीका, कोरोनावायरस, डीआरएल,
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