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'जीएसटी पंजीकरण सख्त बनाएं'

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली November 22, 2020

जीएसटी परिषद की विधि समिति ने पंजीकरण प्रक्रिया कड़ी करने की सिफारिश की है ताकि फर्जी बिल जारी करने वालों को इस प्रणाली से बाहर किया जा सके। सूत्रों ने यह जानकारी दी है। समिति ने दो दिन तक अपनी बैठक के बाद सुझाव दिया कि वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली (जीएसटी) के तहत नए या ताजा आवेदनों के लिए आधार जैसी पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। राजस्व विभाग के सूत्रों ने कहा कि इसके तहत नया पंजीकरण ऑनलाइन किया जा सकता है, जिसमें दस्तावेजों के उचित सत्यापन समेत लाइव फोटो और बायोमेट्रिक्स का उपयोग किया जाएगा।

ऐसी सुविधाएं बैंकों, डाकघरों और जीएसटी सेवा केंद्रों में मुहैया कराई जा सकती हैं। जीएसटी सेवा केंद्र पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर काम कर सकते हैं, जो नई पंजीकरण सुविधाएं मुहैया करा सकते हैं और फर्जी पंजीकरण की आवश्यक जांच-पड़ताल कर सकते हैं।

राजस्व विभाग के सूत्रों ने कहा कि समिति ने सुझाव दिया कि अगर वह गैर-आधार सत्यापन आधारित पंजीकरण प्रक्रिया को चुनता है और उसके पास आयकर रिटर्न नहीं है तो अनिवार्य भौतिक सत्यापन और व्यक्तिगत पहचान के लिए नया पंजीकरण किया जाए। ऐसे मामले में उसे पर्याप्त विश्वसनीयता वाले दो करदाताओं का सिफारिश पत्र सौंपना पड़ सकता है।

पंजीकरण प्रक्रिया की रफ्तार आवेदक के भरोसेमंद होने पर निर्भर करेगी। सूत्रों के मुताबिक समिति का मानना था कि भरोसेमंद श्रेणी में शामिल किए जाने के लिए डीलर का आयकर ब्योरा अच्छा होना चाहिए। किसी कानून के उल्लंघन के लिए उस पैन पर कोई पिछला जीएसटी पंजीकरण रद्द नहीं होना चाहिए। ऐसे भरोसेमंद आवेदकों को सात कार्यदिवसों के भीतर पंजीकरण दिया जा सकता है। अगर वह भरोसेमंद की श्रेणी में शामिल नहीं है तो 60 कार्यदिवसों में सशर्त पंजीकरण दिया जा सकता है। यह कारोबारी जगह के भौतिक सत्यापन के बाद ही दिया जा सकता है। ऐसे मामलों में उनके खरीदारों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) उनके रिटर्न भरने के बाद ही दिया जाएगा। समिति ने यह भी सुझाव दिया कि डीलर को अपने बकाया करों की दो फीसदी तक राशि नकद या बैंक गारंटी के जरिये जमा करानी पड़ सकती है। इस समय वे सभी कर आईटीसी के जरिये जमा करा सकते हैं।

उन्हें आईटीसी आधारित भुगतान की सुविधा प्राप्त करने की खातिर अपनी वित्तीय साख साबित करने के लिए कुछ भरोसेमंद आयकर ब्योरे देने होंगे। उदाहरण के लिए 100 करोड़ रुपये कारोबार करने वाले डीलर को औसतन 18 करोड़ रुपये कर चुकाना है तो उसे 3,60,000 रुपये बैंक गारंटी के जरिये चुकाने पड़ सकते हैं। समिति ने सुझाव दिया कि सत्यापन के आधार पर संबंधित अधिकारी इन शर्तों को नरम बनाया जा सकते हैं या पूरी तरह हटा सकते हैं। इसके अलावा जिस व्यक्ति में जोखिम नजर आएगा, उसे जीएसटी सेवा केंद्रों में व्यक्तिगत सत्यापन से गुजरना पड़ेगा। समिति ने जोखिम वाले डीलरों की सही पहचान के लिए बिज़नेस इंटेलिजेंस ऐंड फ्रॉड एनालिटिक्स (बीआईएफए) को पूरी तरह लागू करने का प्रस्ताव रखा है।

सूत्रों ने कहा कि इसने जोखिम वाले कारोबारियों की पहली खेप को स्थगित करने और ऐसे करदाताओं को छह महीने तक रिटर्न नहीं भरने जैसे अहम मापदंडों के आधार पर चिह्नित करने का सुुझाव दिया।

समिति ने कहा कि जीएसटी में करीब छह लाख निष्क्रिय पंजीयक हैं। इसके अलावा जिन्हें वर्ष 2018-19 और 2019-20 में पंजीयन दिया गया, उनमें से करीब 35,000 डीलरों पर सालाना पांच लाख रुपये से अधिक जीएसटी देनदारी थी और उन्होंने 99 फीसदी आयकर रिटर्न के जरिये चुकाया था। उन्होंने पिछले तीन वर्षों में एक लाख रुपये ताक भी आयकर नहीं चुकाया। समिति ने यह भी सुझाव दिया कि इन उपायों को औपचारिक रूप से जीएसटी परिषद में पेश करने से पहले उन पर राज्यों और अन्य भागीदारों के साथ चर्चा की जाए। सूत्रों ने कहा कि समिति के सुझावों से फर्जी बिलों की समस्या का समाधान होगा। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि जीएसटी प्रणाली से प्राप्त कारोबारी सहूलियत पर कोई असर नहीं पड़े।

जीएसटी अधिकारियों ने फर्जी बिल जारी करने वालों की देश भर में धरपकड़ शुरू की है। इस मुहिम के 10 दिन में ही जीएसटी खुफिया महानिर्देशालय (डीजीजीआई) और सेंट्रल जीएसटी कमिश्नरेट ने 48 लोगों को पकड़ा है और 2,385 कंपनियों पर 648 मामले दर्ज किए हैं।

Keyword: पंजीकरण, जीएसटी परिषद, फर्जी बिल, राजस्व विभाग, दस्तावेज,
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