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आईपीओ बाजार में मजबूत क्षेत्रों का दबदबा

समी मोडक /  November 13, 2020

बीएस बातचीत

कोविड-19 महामारी के बावजूद इक्विटी कोष उगाही इस साल रिकॉर्ड पर पहुुंच चुकी है। यूबीएस इंडिया में निवेश बैंकिंग के प्रमुख एवं प्रबंध निदेशक अनुज कपूर ने समी मोडक के साथ बातचीत में अगले साल के लिए प्रमुख बाजारों के लिए मुख्य वाहकों और रुझानों के बारे में विस्तार से बातचीत की। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:

वर्ष 2020 में कोष उगाही रिकॉर्ड को छू चुकी है। इसकी मुख्य वजह क्या हैं?

इक्विटी बाजारों में तेजी के लिए मुख्य कारण वैश्विक वित्तीय व्यवस्थाओं में व्यापक प्रोत्साहन रहे हैं। इससे निवेशकों को इसे लेकर भरोसा बढ़ा है कि बाजारों को सरकारी बैलेंस शीट से लगातार मदद मिलेगी। साथ ही अनुकूल परिवेश से कई कंपनियों को अपनी निर्गम योजनाएं आगे बढ़ाने में मदद मिली है। कोविड-19 से ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में ट्रेवल, कंज्यूमर, लीजर और एंटरटेनमेंट रहे हैं। वहीं हेल्थकेयर और प्रौद्योगिकी कंपनियां इस महामारी की दो सबसे बड़ी लाभार्थी रही हैं। कंपनियों ने नकदी किल्लत से बचने के लिए बाजारों की मदद ली है।


अगले 6-12 महीनों के लिए परिदृश्य
कैसा रहेगा?

मेरा मानना है कि हम सुधार चक्र के शुरू में हैं जिससे कम मुद्रास्फीति और कम ब्याज दरों की लंबी अवधि का संकेत मिलता है। यह खासकर ऐसे परिवेश का संकेत है जिसमें बॉन्डों के मुकाबले इक्विटी पसंदीदा बने हुए हैं। लेकिन इस तरह की तेजी के बाद, अल्पावधि में इक्विटी बाजार में उतार-चढ़ाव आश्चर्यजनक नहीं होगा। जहां अमेरिकी चुनाव परिणाम आ चुका है, लेकिन बाजार महामारी की दूसरी या तीसरी लहर की आशंका को लेकर अस्थिर बने रह सकते हैं। भले ही टीके की उम्मीदों से बाजारों में अनुकूल बदलाव दिखा है। मेरा मानना है कि भारत 2021 के लिए एक आकर्षक बाजार रह सकता है।


क्या आप मानते हैं कि कोविड से पहले आईपीओ के आवेदन करने वाली कंपनियां मौजूदा समय में बाजार में आएंगी?

भारत के इक्विटी बाजारों की नजर राइट इश्यू, क्यूआईपी (पात्र संस्थागत नियोजन), और बड़े सौदों पर लगी रही है, लेकिन हाल में आईपीओ बाजार में तेजी आई है। साल के अंत में बाजार गतिविधि में नरमी आ सकती है, लेकिन मेरा मानना है कि अर्थव्यवस्थाओं में सुधार के साथ भारतीय कंपनियां आईपीओ के जरिये नकदी का लाभ उठाने में सक्षम होंगी।


क्या वित्तीय कंपनियों द्वारा आईपीओ के लिए दिलचस्पी घटी है?

महामारी से पिछले 6-8 महीने के दौरान आईपीओ के लिए आवेदन करने वाली कंपनियों की संख्या घटी है। कुछ अपने पहले से पेश ऑफर दस्तावेजों में बदलाव ला रही हैं। अगले कुछ महीनों में हेल्थकेयर, टेक्नोलॉजी, केमिकल, और कंज्यूमर जैसे क्षेत्रों से निर्गमों में तेजी देखी जा सकती है, लेकिन हॉस्पिटैलिटी, रियल एस्टेट, एंटरटेनमेंट और रिटेल जैसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों से इस तरह की गतिविधि में कुछ समय लग सकता है। वित्तीय सेवा निर्गमों की संख्या में संदर्भ में बेहद आशाजनक क्षेत्र समझा जाता है और मुझे नहीं लगता कि 2021 इस संदर्भ में इन कंपनियों के लिए अलग रहेगा।


सूचीबद्घता समाप्त करने के ताजा मामलों के बारे में आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

हाल के महीनों में, वेंदात, अदाणी पावर और हेक्सावेयर जैसे शेयर सूचीबद्घता समाप्त करने के प्रस्तावों से जुड़े रहे हैं जिससे निवेशक उनकी ओर आकर्षित हुए। बाजार नियामक सेबी के नियम अन्य बाजारों में प्राइवेट बनने की संभावना तलाश रही कंपनियों के लिए प्रासंगिक नहीं हैं। हालांकि प्रवर्तकों और निवेशकों के बीच चुनौतियों की वजह से सूचीबद्घता समाप्त करने की कई पेशकशें अधर में लटकी हुई हैं।


निवेश बैंकर के नजरिये से कोविड के बाद क्या बदलाव आया है?

वर्चुअल रोडशो की शुरुआत से समय, लागत और पूंजी बाजार सौदों से संबंधित चुनौतियों को कम करने में मदद मिली है। फिर भी, आमने-सामने के वार्तालाप निवेशकों के साथ भरोसा कायम करने में ज्यादा उपयोगी हैं, खासकर नई निर्गम कंपनी के मामले में, जिसके लिए सीमित ऐतिहासिक आंकड़ा उपलब्ध हो सकता है। यह स्पष्ट है कि कोविड महामारी उद्योग को अपने रणनीतिक एजेंडे की समीक्षा करने, रिटर्न-टु-वर्क रणनीति पर अमल करने और अपने कर्मियों की डिजिटल सक्षमता पर विचार करने के लिए बाध्य करेगी।

Keyword: आईपीओ, इक्विटी कोष, यूबीएस इंडिया, निवेश बैंकिंग, अनुज कपूर,
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