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राजमार्ग परियोजनाओं के बदलेंगे नियम

मेघा मनचंदा / नई दिल्ली October 19, 2020

राजमार्गों में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार जल्द ही हाइब्रिड-एन्युटी अनुबंधों के लिए नए नियम जारी करेगी। हाइब्रिड एन्युटी अनुबंध के तहत परियोजनाओं को केंद्र सरकार द्वारा आंशिक रूप से वित्त मुहैया कराया जाता है। आम तौर पर सरकार इस तरह की परियोजनाओं में 40 फीसदी इक्विटी निवेश करती है और शेष राशि परियोजना के डेवलपर को कर्ज एवं इक्विटी के तौर पर जुटानी होती है।

समझा जाता है कि हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत कंपनियों को सरकार की ओर से अब छोटी-छोटी किस्तों में पैसे दिए जाएंगे लेकिन किस्तें जल्दी जल्दी दी जाएंगी। उदाहरण के लिए अगर कंपनी को परियोजना लागत का 40 फीसदी रकम पांच बराबर किस्तों में मिलती थी तो नई व्यवस्था के तहत उसे यह रकम 10 किस्तों में दी जाएगी।

मामले के जानकार एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'छोटी-छोटी किस्तों में पैसे मिलने से कंपनियों के पास नकदी की उपलब्धता होगी और डेवलपर की कार्यशील पूंजी की जरूरत भी कम होगी।' कंपनी द्वारा बैंक गारंटी देने के नियमों में भी ढील दी जा सकती है। मौजूदा समय में पूरी परियोजना के लिए सरकार द्वारा जारी राशि के एवज में डेवलपरों को बैंक गारंटी देनी पड़ती है। लेकिन नए प्रस्ताव के तहत निर्माण कंपनियों को हर साल उस साल सरकार से मिलने वाली राशि के अनुपात में बैंक गारंटी देनी होगी। बैंक गारंटी जमा कराने के बाद ही सरकार से भुगतान मिलेगा। इससे समय पर काम पूरा करने में मदद मिलेगी और सालाना गारंटी से कर्जदारों का जोखिम भी कम होगा।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के एक अधिकारी ने कहा, 'कंपनियों/डेवलपरों की ओर से सालाना बैंक गारंटी मिलने से ऋणदाताओं को परियोजना के पूरा होने का भरोसा बढ़ेगा।'

हाइब्रिड एन्युटी मॉडल को आकर्षक बनाने के इस प्रस्ताव को अंतर मंत्रालय समिति से मंजूरी मिल चुकी हैै। इस समिति में व्यय विभाग, आर्थिक सेवाओं के विभाग, वित्तीय सेवाओं के विभाग, नीति आयोग, विधि एवं न्याय मंत्रालय तथा सड़क परिवहन एपं राजमार्ग मंत्रालय शामिल हैं। नए नियमों को केंद्रीय राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जल्द अधिसूचित किया जाएगा। इस बारे में राष्ट्रीय राजमार्ग बिल्डर्स फेडरेशन जैसे विभिन्न उद्योग निकायों द्वारा प्रस्ताव आया था। इसके अलावा भी सरकार की कुछ अन्य नियमों में बदलाव करने की योजना है। सड़क परियोजना से जुड़े जोखिम को कम करने और कोविड संकट के बीच बैंकों को थोड़ी सुविधा प्रदान करने के मकसद से सरकार ऐसे अनुबंधों के लिए सीमांत लागत आधारित उधारी दर पर एक पूल बनाकर कर्ज उपलब्ध कराने का भी विचार कर रही है। इसमें पांच से छह ऋणदाता शामिल होंगे जिससे उनका जोखिम बंट जाएगा।

बनाओ चलाओ और हस्तांतरित करो मॉडल वाली परियोजनाओं के लिए जिस तरह के नियम बदले गए हैं उसी तरह से हाइब्रिड एन्युटी के नियम भी बदलकर उसे आकर्षक बनाया जाएगा।

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