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ब्याज माफी : बैंक करने लगे प्रावधान

सोमेश झा और हंसिनी कार्तिक / नई दिल्ली/मुंबई October 18, 2020

केंद्र सरकार 2 नवंबर से पहले चक्रवृद्घि ब्याज माफी का लाभ छोटे कर्जदारों को देने के लिए तैयार है। बैंकों ने भी दूसरी तिमाही के लिए अपने बही खाता में लोन बुक के अपने आकलन के आधार पर अतिरिक्त प्रावधान करने शुरू कर दिए हैं जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने ऋणों को गैर-निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) के तौर पर वर्गीकृत करने का आदेश दिया है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने पहचान जाहिर नहीं करने के अनुरोध के साथ कहा, 'हम यह सुनिश्चित करने के लिए अपना पूरा प्रयास कर रहे हैं कि सर्वोच्च न्यायालय की समयसीमा से पहले ही कर्जदारों को चक्रवृद्घि ब्याज का लाभ प्रदान कर दें।'

सरकारी और निजी दोनों क्षेत्र के ऋणदाताओं को 2 नवंबर से पहले 2 करोड़ रुपये तक के ऋण वाले सभी कर्जदारों को चक्रवृद्घि ब्याज की राशि लौटाने और उसके बाद सरकार के पास दावा दाखिल करने के लिए कहा जाएगा। हालांकि, सरकार एक योजना तैयार कर सकती है जिसमें विभिन्न प्रकार के ऋणों पर चक्रवृद्घि ब्याज को माफ करने के उद्देश्य से ऋणदाताओं के लिए तौर तरीके के बारे में बताया जा सकता है। यह सभी कर्जदारों पर लागू होगा चाहे कर्जदार ने ऋणस्थगन को अपनाया हो या नहीं लेकिन बैंकों की ओर से ऋण माफी की गणना ऋण के प्रकार के मुताबिक अलग अलग हो सकती है।

मोटे तौर पर केंद्र सरकार पर इसका बोझ करीब 6,500 करोड़ रुपये का पड़ेगा। मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बाद सरकार संसद के शीत शत्र में संसद से इसके लिए मंजूरी लेगी ताकि चक्रवृद्घि ब्याज की माफी के लिए उचित अनुदान लिया जा सके। इसके बाद वह बैंकों को उनके दावों के आधार पर रकम भेजना शुरू कर सकती है।

सर्वोच्च न्यायालय भारतीय रिजर्व बैंक के छह महीने के ऋणस्थगन के दौरान क ब्याज की माफी के लिए दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। रिजर्व बैंक ने मार्च में इसकी घोषणा की थी। अदालत ने सरकार को 2 नवंबर तक चक्रवृद्घि ब्याज ऋण माफी के मामले में हुई प्रगति को बताने का निर्देश दिया है।  

इसके अलावा, 3 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने बैंकों से कहा था कि वह ऐसे ऋण जो 31 अगस्त तक मानक या दबावग्रस्त थे को अगले आदेश तक एनपीए के तौर पर वर्गीकृत नहीं करे। बैंकों ने जुलाई-सितंबर की अवधि के लिए अपनी खाता बही को अंतिम रूप देने शुरू कर दिया है और संभावित एनपीए के लिए अतिरिक्त प्रावधान किए हैं। इन्हें बैंकों का त्वरित या कोविड-संबंधी प्रावधान कहा जा रहा है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकों के दूसरी तिमाही के परिणामों से उनकी संपत्ति की गुणवत्ता या लाभ को लेकर सही तस्वीर सामने नहीं आएगी।     

फेडरल बैंक ने शुक्रवार को दूसरी तिमाही का नतीजा घोषित किया था जिसमें कहा गया है कि सर्वोच्च अदालत के आदेश के कारण उसकी दबावग्रस्त संपत्ति सर्वकालिक न्यून स्तर पर है। उसने केवल 3 करोड़ रुपये के चूक की बात कही है जबकि पिछली तिमाही में यह 184 करोड़ रुपये रहा था। हालांकि, बैंक के प्रबंधन अनुमानों के मुताबिक इस तिमाही में वास्तविक चूक 237 करोड़ रुपये रहेगी। यथोचित उपाय के तौर पर बैंक ने 402 करोड़ रुपये का मानक संपत्ति प्रावधान के तौर पर अतिरिक्त प्रावधान किया है।

इसी तरह से एचडीएफसी बैंक ने 2,371 करोड़ रुपये का आकस्मिक प्रावधान किया है जबकि एनपीए के लिए 1,130 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। बैंक ने अपने लोन बुक का 1.08 फीसदी सकल एनपीए बताया है। जबकि सर्वोच्च न्यायालय का आदेश नहीं होता तो यह 1.37 फीसदी होता।
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