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5 साल के बॉन्ड प्रतिफल ने लगाई छलांग

अनूप रॉय / मुंबई October 16, 2020

राज्योंं को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से कम राजस्व प्राप्ति की भरपाई करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 1.1 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी की घोषणा के बाद आज 5 साल के बॉन्डों पर प्रतिफल बढ़ गया। हालांकि 10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड में स्थिरता बनी रही।

इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने राज्य बॉन्डों की द्वितीयक बाजार से 10,000 करोड़ रुपये की खरीद की घोषणा की है। ऐसा पहली बार हुआ है और अगले सप्ताह गुरुवार से ऐसा किया जाएगा। राज्य विकास ऋण (एसडीएल) के खुले बाजार के परिचालन (ओएमओ) की घोषणा मौद्रिक नीति में की गई थी, जिससे राज्य बॉन्डों का प्रतिफल नीचे लाया जा सके, जिससे राज्य करीब करीब केंद्र की लागत पर उधारी ले सकें।

इस तरह के पहले एसडीएल ओएमओ के तहत भारतीय रिजर्व बैंक आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, झारखंड, कर्नाचक, केरल, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बॉन्ड खरीदेगा। अन्य राज्यों को बाद के ओएमओ में जगह मिल सकती है। रिजर्व बैंक ने कोई नियत राशि तय नहीं की है कि कि राज्यों के कर्ज का कितना खुले बाजार में परिचालन करेगा, लेकिन केंद्रीय बैंक जरूरत के मुताबिक राज्यों की उधारी लागत कम करने की कवायद करेगा।

बहरहाल राज्यों द्वारा अतिरिक्त उधारी की जरूरत अब उल्लेखनीय रूप से कम हो गई है क्योंकि अब उनकी तरफ से केंद्र सरकार उधारी ले रही है। इससे राज्यों को सस्ती दरों पर कर्ज लेने में मदद मिलेगी और उन्हें बाजार से उधारी लेने पर जितना भुगतान करना पड़ता है, उससे कम में कर्ज मिल सकेगा।

अतिरिक्त उधारी को लेकर बॉन्ड डीलर बहुत ज्यादा व्यग्र नजर नहीं आ रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि 5 और 3 साल के बॉन्ड पर शुरुआती प्रतिक्रिया विपरीत हो सकती है, क्योंकि 9 अक्टूबर की पॉलिसी के बाद इसमेें भी उल्लेखनीय गिरावट आई थी।

10 साल के बॉन्ड पर प्रतिफल 5.934 प्रतिशत पर बंद हुआ, जबकि पहले की बंदी 5.898 प्रतिशत थी। वहींं 5 साल का बॉन्ड 5.267 प्रतिशत पर बंद हुआ तो पहले 5.161 प्रतिशत पर बंदहुआ था। तीन साल के बॉन्ड का प्रतिफल 4.742 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि यह गुरुवार को 4.718 प्रतिशत पर बंद हुआ था।

फिलिप कैपिटल में फिक्स्ड इनकम कंसल्टेंड जयदीप सेन ने कहा, 'बढ़ी हुई उधारी, जहां बाजार पर दबाव  डालेगी, एक हिसाब से सकारात्मक है। इससे केंद्र-राज्य के बीच जीएसटी की कमी को लेकर चल रहा विवाद कम से कम कुछ समय के लिए खत्म होगा। इससे राज्यों की बढ़ी हुई उधारी से बचा जा सकेगा।'

बॉन्ड डीलरों व अर्थशास्त्रियों का कहना है कि जीएसटी उपकर में आई कमी की भरपाई के लिए सरकार धन जुटा रही है, न कि अपने अन्य खर्च के लिए, ऐसे में घाटा अभी यथावत रहेगा।

नोमुरा ने कहा, 'कुल मिलाकर जहां बॉन्डों की आपूर्ति मांग संतुलन (राज्यों व केंद्र के) में कोई बदलाव नहीं होगा, हम इसे निकट के हिसाब से नकारात्मक मान रहे हैं। बहरहाल जब सरकारों की वित्तीय चुनौतियां  (राजकोषीय घाटा बढऩे से) बनी हुई हैं, अब वे संभवत: वित्तीय अंतर को पाटने के लिए बाजार उधारी पर निर्भर नहीं होंगे।'

बंधन बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री और शोध प्रमुख सिद्धार्थ सान्याल ने कहा, 'शुक्रवार को बाजार की प्रतिक्रिया से इतर यह माना जा सकता है कि ताजा घोषणाओं से अनिश्चितता कम करने और आने वाले सप्ताहों में बाजार अवधारणा बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।'

सरकार की घोषणा के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने पुनरीक्षित निर्गम कैलेंडर पेश किया है, जिसमें उसने कहा है कि तीन साल और पांच साल की प्रत्येक प्रतिभूति में में 55,000 रुपये जुटाए जाएंगे।

इसके साथ ही सरकार शेष वित्त वर्ष में 4.88 लाख करोड़ रुपये उधारी लेगी। 30 सितंबर को रिजर्व बैंक ने कहा था कि सरकार ने वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में 4.34 लाख करोड़ रुपये उधारी लेने की योजना बनाई थी। इसमें से 28,000 करोड़ रुपये पहले ही लिए जा चुके हैं और 28,000 करोड़ रुपये की एक और नीलामी  होगी। पुनरीक्षित कैलेंडर के मुताबिक नीलामी अगले सप्ताह से शुरू होगी। 9 अक्टूबर की मौद्रिक नीति से बॉन्ड बाजार को राहत मिली है।

Keyword: बॉन्ड प्रतिफल, जीएसटी, राजस्व, बेंचमार्क, एसडीएल, ओएमओ, मौद्रिक नीति, रिजर्व बैंक, कर्ज,
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