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दूसरी तिमाही में पूंजीगत व्यय में आई कमी

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली October 15, 2020

कोरोना महामारी और अर्थव्यवस्था में नरमी के कारण सरकारी खजाने पर खासा दबाव बना हुआ है। यही वजह है कि चालू वित्त वर्ष की दूूसरी तिमाही में सरकार का पूंजीगत व्यय घटकर 39 फीसदी रहा। विश्लेषकों ने संशय जताया है कि सरकार चालू वित्त वर्ष के लिए बजट में तय पूंजीगत व्यय का लक्ष्य हासिल कर पाएगी। हालांकि वित्त मंत्री ने हाल ही में 25,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त पूंजीगत व्यय की घोषणा की है।

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर) में पूूंजीगत व्यय में 27 फीसदी की कमी आई है। इसका कारण श्रमिकों की अनुपलब्धता और आधार प्रभाव के साथ ही सरकार के व्यय प्रबंधन उपाय जैसे कारक हो सकते हैं। सितंबर के पूंजीगत व्यय के आधिकारिक आंकड़े अभी जारी नहीं किए गए हैं लेकिन एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि सरकार ने सितंबर तक बजट अनुमान का 40 फीसदी खर्च किया है। पूर्वगामी गणना से संकेत मिलता है कि सितंबर में पूंजीगत व्यय 41 फीसदी तक घटा है। अगस्त में इसमें 21 फीसदी और जुलाई में 47 फीसदी की गिरावट आई थी।

पूंजीगत व्यय संपत्ति निर्माण जैसे कि बुनियादी ढांचे और आर्थिक वृद्घि एवं विकास में योगदान देने वाले क्षेत्रों में किया जाता है। दूसरी ओर राजस्व व्यय में नियत बाध्यता या परिचालन व्यय जैसे कि वेतन और पेंशन मद में खर्च आदि शामिल होता है। इस साल अप्रैल से अगस्त तक राजस्व व्यय में 7 फीसदी का इजाफा हुआ है और इस दौरान यह बजट लक्ष्य में 42.3 फीसदी पर पहुंच गया है।

इक्रा की प्रधान अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि श्रमिकों की किल्लत, व्यय प्रबंधन उपायों से संबंधित बंदिशेें आदि के कारण पूंजीगत व्यय में कमी आई है। पिछले साल चुनावी वर्ष होने की वजह से दूसरी तिमाही में पूंजीगत व्यय में तेजी आई थी, जिसके कारण दूसरी तिमाही में आधार प्रभाव अधिक है। पिछले साल की पहली तिमाही में बामुश्किल कोई पूंजीगत व्यय हुआ था, इसलिए इस साल समान तिमाही में पूंजीगतत व्यय में 40 फीसदी की वृद्घि देखी गई।

वित्त मंत्रालय ने बीते सोमवार को सड़क, रक्षा, बुनियादी ढांचे, जनापूर्ति, शहरी विकास और पूंजीगत वस्तुओं के घरेलू उत्पादन के लिए 25,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त व्यय की घोषणा की है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इस साल 4.13 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय के बजट अनुमान को हासिल करना भी कठिन होगा। नायर ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में नई घोषणा के बावजूद पूंजीगत व्यय के बजट अनुमान में से करीब 20,000 करोड़ रुपये बचे रह सकते हैं। एसबीआई समूह के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने कहा कि वित्त वर्ष 2021 में पूंजीगत व्यय का परिदृश्य ऋणात्मक दिख रहा है। उन्होंने कहा कि पूंजीगत व्यय में कितनी कमी आएगी, यह फिलहाल अनुमान लगाना कठिन होगा क्योंकि यह कई कारकों पर निर्भर करता है।

Keyword: पूंजीगत व्यय, अर्थव्यवस्था, सरकारी खजाना, बजट, श्रमिक, बुनियादी ढांचा, सड़क, रक्षा,
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