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वेदांत डीलिस्टिंग पर नियामक की सख्ती

श्रीमी चौधरी और समी मोडक / नई दिल्ली/मुंबई October 13, 2020

वेदांत की सूचीबद्घता समाप्त करने की कोशिश बाजार नियामक सेबी की जांच के दायरे में आ गई है। काउंटर ऑफर के प्रबंधन द्वारा बयानों के बीच शुक्रवार को इस शेयर में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

कंपनी द्वारा घोषणा की गई कि लंदन स्थित प्रवर्तक वेदांत रिसोर्सेज द्वारा डीलिस्टिंग की कोशिश असफल साबित होती दिख रही है। इस घोषणा के बाद सोमवार को वेदांत के शेयर में 21 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वेदांत के लिए रिवर्स बुक बिल्डिंग (आरबीबी) की प्रक्रिया शुक्रवार को पूरी हो गई। शेयर बाजार के घंटों के दौरान स्टॉक एक्सचेंज के डेटा से पता चला कि आरबीबी ने 1.37 अरब बोलियां आकर्षित कीं, जो डीलिस्टिंग को सफल बनाने के लिए जरूरी मात्रा के मुकाबले 20 लाख ज्यादा थीं। इस वजह से इस शेयर को दिन के कारोबार में अच्छी तेजी दर्ज करने में मदद मिली। इसके बीच, कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने टीवी चैनलों को दिए एक साक्षात्कार में काउंटर ऑफर की संभावना के बारे में बातचीत की थी।
ऊंचे स्तरों पर, शेयर को बिकवाली दबाव से जूझना पड़ा। बाद में यह सुधरा और 12 करोड़ अपुष्टï बोलियां ठुकरा दी गईं।

वेदांत डीलिस्टिंग के लिए प्राप्त कुल बोलियां 1.25 अरब थीं, जो प्रवर्तकों को 90 प्रतिशत शेयरधारिता के आंकड़े पर पहुंचने के लिए जरूरी 1.34 अरब से करीब 90 लाख कम थीं। सेबी ने अनिवार्य बनाया है कि सभी बोलियां बोली प्रक्रिया की अवधि की आखिरी तारीख से पहले शेयरधारकों द्वारा पुष्टï होनी चाहिए। अन्यथा कीमत तलाश को लेकर अनिश्चितता पैदा होगी, जैसा कि वेदांत के मामले में हुआ।

वोटिंग एवं गवर्नेंस एडवायजरी फर्म एसईएस के संस्थापक जे एन गुप्ता ने कहा कि सेबी को इस मुद्दे पर गंभीरता दिखानी चाहिए, जिससे कि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचा जा सके। क्या ये बोलियां वास्तविक रूप से प्रभावी थीं और शेयरों द्वारा समर्थित थीं, या ये इस झूठी धारणा को बढ़ावा देने वाली थीं कि यदि इन बोलियों को शामिल किया जाए तो 90 प्रतिशत का स्तर हासिल हो सकता है? दरअसल, सेबी को आंकड़े पर ध्यान देना चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि किसने ये बोलियां लगाईं, और क्यों इनकी पुष्टि नहीं की गई थी?

सूत्रों का कहना है कि नियामक उस कीमत की भी जांच कर सकता है जिस पर म्युचुअल फंडों ने अपने शेयर दिए। एक अधिकारी ने कहा, 'सेबी उस आधार की मांग कर सकता है जिस पर एमएफ ने अपने शेयर 150 और 160 रुपये की कीमत के बीच सौंपे थे। वह म्युचुअल फंडों से अपने निवेश निर्णयों की जानकारी देने को भी कह सकता है।'

वेदांत में सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी शेयरधारक जीवन बीमा निगम (एलआईसी) द्वारा अपने शेयर 320 रुपये के भाव पर दिए जाने की बात कही। इसकी भी कुछ वजह हैं कि कई निवेशकों ने सोचा कि 320 रुपये उचित कीमत थी, जबकि कुछ निवेशक इसकी आधी कीमत पर ही अपने शेयर देने को इच्छुक थे।

Keyword: vedanta, delisting, SEBI, Share Market, RRB, Stock Exchange,
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