बिजनेस स्टैंडर्ड - रजनीश के योनो का लक्ष्य अत्यधिक नहीं
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रजनीश के योनो का लक्ष्य अत्यधिक नहीं

हंसिनी कार्तिक / मुंबई October 04, 2020

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कुछ सप्ताह पहले कहा था कि बैंक के योनो ऐप की वैल्यू 40 अरब डॉलर होनी चाहिए और उसके परिणामस्वरूप प्रस्ताव रखा कि इसे एसबीआई काड्र्स ऐंड पेमेंट सर्विसेज जैसे अलग सहायक इकाई की तरह एक अलग इकाई में तब्दील किया जाना चाहिए। तब उनकी इस रणनीति की कुशलता को लेकर सवाल खड़े हुए थे। इसका जवाब यह समझने से जुड़ा हुआ है कि किस तरह से बैंकिंग परिदृश्य वैश्विक रूप से बदला है और भारत किस तरह से प्रगति कर रहा है। आईसीबीसी, चाइना कंस्ट्रक्शन बैंक, एचएसबीसी, और जेपीमॉर्गन चेज ने एक दशक पहले अमेरिका में बाजार पूंजीकरण के सदर्भ में दबदबा बनाए रखा था। अब वीजा, मास्टरकार्ड, और पेपल ने अपनी राह मजबूत बनाई है जिससे संकेत मिलता है कि पारंपरिक उधारी व्यवस्था बैंकों के लिए व्यावसायिक महत्व और बाजार रैंकिंग की गारंटी नहीं हो सकती।

एसबीआई के योनो, आईसीआईसीआई बैंक के फिनो पेमेंट्स, एचडीएफसी बैंक के पेजैप, और ऐक्सिस बैंक के फ्रीचार्ज ऐसे नाम हैं जो इस बात का संकेत देते हैं कि किस तरह से भारतीय बैंकों ने इस बदलाव को अच्छी तरह से समझ लिया है। ब्लूम वेंचर्स की एक रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि भारतीय बैंकों ने प्रौद्योगिकी, खासकर आंतरिक प्रणालियों के डिजिटलीकरण के लिए सालाना 11 अरब डॉलर खर्च किए हैं।

भारत में, फिनटेक क्षेत्र पर गैर-बैंकों या पेमेंट बैंकों का दबदबा है और यूपीआई तथा भारतपे मात्रा और वैल्यू के संदर्भ में बी2सी (बिजनेस-टु-कस्टमर) और बी2बी (बिजनेस-टु-बिजनेस) सेगमेंटों में लोकप्रियता बढ़ा रहे हैं। यह दो प्रमुख नियामकीय बाधाओं  (स्वीकार की जाने वाली जमाओं की मात्रा और ऋण, जो बढ़ाए जा सकते हैं) के बावजूद है। फिर भी, विश्लेषकों का कहना है कि योनो के लिए एसबीआई चेयरमैन का लक्ष्य अत्यधिक नहीं माना जा सकता है। फिनटेक कन्वरजेंस काउंसिल के चेयरमैन नवीन सूर्य का कहना है, 'बैंङ्क्षकंग से जुड़े एक-चौथाई ग्राहक आधार को कवर करते हुए एसबीआई ने स्पष्ट जनसांख्यिकीय और भौगोलिक दायरे का लाभ हासिल किया है।' योनो को मुख्यधारा के बैंक से अलग करने की कोशिश से इस ऐप को  उत्पादों का दायरा बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, 'नई पहल से योनो अपनी पैतृक की लाइसेसिंग सीमाओं और निर्णय लेने के अधिकार से अलग हो जाएगा।'

उदाहरण के लिए, बैंक रियायती उत्पादों या ज्यादा पेमेंट डिस्काउंट की पेशकश नहीं कर सकते, जबकि गैर-बैंकिंग कंपनियां इस तरह की रणनीति का लाभ उठाती हैं। यह ऐसा महत्वपूर्ण पहलू है जिससे न सिर्फ उन्हें ग्राहक को जोड़े रखने बल्कि यूजर क्लिक को प्रोत्साहित करने में भी मदद मिलती है। यदि इस ऐप को एसबीआई से अलग किया जाता है तो योनो को भी ये लाभ मिल सकते हैं। लेकिन क्या इससे दूसरों को भी इस रणनीति पर चलने की प्रेरणा मिलेगी? ईवाई में पार्टनर एवं फाइनैंशियल सर्विसेज के नैशनल लीडर अबिजर दीवानजी कहते हैं कि ज्यादा नहीं। वह कहते हैं, 'सिर्फ कुछ ने ही डिजिटल बैंकिंग क्षमताएं विकसित की हैं जिनमें के्रडिट-रिस्क ऐसेसमेंट और कीमत निर्धारण उचित हो सकते हैं।' एसबीआई के अलावा, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, और बजाज फाइनैंस ने ऋणदाताओं में डिजिटल सेगमेंट को बढ़ावा दिया है। बोफा सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि लघु एवं मझोले उद्यम (एसएमई) उधारी क्षेत्र में, बैंक ऑफ बड़ौदा ने बड़ा निवेश किया है और अच्छी प्रगति कर रहा है।

बैंकों को अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से घरेलू तौर पर प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि इसके अलावा, बैंकों के लिए चुनौतियां प्रौद्योगिकी को लेकर कम और उनकी मानसिकता और जनसांख्यिकी को लेकर ज्यादा हैं। फिनटेक क्षेत्र के एक विश्लेषक ने कहा, 'निजी बैंक मुख्य तौर पर प्रमुख 10 प्रतिशत या संपन्न ग्राहकों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जिससे उनकी पहुंच सीमित हो सकती है। इसके अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों के पास प्रौद्योगिकी नहीं है, यदि है भी तो इसका दायरा बढ़ाया जाना बाकी है।' दीवानजी ने यह स्वीकार करते हुए कहा कि सिर्फ कुछ ही बैंकों के पास जरूरी नीतियां हैं जिससे उन्हें इस मोर्चे पर गैर-बैंकों से मुकाबला करने में समय लग सकता है। वह कहते हैं, 'बैंक तब अच्छा काम करते हैं जब सिर्फ भुततान ही नहीं बल्कि क्रेडिट क्षमता भी मजबूत हो।'

सेंटर फॉर फाइनैंस, टेक्नोलॉजी ऐंड एंटरप्रेन्योरशिप की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका में 50 फिनटेक स्टार्टअप में से 12 का मूल्यांकन 1-1 अरब डॉलर के आसपास है और दिवालिया दर 4 प्रतिशत पर सीमित है। भारत में, बाजार बेहद केंद्रित है, सिर्फ कुछ ही - पेटीएम, पाइन लैब्स, बिल डेस्क, और मोबीक्विक- 1 अरब डॉलर से ज्यादा के मूल्यांकन में सक्षम हैं। वहीं पेटीएम इनसे अलग है और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उसकी वैल्यू 16 अरब डॉलर के आसपास है। नियामकीय और अंडरराइटिंग जोखिम उनकी मुख्य चिंताएं हैं। बोफा सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि भुगतान बैंकों का मुनाफा किस तरह से पारंपरिक बैंकों के मुकाबले कम है, जबकि वे बड़े ग्राहक आधार की जरूरतें पूरी करते हैं और ब्याज भी ज्यादा वसूलते हैं। फिनटेक क्षेत्र में बैंकों और गैर-बैंकों की अपनी सीमाएं होने, और बदलाव के शुरुआती चरण में होने से अमेरिका की तरह बड़े बदलाव में समय लग सकता है। एसबीआई के शेयर का बाजार पूंजीकरण मौजूदा समय में 1.7 लाख करोड़ रुपये के आसपास है, जो उस मूल्यांकन के आधे से कुछ अधिक है जो कुमार ने योनो के लिए निर्धारित किया है।

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