बिजनेस स्टैंडर्ड - आरबीआई ने टाली एमपीसी की बैठक
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आरबीआई ने टाली एमपीसी की बैठक

अनूप राय / मुंबई September 28, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को अपने एक अप्रत्याशित बयान में कहा कि वह अपनी मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की 29, 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को होने वाली बैठकें स्थगित कर रहा है। आरबीआई ने कहा कि वह संशोधित तारीखों की अधिसूचना बाद में जारी करेगा।

आरबीआई ने अपने बयान में कहा, 'मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की 29, 30 सितंबर और 1 अक्टूबर 2020 को होने वाली बैठकों की तारीखों में बदलाव किया जा रहा है। एमपीसी की बैठक की तारीखों की घोषणा जल्द ही की जाएगी।'

हालांकि इस केंद्रीय बैंक ने बैठक स्थगित करने की कोई वजह नहीं बताई है, मगर सरकार अभी तक छह सदस्यीय एमपीसी के बाहरी सदस्यों के नामों की घोषणा नहीं कर पाई है। पिछले तीन बाहरी सदस्य-पम्मी दुआ, रवींद्र ढोलकिया और चेतन घाटे 22 सितंबर अपने पद से हट चुके हैं। यह साफ नहीं है कि क्या आर्थिक मामलों के सचिव तरुण बजाज की अगुआई वाली खोज समिति ने उम्मीदवार चिह्नित कर लिए हैं और उनके नामों की सरकार से सिफारिश की है, लेकिन अभी तक सरकार ने नामों की अधिसूचना जारी नहीं की है। इस खोज समिति में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास, आरबीआई के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल और नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार भी शामिल हैं। एक सूत्र ने कहा कि आरबीआई गवर्नर इस काम में पूरी तरह शामिल नहीं हैं, समिति जरूरत पडऩे पर उनके साथ विचार-विमर्श करती है।

इससे पहले सरकार ने संकेत दिया था कि इन नामों को मंजूरी 28 सितंबर तक दी जाएगी। हालांकि अगर सोमवार को नामों की घोषणा कर भी दी गई तो नए सदस्यों के लिए सीधे एमपीसी की बैठकों में शामिल होना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होगा।

इन नियमों से परिचित लोगों का कहना है कि नए सदस्यों को दस्तावेजों पर हस्ताक्षर समेत बहुत सी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। केंद्रीय बैंक को औपचारिकता के रूप में सदस्यों को बैठकों के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित करना होगा। उसके बाद ही सदस्यों को नीतिगत बैठकों में हिस्सा लेने की तैयारी करनी चाहिए। ये सभी चीजें नियुक्ति के अलगे ही दिन नहीं हो सकतीं, इसलिए बैठक टाल दी गई है।

हालांकि अर्थशास्त्रियों का कहना है कि स्थगन से बैठक के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। केंद्रीय बैंक के इस बार नीतिदर दरों को अपरिवर्तित रखने के आसार हैं क्योंकि महंगाई लक्षित दायरे के ऊपरी छोर छह फीसदी से अधिक बनी हुई है और दरों में पिछली कटौतियों का पूरा लाभ ग्राहकों तक नहीं पहुंचाया गया है।

दरअसल यह संभव है कि दरों में अगली कटौती बजट के आंकड़े देखने के बाद फरवरी की बैठकों में हो। पिछले साल बिज़नेस स्टैंडर्ड ने जिन 10 अर्थशास्त्रियों और बॉन्ड ट्रेडरों का पोल किया था, उन्होंने दरों को लेकर यथास्थिति रहने और एमपीसी के उदार रुख अपनाने का अनुमान जताया था। केंद्रीय बैंक ने अगस्त में एमपीसी की पिछली बैठक में नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखा था ताकि महंगाई नियंत्रित की जा सके। आरबीआई ने कहा था कि महामारी के बाद अर्थव्यवस्था अत्यधिक कमजोर है।

आरबीआई ने तरलता बढ़ाने के बहुत से कदम उठाए हैं, जिनके आगामी समय में जारी रहने की संभावना है। केंद्रीय बैंक ने 30 सितंबर को समाप्त होने वाली सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) 31 मार्च तक बढ़ा दी है। इसके तहत बैंक बॉन्ड गिरवी रखकर अपनी जमाओं के अतिरिक्त एक फीसदी का उपयोग कर सकते हैं। इससे बैंकों को 1.49 लाख करोड़ रुपये तक की राशि मिल सकती है।

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