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दिल्ली विधानसभा की सुनवाई में शामिल न होने का फेसबुक पर तत्काल असर नहीं

पीरजादा अबरार / बेंगलूरु September 18, 2020

दिल्ली विधानसभा की शांति एवं भाईचारा समिति की सुनवाई में फेसबुक के अधिकारियों के शामिल न होने का सोशल मीडिया दिग्गज पर कोई तात्कालिक असर पडऩे की संभावना नहीं है। समिति ने इस सप्ताह फेसबुक अधिकारियों को गंभीर आरोपों का जवाब देने के लिए तलब किया था, जो फरवरी में हुए दिल्ली दंगों से जुड़े थे। सोशल मीडिया फर्म पर आरोप लगा है कि उसने जानबूझकर घृणास्पद बातों को भारत में प्रसारित होने दिया और उस पर कोई कार्रवाई नहीं की।  फर्म ने समिति से कहा है कि वह पहले ही संसद की समिति के सामने पेश हो चुकी है और यह मसला केंद्र सरकार के अधीन है।

कानून के जानकारों का कहना है कि समिति के सामने उपस्थित न होने से फेसबुक पर कोई प्रत्यक्ष या तात्कालिक असर नहीं पड़ेगा। दिल्ली विधानसभा कड़े दिशानिर्देश जारी कर सकती है और मार्क जुकरबर्ग के नेतृत्व वाले फेसबुक के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है। लेकिन आखिरकार इस मसले पर केंद्र सरकार को कार्रवाई करनी है।

एक विशेषज्ञ ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, 'दिल्ली आम आदमी पार्टी के कुछ विधायकों ने मांग की है कि दिल्ली के दंगों में फेसबुक को पक्ष बनाया जाना चाहिए और एफआईआर दर्ज होना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो कंपनी के लिए आगे समस्या होगी, क्योंकि उसके ऊपर सत्तासीन दल का पक्ष लेने के आरोप हैं। इससे उसकी विश्वसनीयता पर असर पड़ेगा।'

दिल्ली विधासनभा की समिति की जांच में शामिल न होने के बारे में पूछे जाने पर फेसबुक ने कोई प्रतिक्रिया नहींं दी।

एक विशेषज्ञ का कहना है कि कानूनी हिसाब से देखें तो संसद की समिति के सामने पेश होने व विधानसभा की समिति के सामने पेश न होने का मतलब है कि फेसबुक ने राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग करने व स्थानीय स्तर पर अलग तरीके से निपटने का फैसला किया है।

टेक पॉलिसी थिंक टैंक काजिम रिजवी ने कहा, 'भारत में परिचालन करने वाले किसी भी मध्यस्थ के लिए पारदर्शिता एक बुनियाद है और अगर कोई नुकसानदेह या गैर कानूनी कंटेंट आता है तो वे अपना नियम लागू कर सकती हैं।'

Keyword: दिल्ली विधानसभा, फेसबुक, सोशल मीडिया, आरोप, दिशानिर्देश, मार्क जुकरबर्ग, आम आदमी पार्टी,
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