बिजनेस स्टैंडर्ड - जल्द भारत आ रहा रूस का टीका
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जल्द भारत आ रहा रूस का टीका

सोहिनी दास /  September 16, 2020

अगर भारतीय नियामक ने मंजूरी दी तो ह्यूमन एडिनोवायरस प्लेटफॉर्म पर आधारित रूस का टीका स्पूतनिक वी भारत में उपलब्ध होगा। एक सॉवरिन वेल्थ फंड रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) ने भारत में स्पूतनिक वी के क्लीनिकल परीक्षण और वितरण के लिए हैदराबाद की डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज (डीआरएल) के साथ एक करार किया है।

इसके अलावा न केवल भारत बल्कि विश्व के लिए इस टीके के उत्पादन की खातिर भारत की पांच बड़ी टीका विनिर्माता कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है। एडिनोवायरस डीएनए वायरस होते हैं, जो श्वास से संबंधित बीमारी पैदा करते हैं। डीआरएल ने आज घोषणा की कि उन्होंने आरडीआईएफ के साथ स्पूतनिक वी के क्लीनिकल परीक्षण और 10 करोड़ खुराक के वितरण के लिए गठजोड़ किया है। परीक्षणों की लागत दोनों साझेदार बराबर वहन करेंगे। इन खबरों से डीआरएल का शेयर बीएसई पर 4.2 फीसदी बढ़त के साथ 4,631 रुपये पर बंद हुआ।

इस टीके का भारत में परीक्षण एक ब्रिज परीक्षण होगा क्योंकि रूस में 40,000 स्वयंसेवकों पर तीसरे चरण का परीक्षण पहले ही चल रहा है। आरडीआईएफ के सीईओ किरिल दिमित्रिव ने एक टेलीविजन चैनल पर कहा कि तीसरे चरण के परीक्षणों के स्वयंसेवकों की संख्या 45,000 होगी और उनमें रूस के अलावा सऊदी अरब, यूएई, ब्राजील और भारत जैसे देशों के स्वयंसेवक शामिल होंगे।

आरडीआईएफ और डीआरएल ने आवश्यक ब्योरे देश के दवा नियामक को दिए हैं और यहां क्लीनिकल परीक्षण शुरू करने के लिए मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। डीआरएल ने कहा कि टीके की डिलिवरी 2020 के आखिर में शुरू होने की संभावना है। हालांकि यह परीक्षणों के सफलतापूर्वक पूरे होने और भारत में नियामकों के टीके का पंजीकरण करने पर निर्भर करेगा। हालांकि दिमित्रिव का अनुमान है कि टीका यहां नवंबर तक उपलब्ध हो जाएगा क्योंकि रूस से शुरुआती नतीजे अक्टूबर में आने के आसार हैं। हालांंकि डीआरएल ने टीका पेश करने के समय को लेकर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

डीआरएल ने कहा कि वह भारत में स्पूतनिक वी का उत्पादन नहीं करेगी। अभी उसके पास टीका विनिर्माण का कोई संयंत्र नहीं है। आरडीआईएफ डीआरएल को 10 करोड़ खुराक की आपूर्ति करेगी। हालांकि भविष्य में डीआरएल टीके के उत्पादन के बारे में भी विचार करने को तैयार है। फिलहाल यह गठजोड़ भारत और डीआरएल की अच्छी मौजूदगी वाले देशों में क्लीनिकल परीक्षण और वितरण के लिए है। भारत के अलावा अन्य देशों के लिए अलग करार किए जाएंगे। रूस ने स्पूतनिक वी का विनिर्माण बढ़ाने में मदद देने के लिए भारत से संपर्क किया था। उस समय रूस की सरकार ने भारत के टीका विनिर्माताओं से संपर्क कर यह पूछा था कि क्या वे रूस के टीके के उम्मीदवार के साथ गठजोड़ करना चाहते हैं।

उद्योग के सूत्रों ने बताया कि इस समय आरडीआईएफ इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड लिमिटेड, सीरम इंस्टीट््यूट ऑफ इंडिया कैडिला हेल्थकेयर आदि से बातचीत कर रहा है। भारत की एक टीका बनाने वाली कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हम स्पूतनिक वी को लेकर रूसी समकक्षों के साथ बातचीत कर रहे हैं। हालांकि अभी डेटा तैयार नहीं है। यही वजह है कि अभी हमने उनके साथ विनिर्माण के लिए साझेदारी करने या न करने का फैसला नहीं लिया है।' उन्होंने कहा कि रूस के के प्रतिनिधि बहुत सक्रिय हैं और यहां नियामक से नियमित रूप से मिल रहे हैं। दिमित्रिव ने कहा कि रूसी टीके के विनिर्माण के लिए भारत एक रणनीतिक साझेदार है क्योंकि भारत के पास बड़े पैमाने पर टीके के विनिर्माण की क्षमता है। वैश्विक टीका आपूर्ति में भारत की 60 फीसदी हिस्सेदारी है। गामालेया नैशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपीडीमिओलॉजी ऐंड माइक्रोबॉयोलॉजी ने स्पूतनिक वी टीका विकसित किया है। इसे 11 अगस्त को रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने पंजीकृत किया था। इस तरह यह ह्यूमन एडिनोवायरल वेक्टर्स प्लेटफॉर्म पर आधारित कोविड-19 का विश्व में पहला पंजीकृत टीका बना था। आरडीआईएफ ने मंजूरी मिलने से पहले ही भारत में टीके के विनिर्माण की योजना बनाना शुरू कर दिया है। हालांकि ऐसा लगता है कि टीका विनिर्मातओं को थोड़ा संशय है।

स्पूतनिक वी में उन वायरल वेक्टर्स या जेनेटिकली इंजीनियर्ड ऑर्गनिज्म का इस्तेमाल किया जाता है, जो एडिनोवायस को ले जाते हैं। यह एडिनोवायरस उस वाहन की तरह काम करता है, जो सार्स-सीओवी-2 वायरस से संबंधित जीन को डिलिवर करता है। अगर इस कैंडीडेट का टीका लगाया जाता है तो इससे रोग प्रतिरोधी क्षमता पैदा होती है।

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