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नए संसद भवन की दौड़ में टाटा आगे

अर्णव दत्ता और देव चटर्जी / नई दिल्ली/मुंबई September 16, 2020

संसद भवन की नई इमारत तैयार करने की केंद्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी परियोजना हासिल करने की दौड़ में टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड सबसे आगे है। परियोजना के लिए कंपनी ने सबसे कम बोली लगाई है। ऐसे में मुंबई मुख्यालय वाली इस कंपनी को अब नए संसद भवन के निर्माण के लिए अनुबंध मिलने की संभावना है।

सूत्रों के मुताबिक आज जब बोली खोली गईं तो पता चला कि टाटा ने 861.9 करोड़ रुपये की बोली लगाई है जो एलऐंडटी की 865 करोड़ रुपये की बोली से कम है। भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस से पहले 2022 की पहली छमाही तक नए संसद का निर्माण कार्य पूरा होना है। इस परियोजना में कई निर्माण कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई थी लेकिन केवल दो कंपनियों ने बोली लगाई। इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'चूंकि टाटा की बोली कम है इसलिए संभावना है कि परियोजना का अनुबंध उचित प्रक्रिया और मूल्यांकन के बाद उसे दिया जाए।'

हालांकि अधिकारियों ने कहा कि अंतिम रूप से परियोजना का अनुबंध देने में वक्त लगेगा। शुरुआती जांच के बाद बोली आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय के अधिकारियों और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की एक समिति के पास भेजी जाएगी। जिसके बाद बोली का मूल्यांकन, व्यय वित्त समिति और अन्य संबंधित सरकारी विभागों द्वारा किया जाएगा। शहरी विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि पूरी प्रक्रिया में करीब तीन हफ्ते का समय लग सकता है और उसके बाद ही आधिकारिक घोषणा हो सकती है।

 सिकंदराबाद (तेलंगाना) में साल 1979 में बनी कंपनी टाटा प्रोजेक्ट्स अब तक कई हाई-प्रोफाइल निर्माण योजनाओं शामिल रही है। 2017 में  टाटा प्रोजेक्ट्स ने नवी मुंबई और मुंबई के बीच पुल के हिस्से का निर्माण करने के लिए अनुबंध हासिल कर बुनियादी ढांचा क्षेत्र के दिग्गजों को हैरान कर दिया जिसे ट्रांस हार्बर परियोजना के रूप में जाना जाता है। एलऐंडटी को पुल के एक बड़े हिस्से का निर्माण करने का अनुबंध मिला जो अभी निर्माणाधीन है। टाटा प्रोजेक्ट्स ने 7.8 किलोमीटर पुल बनाने का ठेका 5,612 करोड़ रुपये में हासिल किया है।

टाटा प्रोजेक्ट्स के प्रवक्ता ने इस बारे में कोई जानकारी देने से मना कर दिया लेकिन सूत्रों ने कहा कि संसद भवन की नई इमारत तैयार करने की परियोजना हासिल करना, कंपनी की एक बड़ी बुनियादी ढांचा कंपनी के तौर पर उभरने की योजना में एक बड़ा कदम है। संसद भवन की नई इमारत केंद्र सरकार की 3 किलोमीटर लंबी केंद्रीय विस्ता क्षेत्र के पुनर्विकास की योजना पर आधारित है। सीपीडब्ल्यूडी ने वास्तुकार कंपनी भी तय कर दी है। इस परियोजना के तहत एक केंद्रीय सचिवालय परिसर, केंद्र सरकार के सभी विभाग और मंत्रालय तैयार किए जाएगा और साथ ही पुरानी संसद का पुनर्विकास होगा या फिर एक नई इमारत ही तैयार की जाएगी।

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