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चौथी तिमाही में बैंकों को धन

सोमेश झा / नई दिल्ली September 15, 2020

केंद्र सरकार चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में सरकारी बैंकों में पुनर्पूंजीकरण बॉन्डों के जरिये 20,000 करोड़ रुपये डाल सकती है।

सरकार ने आज सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के मद में अतिरिक्त 20,000 करोड़ रुपये के खर्च के लिए संसद से मंजूरी मांगी। बैंकों में पैसा सरकारी प्रतिभूतियों के निर्गम के जरिये डाली जाएगी।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने चालू वित्त वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की पूंजी आवश्यकता के लिए इतनी रकम पर्याप्त होगी जबकि इसको लेकर विशेषज्ञों की राय अलग है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने जुलाई में कहा था कि बैंकों के लिए पुनर्पूंजीकरण योजना जरूरी हो गई है और वित्तीय व्यवस्था में स्थिति को सुदृढ़ बनाने के लिए ऋणदाताओं को अग्रिम रूप से पैसे जुटाने के लिए कहा था। रिजर्व बैंक के मुताबिक बेसलाइन संदर्भ के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल गैर निष्पादित संपत्ति अनुपात मार्च 2021 तक बढ़कर 15.2 फीसदी हो जाएगी जो एक वर्ष पहले 11.3 फीसदी थी। लेकिन रिजर्व बैंक का आकलन जुलाई की उसकी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में किया गया था जिसे सितंबर में नियामक की ओर से घोषित ऋण पुनर्गठन योजना में शामिल नहीं किया गया था।        

इक्रा लिमिटेड में फाइनेंशियल सेक्टर रेटिंग के सेक्टर हेड अनिल गुप्ता ने कहा, 'पुनर्पूंजीकरण की घोषणा अनुमान के न्यूनतम स्तर पर है जिसके मद्देनजर हमारा मानना है कि सार्वजनिक क्षेत्रों के लिए पूंजी का सहयोग तब तक नियामक के स्तर से ऊपर निम्न बना रहेगा जब तक कि ये बैंक बाजार से कुछ पूंजी जुटाने में सक्षम नहीं हो जाते हैं या रिजर्व बैंक पूंजी की उच्च स्तर की जरूरत को टाल नहीं देता है जिसमें 30 सितंबर, 2020 से वृद्धि करने की जानी है।'  

इक्रा ने अगस्त में अनुमान लगाया था कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वित्त वर्ष 2021 के लिए 20,000 करोड़ रुपये से 55,000 करोड़ रुपये पूंजी की आवश्यकता होगी क्योंकि दबावग्रस्त ऋण के पुनर्गठन से नए एनपीए में कमी आएगी। उसने रिजर्व बैंक की ओर से ऋण पुनर्गठन की घोषणा से पहले 46,000 करोड़ रुपये से लेकर 82,600 करोड़ रुपये तक की पूंजीगत आवश्यकता का ऊंचा अनुमान लगाया था। इक्रा का अनुमान है कि सकल चूक दर (अच्छे ऋण का खराब ऋण में परिवर्तित होना) 3-4 फीसदी के करीब रहेगी जिसके बारे में उसने पहले 5-5.5 फीसदी का अनुमान जताया था।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने पहचान जाहिर नहीं करने के अनुरोध के साथ कहा 'हम सरकारी बैंकों में पहले पूंजी नहीं डालेंगे। बैंकों के लिए पूंजी की आवश्यकता बदल रही है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि यदि साल के अंत में आकलन के बाद बैंकों में पूंजी डालने की जरूरत पड़ती है तो हमारे पास इसके लिए संसद की मंजूरी हो।'    

अधिकारी ने कहा कि प्रावधान कवरेज अनुपात अर्थात दबावग्रस्त ऋण के लिए किया जाने वाला प्रावधान बैंकों के लिए 80 फीसदी हो गया।  

अधिकारी ने कहा कि पुनर्पूंजीकरण के जरिये डाली गई रकम का इस्तेमाल बैंकों के कोविड-19 संबंधी प्रावधान की जरूरत को पूरा करने में किया जाएगा और तीसरी तिमाही में बैंकों के खाते पर ऋण स्थगन के असर का पता चलने पर ही उचित आकलन किया जा सकेगा।

 अधिकारी ने कहा 'अच्छी बात यह है कि रिजर्व बैंक की ओर से ऋण पुनर्गठन की घोषणा होने के बाद चालू वित्त वर्ष में बैंकों के लिए पुनर्पूंजीकरण की रकम बड़ी नहीं है।'

Keyword: चौथी तिमाही, बैंक, केंद्र सरकार, पुनर्पूंजीकरण, बॉन्ड, संसद, सरकारी प्रतिभूति, निर्गम,
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