बिजनेस स्टैंडर्ड - एमपीसी के बाहरी सदस्यों को मिलेगा विस्तार!
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, November 27, 2020 03:40 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम मुद्रा खबर

एमपीसी के बाहरी सदस्यों को मिलेगा विस्तार!

श्रीमी चौधरी और अनूप रॉय / नई दिल्ली/मुंबई September 14, 2020

सरकार कोविड-19 महामारी को देखते हुए मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के तीन बाहरी सदस्यों का कार्यकाल कुछ अवधि के लिए बढ़ा सकती है। इसके साथ ही समिति के लिए नए बाहरी सदस्यों की तलाश भी जारी है। सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी है। समिति के तीन बाहरी सदस्यों के तौर पर भारतीय सांख्यिकी संस्थान के प्रोफेसर चेतन घाटे, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स की निदेशक पमी दुआ और भारतीय प्रबंध संस्थान, अहमदाबाद के एच ढोलकिया की नियुक्ति 22 सितंबर 2017 को की गई थी। इन्हें चार वर्षों की अवधि या अगले आदेश तक नियुक्त किया गया था।

एमपीसी के सदस्यों में आरबीआई के तीन लोग भी शामिल हैं। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास एमपीसी की अध्यक्षता करते हैं, जबकि डिप्टी गवर्नर माइकल पात्र और कार्यकारी निदेशक मृदुल के सग्गर दो अन्य सदस्य हैं। इस पूरी प्रकिया की जानकारी रखने वाले एक सरकारी सूत्र ने कहा,'हम बैंकिंग नियामक की सलाह के साथ विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। कुछ सदस्यों का मानना है कि बाहरी सदस्यों का कार्यकाल थोड़ी अवधि के लिए बढ़ाया जाना चाहिए।'

हालांकि सूत्र ने यह नहीं बताया कि कार्यकाल कितनी अवधि के लिए बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस फिलहाल कार्यकाल बढ़ाने को एक विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है और इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

समिति के नए बाहरी सदस्यों की तलाश अभी जारी है। सूत्र ने कहा कि अगर हमें अनुभवी एवं योग्य उम्मीदवार मिल जाते हैं तो निश्चित तौर पर हम उन्हें समिति का हिस्सा बनाएंगे। एमपीसी में निर्णय बहुमत से लिया जाता है और हरेक सदस्य के पास एक वोट देने का अधिकार है। हालांकि मत बराबर होने पर आरबीआई गवर्नर अंतिम निर्णय पर पहुंचने के लिए एक अतिरिक्त वोट डाल सकते हैं।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पिछले चार वर्षों के दौरान एमपीसी ने अच्छा काम किया था और महंगाई 2 से 6 प्रतिशत के बीच रखने में सफल रही, लेकिन कोविड-19 महामारी के बाद अर्थव्यवस्था को मदद देने के लिए में थोड़ी ढील देनी पड़ी। इसका नतीजा यह हुआ कि महंगाई में धीरे-धीरे तेजी आने लगी।  हालांकि महंगाई में तेजी एक वजह आपूर्ति तंत्र में आई बाधा भी है। खासकर खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति में आई बाधा से महंगाई दर ऊपर भागी है और नीतिगत दरों में बदलाव कर खाद्य महंगाई पर काबू नहीं पाया जा सकता है।

नीतिगत नीति में दरों में बदलाव मुख्य रूप से मांग को ध्यान में रखकर किया जाता है। फरवरी 2019 के बाद एमपीसी ने विभिन्न चरणों के जरिये नीतिगत दरों में 250 आधार अंक की कमी की है। हालांकि समिति ने दरों में कटौती की और गुंजाइश नहीं देखते हुए 4 से 6 अगस्त को नीतिगत समीक्षा में दरें अस्थिर रखी गईं।

एमपीसी के बाहरी सदस्यों के कार्यकाल विस्तार पर भेजे गए ई-मेल का वित्त मंत्रालय एवं आरबीआई का कोई जवाब नहीं आया।  

Keyword: एमपीसी, बाहरी सदस्य, मौद्रिक नीति समिति, गवर्नर, शक्तिकांत दास, माइकल पात्र, मृदुल के सग्गर,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या अर्थव्यवस्था में सुधार की रफ्तार उम्मीद से तेज है?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.