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बाजार मांग के हिसाब से फसल की योजना

सुशील मिश्र / मुंबई September 12, 2020

राज्य में किसानों को उनकी उपज का सही भाव मिले, इसके लिए महाराष्ट्र सरकार ने जिसकी होगी बिक्री, उसी की होगी फसल (विकेल तेज पिकेल) अभियान की शुरुआत की है। बाजार के रुझान को देखते हुए किसानों को फसल बोने की सलाह दी जाएगी। कम लागत में अधिक उत्पादन के लिए किसानों को संगठित करके गुट खेती को प्रोत्साहित करने की नीति तैयार की गई है।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने कई योजनाओं की शुरुआत की है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कृषि और किसानों को मजबूत करने बात को दोहराते हुए कहा कि खेत में मेहनत करके जो फसल उगाई गई है, उस कृषि उपज को मूल्य दर भले ही न मिले, लेकिन इस उपज को दर (भाव) मिलना चाहिए। इसके लिए राज्य सरकार ने कदम उठाए है और बाजार के रुझान को पहचानकर मूल्य शृंखला निर्माण करते हुए कृषि उपज को निश्चित ही दर मिलने के लिए ‘जिसकी होगी बिक्री उसी की होगी फसल’ (विकेल तेच पिकेल) अभियान शुरू किया है। यह उपयोगी साबित होगा और इससे किसान चिंतामुक्त होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दिनों कोरोना के चलते सभी को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा है, लेकिन किसानों को यह सुविधा नहीं है। उन्हें खेतों में जाना ही पड़ता है। किसान काम करते है, मेहनत करते है, तभी विश्व को अनाज उपलब्ध होता है। खेतों में मेहनत करने के बाद फसल को अगर मिट्टी के मोल दाम मिले तो किसान अपना जीवनयापन कैसे करेगा। इसीलिए जिसकी होगी बिक्री, उसी की होगी फसल अभियान की शुरुआत की गई है। कृषि  विभाग की ओर से चलाए जा रहे इस अभियान को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने बालासाहेब ठाकरे कृषि व्यवसाय एवं ग्रामीण परिवर्तन प्रकल्प, अहिल्यादेवी होलकर नर्सरी योजना, ग्रामकृषि विकास समिति योजनाओं की शुरुआत की है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि किसानों के हित के लिए राज्य सरकार की ओर से समय-समय पर निर्णय लिए जा रहे है। किसानों को रात के समय फसलों को पानी देने के लिए न जाना पड़े, इसके लिए दिन में ही विद्युत उपलब्ध कराने को लेकर प्रयास जारी है। कृषि मंत्री दादाजी भूसे ने कहा कि कोरोना के संकट में महात्मा जोतिबा फुले किसान कर्जमुक्त योजना के अंतर्गत 30 लाख किसनों को कर्जमुक्त किया गया है। साथ ही 10 हजार करोड़ रुपये के कृषि उपज की खरीदी सरकार ने की है। किसान बंधुओं के लिए किसान सन्मान कक्ष की स्थापना भी राज्यभर में की गई। मूल्य शृंखला का निर्माण करते समय गांव स्तर पर ग्राम कृषि विकास समिति की स्थापना की गई है। इसके अलावा किसानों के खेत पर खाद एवं बीज उपलब्ध किया गया है। प्रयोगशील ऐसे 3,500 किसानों के रिसोर्स बैंक बनाए गए हैं।

जिन किसानों ने लघु यंत्र विकसित किए है, उनका प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा और यह रिसर्च यंत्र (अवजार) उत्पादन कंपनियों तक पहुंचाया जाएगा। किसानों ने जिन सब्जियों की फसल ली है, वह सीधे ग्राहकों को उपलब्ध कराने के लिए किसानों को आवश्यक जगह उपलब्ध कराई जाएगी। फल और सब्जियों के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रायोगिक रूप से इस योजना के अंतर्गत प्रथम चरण में 500 लाभार्थियों का चयन किया जाएगा। इसमें प्रयोगशील किसान, महिला बचत गट, किसान उत्पादक कंपनियां, किसान गट को प्राथमिकता दी जाएगी।

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