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जीएसटी पर केंद्र-राज्य के बीच उलझन से बॉन्ड बाजार में संशय

अनूप रॉय / मुंबई September 09, 2020

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में कमी के बीच बॉन्ड बाजार के भी कान खड़े हो गए हैं। बॉन्ड बाजार की नजरें अब इस बात पर टिक गईं हैं कि राज्यों को जीएसटी मुआवजे की भरपाई के लिए केंद्र क्या कदम उठाती है। वित्त मंत्रालय से मिल रहे शुरुआती संकेतों के अनुसार 97,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के बॉन्ड जारी नहीं किए जाएंगे और सरकार इसके लिए विशेष बॉन्ड का सहारा ले सकती हैं। राज्य सरकारें ये बॉन्ड जरूर जारी करेंगी, लेकिन इन पर केंद्र की गारंटी होगी।

व्यय सचिव टीवी सोमनाथ ने ब्लूमबर्ग क्विंट से बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार अपनी गारंटी देने के साथ ही सभी माध्यमों से यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेगी कि इन बॉन्ड पर प्रतिफल सरकारी प्रतिभूतियों के इर्द-गिर्द ही रहे। कुछ हद तक चिंताएं इसलिए जताई जा रही हैं कि ये एक तरह से नए बॉन्ड होंगे और बाजार को डर है कि एक बार जारी होने के बाद राज्य सरकारें बजट तैयार होने के बाद भी रकम जुटाने के लिए दोबारा भी इनका इस्तेमाल कर सकती हैं।

इस बारे में इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च में सहायक निदेशक सौम्यजित नियोगी ने कहा, 'यहां डर यह है कि राज्य सरकार घाटे की पूर्ति के लिए बॉन्ड जारी कर सकती हैं, जिससे बाजार में इनकी आपूर्ति स्वाभाविक ही बढ़ जाएगी। यह बात ज्यादा मायने नहीं रखेगी कि बॉन्ड जारीकर्ता कौन है और बॉन्ड किस प्रकार का है। चार बातें-अवधि, जारी करने का समय, एसएलआर स्थिति या केवल हेल्ड टू मैच्योरिटी (एचटीएम)- काफी अहम होंगी। दरअसल पूरा मामला बॉन्ड प्रतिफल से जुड़ा होगा और इस समय भरपूर मात्रा में नकदी होने के कारण बैंक जरूर खरीदारी के लिए आगे आएंगे। हालांकि कंपनियों की चाल पर कुछ प्रतिकूल असर पडऩे की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।' जहां तक उधारी की बात है कि तो यह बात पूरी तरह राज्य सरकारों पर निर्भर करेगी कि वेअपनी उधारी 97,000 करोड़ रुपये तक ही सीमित रखना चाहती हैं या नहीं। अगर राज्य अधिक उधारी लेने के लिए आगे आएंगे तो बॉन्ड बाजार के माथे पर शिकन आएगा।

सरकार ने राज्यों को उधारी लेने के दो विकल्प दिए हैं। पहले विकल्प के तहत वे कोविड-19 महामारी से हुए असर सहित जीएसटी की भरपाई के लिए बाजार से 2.35 लाख करोड़ रुपये तक उधार ले सकते हैं। दूसरे विकल्प के तहत वे केवल जीएसटी संग्रह में आई कमी की क्षति-पूर्ति के लिए 97,000 करोड़ रुपये तक उधार ले सकते हैं। अगर राज्य केवल 97,000 करोड़ रुपये उधार लेते हैं तो इसके लिए केवल विशेष योजना अमल में लाई जाएगी। कुछ राज्य पहले ही 97,000 करोड़ रुपये उधारी का विकल्प अस्वीकार कर चुके हैं, हालांकि औपचारिक तौर पर उन्होंने कुछ नहीं कहा है।

एक वरिष्ठ बॉन्ड कारोबारी ने बताया, 'अगर राज्य 97,000 करोड़ रुपये का विकल्प चुनते हैं तो बाजार को इससे खास परेशानी नहीं होगी। हां, अगर वे 2.35 लाख करोड़ रुपये उधारी लेने का निर्णय लेते हैं तो उधारी यहीं तक सीमित नहीं रहेगी। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक को कुछ बोझ का वहन करना पड़ सकता है।'

विशेषज्ञों के अनुसार सरकार जितना अनुमान लगा रही है अंतर उससे कहीं अधिक है। इसका सीधा मतलब है कि दोनों विकल्पों में राज्यों को बाजार से रकम जुटानी होगी। अगर राज्य 2.35 लाख करोड़ रुपये उधारी लेते हैं तो राजस्व में 1 लाख करोड़ रुपये की कमी रह सकती है।
Keyword: बॉन्ड बाजार, संग्रह, जीएसटी मुआवजा, भरपाई, वित्त मंत्रालय, गारंटी, प्रतिफल, सरकारी प्रतिभूति,
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