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वित्तीय संकट के बीच कारोबारी गंवा रहे जान

सचिन मामबटा / मुंबई September 09, 2020

कोविड महामारी के संकट के दौरान अंतरराष्ट्रीय परिचालन करने वाले अपेक्षाकृत एक छोटे कारोबारी को 20 से 30 लाख डॉलर (करीब 14 से 22 करोड़ रुपये) का नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने स्थानीय बैंकों और निजी स्तर पर भी काफी कर्ज लिया था। कारोबार में नुुकसान और भारी कर्ज से वह अवसाद ग्रस्त हो गए और आत्महत्या का ख्याल मन में आने लगा। इस विषम स्थिति में उनके दोस्त ने उनकी काफी मदद की। एक मनोचिकित्सक ने भी उन्हें शर्म छोड़कर वित्तीय मदद लेने की सलाह दी और आज उनका कारोबार सुधार की राह पर है।

लेकिन मानसिक स्वास्थ्य के बारे में समय पर सही सलाह नहीं लेने और जागरूकता के अभाव में बड़ी तादाद में कारोबारी अपनी जान गंवा रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, 2019 में कुल 9,025 ऐसे मामले देखे गए। इससे पिछले साल की तुलना में इस तरह के मामले 13.3 फीसदी बढ़े हैं। 2018 में इस तरह के मामले में 2.7 फीसदी की वृद्घि देखी गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर मदद और जागरूकता लाकर इनकी जान बचाई जा सकती है।

मुंबई के मनोचिकित्सक हरीश शेट्टी ने कहा कि विफलता के साथ अक्सर एक तरह का कलंक जुड़ा होता है जो स्थिति को गंभीर बनाता है। इसकी वजह से उद्यमी वित्तरीय संकट से उबरने के लिए मदद नहीं मांग पाते हैं। कोविड-19 महामारी ने कई मध्यवर्गीय परिवारों और कारोबारियों के समक्ष नकदी का संकट खड़ा कर दिया है। मकान जैसी संपत्तियों को बेचकर पैसा जुटाना भी काफी कठिन हो गया है। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा संकट छोटे कारोबार पर है। उन्होंने कहा, 'विफलता के कंलक की परवाह न कर, समस्या को परिवार के साथ साझा करने और दूसरों से वित्तीय मदद मांगने से संकट से निकला जा सकता है और लोगों की स्थिति में भी तेजी से सुधार हो सकता है।'

मनोचिकित्सक और लेखिका अंजलि छाबडिय़ा ने कहा कि लोग अपने कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उन्हें शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। फिल्म उद्योग से भी जुड़े कई लोग हैं जिनकी आमदनी ठप हो गई है और वे अपने कर्ज की किस्त तक नहीं चुका पा रहे हैं।

उन्होंने कहा, 'मैंने विभिन्न उद्योगों के कई लोगों को देखा हैं जो प्रभावित हुए हैं।' उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में गिरावट आने से स्थिति और खराब हो सकती है और समय पर हस्ताक्षेप नहीं किया गया तो ऐसे मामले और बढ़ सकते हैं। छाबडिय़ा ने कहा कि मदद मांगकर और खर्चों को कम कर लोग इस संकट से उबर सकते हैं।

2019 के आंकड़ों में आत्महत्या करने वालों में 3,362 वेंडर, 2906 व्यापारी और 2,795 लोग अन्य कारोबार से जुड़े थे। आंकड़ों से पता चलता है कि आत्महत्या करने वाले कारोबारियों में 93.6 फीसदी से ज्यादा पुरुष थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन इंटरनैशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रीवेेंशन द्वारा आयोजित 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या निरोधक दिवस की सह प्रायोजक है।

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