बिजनेस स्टैंडर्ड - पुनर्गठन के दायरे में तमाम फर्म
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पुनर्गठन के दायरे में तमाम फर्म

कृष्ण कांत / मुंबई 09 08, 2020

बैंकिंग, बीमा और एनबीएफसी को छोड़कर करीब एक हजार सूचीबद्ध कंपनियां कोविड-19 संबंधी दबाव वाले समाधान ढांचे के तहत कॉरपोरेट कर्ज पुनर्गठन की पात्र हैं। कुल 1,027 कंपनियों का संयुक्त सकल कर्ज इस साल मार्च के आखिर में करीब 30.1 लाख करोड़ रुपये था। इन कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे बताते हैं कि इनमें से करीब 40 फीसदी कंपनियों को मदद की दरकार हो सकती है क्योंकि अप्रैल-जून 2020 की तिमाही में उनके राजस्व व मुनाफे में भारी कमी आई है, जिसने कर्ज का भुगतान मुश्किल बना दिया।

पात्र कंपनियों में से 406 का ब्याज कवरेज अनुपात जून तिमाही में 1.5 गुना रहा। परिचालन लाभ या एबिटा और ब्याज की देनदारी का अनुपात अपने लाभ व आंतरिक नकदी के जरिए कर्ज के भुगतान की उनकी क्षमता बताती है। अगर ब्याज कवरेज अनुपात 1.5 गुने से कम हो तो यह फर्म की कर्ज चुकाने की क्षमता पर संदेह के बारे में बताता है।

इन कंपनियों पर मार्च के आखिर में कुल उधारी 10.2 लाख करोड़ रुपये थी और सकल कर्ज व इक्विटी अनुपात 1.4 गुना था, जो सभी पात्र कंपनियों के औसत लिवरेज अनुपात 1 गुने के मुकाबले करीब 40 फीसदी ज्यादा है।

ऐसे में मोटे तौर पर करीब एक तिहाई कॉरपोरेट उधारी कोविड-19 के कारण हुए लॉकडाउन से पैदा हुए वित्तीय दबाव के दायरे में आती है। यह विश्लेषण 2,273 कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर आधारित है, जिनमें बैंक, बीमा व गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां शामिल नहीं हैं। साथ ही जिनके वित्त वर्ष 2020 व जून 2020 की तिमाही के आंकड़े उपलब्ध हैं।

सिस्टमैटिक्स इंस्टिट््यूशनल इक्विटी के शोध प्रमुख धनंजय सिन्हा ने कहा, कामत कमेटी ने जो वित्तीय मानक सामने रखे हैं वह काफी उदार है और कोविड-19 के कारण वित्तीय मुश्किल में फंसी ज्यादातर कंपनियां इसकी पात्र होंगी और लेनदार उनका कर्ज पुनर्गठन कर देंगे। उनके मुताबिक, यह समाधान ढांचा बैंकिंग क्षेत्र के लिए काफी राहत भरा है, जो महामारी के कारण अपनी परिसंपत्ति गुणवत्ता को लेकर काफी अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।

समाधान ढांचे के लिए क्षेत्रों व उद्योगों का चयन बताता है कि कर्ज पुनर्गठन की वित्तीय लागत की गाज मोटे तौर पर सरकारी बैंकों पर गिरेगी, जो ज्यादा पूंजी वाले क्षेत्रों मसलन बुनियादी ढांचा, स्टील, बिजली, कपड़ा, सीमेंट व खनन क्षेत्रों की प्रमुख लेनदार हैं।

कामत कमेटी पर्सनल लोन, होम लोन पर मौन है, जहां मुख्य तौर पर निजी क्षेत्र के बैंकों व एनबीएफसी का काम ज्यादा है।

मंगलवार को निफ्टी बैंकिंग इंडेक्स 0.87 फीसदी नीचे था जबकि निफ्टी में 0.33 फीसदी की गिरावट आई। बैंंकिंग इंडेक्स में गिरावट सरकारी बैंकों की अगुआई में हुई और कॉरपोरेट लेनदार मसलन आईडीफसी फस्र्ट बैंक 5.2 फीसदी टूटा जबकि आरबीएल बैंक में 4.4 फीसदी की गिरावट आई। उधर, ऐक्सिस बैंक 3.6 फीसदी टूट गया। देश की सबसे बड़ी रिटेल लेनदार एचडीएफसी बैंक 0.14 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ।

करीब 50 सूचीबद्ध कंपनियां पात्रता मानकों को पूरा नहींं करती क्योंकि उनका अहम वित्तीय अनुपात मसलन लिवरेज अनुपात इस साल मार्च के आखिर में कामत कमेटी की सिफारिशों की सीमा से ज्यादा था। इन कंपनियों की संयुक्त उधारी मार्च के आखिर में करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये थी।

Keyword: बैंकिंग, बीमा, एनबीएफसी, सूचीबद्ध कंपनी, समाधान, कर्ज पुनर्गठन, राजस्व, परिचालन लाभ, एबिटा,
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