बिजनेस स्टैंडर्ड - मीडिया उद्योग में कुछ कंपनियों का ही एकाधिपत्य
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, November 29, 2020 12:19 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

मीडिया उद्योग में कुछ कंपनियों का ही एकाधिपत्य

मीडिया मंत्र
वनिता कोहली-खांडेकर /  September 08, 2020

मेरा 11 साल का बेटा इस बात से परेशान था कि ऐपल के प्लेटफॉर्म से फोर्टनाइट को हटा दिया गया है। उसने गेमरों के सामूहिक गुस्से का हिस्सा बनते हुए 'फ्रीफोर्टनाइट' विज्ञापन को लाइक भी कर दिया। यह घटना ऐपल के 36 साल पहले आए यादगार विज्ञापन '1984' की एक बढिय़ा पैरोडी बन गई है जब ऐपल ने आईबीएम और मैकिन्टोश जैसी दिग्गज टेक कंपनियों को चुनौती दी थी। विडंबना है कि वही ऐपल वर्ष 2020 में 260 अरब डॉलर की सर्वाधिकारवादी कंपनी बन चुकी है जबकि फोर्टनाइट की प्रस्तोता कंपनी एपिक गेम्स का आकार महज 4.2 अरब डॉलर है। यह विडंबना फोर्टनाइट गेम के युवा उपयोगकर्ताओं के गुस्से में कहीं खो गई है। लेकिन 1980 के दशक में जिस तरह बड़ी कंपनियों के खिलाफ ऐपल की चुनौती ने सारे प्रतिमान बदल दिए थे उसी तरह ऐपल और फोर्टनाइट के बीच छिड़ी यह जंग भी एक निर्धारक क्षण है। यह मामला टेक-मीडिया प्लेटफॉर्म और कंटेंट परोसने वाली फर्मों के बीच शक्ति समीकरणों को निर्धारित करने वाला मामला बन सकता है। वर्ष 2017 में पेश फोर्टनाइट गेम अपनी खासियत के चलते जल्द ही लोकप्रिय हो गया और दुनिया भर में करीब 35 करोड़ लोग यह गेम खेलने लगे। इसकी वजह से 1.8 अरब डॉलर का राजस्व भी पैदा हुआ। लेकिन यहीं से समस्या भी शुरू हुई। फोर्टनाइट एक नि:शुल्क गेम है। यह विभिन्न ऐप स्टोर पर गेम के भीतर स्किन एवं अन्य स्पॉट की बिक्री कर राजस्व जुटाता है। दूसरे प्लेटफॉर्म के उलट ऐपल ऐप स्टोर के जरिये होने वाले किसी भी लेनदेन पर 30 फीसदी कमीशन लेता है और बमुश्किल ही किसी को रियायत देता है। एमेजॉन उसे 15 फीसदी कमीशन ही देती है।

एपिक गेम्स ने ऐपल प्लेटफॉर्म पर 13.3 करोड़ ग्राहकों की मौजूदगी के आधार पर बेहतर सौदे की मांग रखी। आखिर फोर्टनाइट गेमरों से मिले 1.2 अरब डॉलर में से 36 करोड़ डॉलर ऐपल की जेब में गए थे। लेकिन फोर्टनाइट की मांग से बेअसर ऐपल अपने रुख पर अड़ी रही। फिर फोर्टनाइट ने अपनी वेबसाइट पर सीधे आकर गेम खरीदने पर 20 फीसदी कम भुगतान की पेशकश रख दी। कुछ समय बाद ही ऐपल ने फोर्टनाइट के साथ एपिक गेम्स के दूसरे गेम भी अपने ऐप स्टोर से हटा दिए।  

गूगल ने भी यही काम किया। लेकिन ऐपल के उलट गूगल मुक्त ऑपरेटिंग सिस्टम ऐंड्रॉयड पर चलता है जिससे उपयोगकर्ता किसी भी जगह से इस गेम को खरीद या अपग्रेड कर सकते हैं। वहीं आईफोन एवं आईपैड पर अब फोर्टनाइट को डाउनलोड नहीं किया जा सकेगा।

इस पूरे प्रकरण में एपिक गेम्स ने ऐपल एवं गूगल दोनों के खिलाफ कानूनी वाद दायर करते हुए कहा है कि यह वित्तीय क्षति का मामला न होकर निष्पक्ष कारोबार का मामला है। अपने विशाल आकार एवं ताकत के बूते ऐपल और गूगल आसानी से फोर्टनाइट का सफाया कर सकती हैं। फोर्टनाइट के पक्ष में लामबंदी करने के लिए एपिक गेम्स ने जिस फुर्ती से विज्ञापन जारी करने के अलावा कानूनी वाद दायर किया, उससे पता चलता है कि उसे इस अंजाम का अहसास भी है।

ऐपल के ऐप स्टोर के खिलाफ जारी तमाम विश्वास-रोधी प्रक्रियाओं के बीच एक बेहतर सौदे की मांग बुलंद होती है। ताकतवर बनाम कमजोर की इस लड़ाई में व्यापक जनसंपर्क का अवयव भी शामिल है। यह संघर्ष प्रसारकों और डीटीएच एवं केबल ऑपरेटरों, संगीत कंपनियों और ऐपल के आईट्यून एवं स्पॉटिफाई, समाचार प्रकाशकों और गूगल एवं फेसबुक के मुकाबले जैसा ही है। एक प्रतिस्पद्र्धी बाजार में कुछ वाणिज्यिक जंग होना सामान्य बात है। लेकिन यह बाजार न तो प्रतिस्पद्र्धी और न ही सामान्य है।

दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन वितरण प्लेटफॉर्म का स्वामित्व कुछ मु_ी भर कंपनियों के हाथों में होने से उनकी पहुंच एवं राजस्व दोनों ही विशालकाय है। मसलन ऐपल (1.5 अरब उपभोक्ता, 260 अरब डॉलर राजस्व), गूगल (1.7 अरब उपभोक्ता, 161 अरब डॉलर राजस्व), फेसबुक (2.6 अरब उपभोक्ता, 71 अरब डॉलर राजस्व) और एमेजॉन (280 अरब डॉलर राजस्व)। गूगल और फेसबुक के पास अमेरिका में कुल डिजिटल विज्ञापन का 56 फीसदी से भी अधिक हिस्सा है। जल्द ही एमेजॉन भी इस कतार में शामिल हो जाएगी। भुगतान के मोर्चे पर ऐपल एवं एमेजॉन के पास विशाल हार्डवेयर, ऐप एवं ई-कॉमर्स कारोबार है।

किसी भी समाचारपत्र, संगीत कंपनी, प्रसारक, फिल्म स्टूडियो या ऑनलाइन गेम को अपने ग्राहकों तक पहुंचने के लिए इन चारों दिग्गज कंपनियों की शर्तों पर चलना होता है। अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो छोटी फर्म एक झटके में ही वैश्विक बाजार से बाहर हो जाती है। इन सभी दिग्गजों ने समय-समय पर अपने संभावित प्रतिस्पॢद्धयों को खरीद लिया है। उनका विस्तार जारी रहने से उनके नेटवर्क का प्रभाव उनके असली आकार से कहीं अधिक हो चुका है। उनके लिए 'एकाधिपत्य' शब्द का इस्तेमाल न करना मुश्किल है। अमेरिका और यूरोप के नियामकों की सोच भी यही है। स्टैंडर्ड ऑयल या एटीऐंडटी जैसी बड़ी टेक कंपनियों को कई हिस्सों में बांटने की चर्चाएं हैं। एटीऐंडटी दूरसंचार क्षेत्र में इतनी बड़ी एवं दबदबे वाली कंपनी हो चुकी है कि नियामकों ने इसे आठ फर्मों में बांट दिया।

ऐपल-फोर्टनाइट विवाद का समय खासा अहम है। फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया में नियामक प्लेटफॉर्म कंपनियों पर प्रकाशकों को भुगतान करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। ऐपल के खिलाफ यूरोपीय आयोग में पिछले साल शिकायत करने वाली स्पॉटिफाई भी ताजा विवाद में फोर्टनाइट के समर्थन में खड़ी हुई है। समाचार प्रकाशकों की एक संस्था ने ऐपल के मुख्य कार्याधिकारी टिम कुक से यह पूछा है कि एमेजॉन जैसे सौदे के लिए क्या करना होगा।

बाकी देशों में भी हालात कमोबेश ऐसे ही हैं। भारत में गत वर्ष 22,100 करोड़ रुपये के डिजिटल विज्ञापन बाजार का करीब 70 फीसदी गूगल और फेसबुक का रहा। डिजिटल कारोबार की वृद्धि इन दो कंपनियों के आधिपत्य में तब्दील हो रही है। हमें इस जंग पर करीबी नजर रखनी चाहिए।

Keyword: मीडिया उद्योग, एकाधिपत्य, ऐपल, फोर्टनाइट, गेमर, विज्ञापन, टेक-मीडिया, ऐपल ऐप स्टोर,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या जीडीपी में सुधार के बाद आगे तेज होगी रफ्तार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.