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नए नियमों से पारंपरिक ब्रोकरों पर पड़ेगी गहरी चोट

ऐश्ली कुटिन्हो और समी मोडक / मुंबई September 07, 2020

 

बाजार नियामक सेबी के मार्जिन के नए नियमों से डिस्काउंट ब्रोकरों या संस्थागत क्लाइंटों को सेवा देने वाले ब्रोकरों के मुकाबले पारंपरिक ब्रोकरों को बड़ा झटका लग सकता है। बाजार के प्रतिभागियों ने कहा कि मार्जिन के नए नियम में गिरवी वाला नियम ऑनलाइन ब्रोकरों के लिए ज्यादा उपयुक्त है, जहां क्लाइंट मोटे तौर पर इंटरनेट के जानकार होते हैं। ऑफलाइन ब्रोकरों के मामले में क्लाइंट या तो उसकी शाखा पहुंचते हैं या फोन के जरिए ऑर्डर देते हैं। गिरवी रखने के लिए हालांकि डिपॉजिटरी की वेबसाइट पर प्रमाणित करने की दरकार होती है।

उद्योग के एक प्रतिभागी ने कहा, अब क्लाइंट फोन पर ओटीपी ब्रोकर को देंगे, तभी मार्जिन प्लेज हो पाएगा। ऐसे में आदर्श तरीका यह है कि क्लाइंट शाखा पहुंचें और उनके टर्मिनल पर ट्रेड करें। उनका अनुमान है कि अभी भी 30 से 40 फीसदी खुदरा ट्रेड फोन के जरिए होता है।

उद्योग के प्रतिभागियों ने कहा कि ब्रोकरों ने पोजीशन की बिकवाली कर नकदी बाजार के लिए नया मार्जिन सिस्टम पर काम शुरू कर दिया है। हालांकि एफऐंडओ में काफी खड़े सौदे हैं, जहां मार्जिन पावर ऑफ अटॉर्नी के इस्तेमाल के जरिए कोलेटरल खाते से दिए गए हैं।

एक ब्रोकर ने कहा, एफऐंडओ में अगर क्लाइंट अपने खाते में प्लेज यानी गिरवी की पुष्टि नहीं करता है तो ब्रोकर कोलेटरल खाते से क्लाइंट के खाते में स्टॉक को कैसे हस्तांतरित करेंगे? सेबी को अनुबंध की एक्सपायरी तक वक्त देना चाहिए था क्योंकि पोजीशन एक्सपायर हो जाता और स्वत: उसकी बिकवाली हो जाती। बाजार के प्रतिभागी ब्रोकरों को पीओए डिजिटल तरीके से हासिल रने की अनुमति देने की खातिर लॉबीइंग कर रहे हैं।

प्रभुदास लीलाधर के सीईओ (खुदरा) संदीप रायचूरा ने कहा, छोटे या क्षेत्रीय उच्च जोखिम वाला ब्रोकिंग प्रभावित होगा। हालांकि इसका यह भी मतलब है कि हमारे जैसे राष्ट्रीय स्तर के ब्रोकरों के लिए मौके हैं, जो तकनीक व सलाह पर निवेश कर रहे हैं। उद्योग के लिए लंबी अवधि के लिहाज से यह बड़ा कदम है।

उद्योग के प्रतिभागियों ने कहा कि नए नियमों ने मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए अव्यवस्था पैदा कर दी है, जिनमें एक्सचेंज, डिपॉजिटरीज और क्लियरिंग कॉरपोरेशन शामिल हैं। शुक्रवार को सीडीएअशएल, आईसीसीएल, एनएसई क्लियरिंग और एनएसडीएल ने संयुक्त बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि 1 सितंबर से काफी ज्यादा मार्जिन प्लेज सफलता से निष्पादित कर दिया गया है और मार्जिन की नई प्रक्रिया आगामी हफ्तों में स्थिर होने का अनुमान है। उधर, एक्सचेंजों ने 15 सितंबर तक क्लाइंट मार्जिन में कमी, मार्जिन संग्रह न होने और नकदी व डेरिवेटिव रिपोर्टिंग पर जुर्माना लगाना टाल दिया है।

Keyword: ब्रोकर, सेबी, डिस्काउंट ब्रोकर, संस्थागत क्लाइंट, मार्जिन नियम, गिरवी, ऑनलाइन ब्रोकर, इंटरनेट,
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