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अगर चाहिए सस्ता उधार तो क्रेडिट स्कोर में करें सुधार

संजय कुमार सिंह /  September 07, 2020

बैंक ऑफ बड़ौदा ने आवास ऋण (होम लोन) ग्राहकों के लिए क्रेडिट रिस्क यानी कर्ज से जुड़े जोखिम का प्रीमियम पिछले दिनों बढ़ा दिया। रिस्क प्रीमियम बाहरी बेंचमार्क दर में जोड़कर ही होम लोन की ब्याज दर निकाली जाती है। बैंक ने क्रेडिट स्कोर का अपना पैमाना भी पहले के मुकाबले सख्त कर दिया। देश के सबसे बड़े ऋणदाता बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने मई में ही अपना रिस्क प्रीमियम बढ़ा दिया था। जब बैंक रीपो दर में कमी करते हैं तो ग्राहकों को होम लोन पर कम ब्याज दर यानी कम मासिक किस्त का फायदा मिलता है। मगर रिस्क प्रीमियम बढ़ाते ही ब्याज दर कुछ बढ़ जाती है और फायदा भी पहले से कम हो जाता है।

बैंक ऑफ बड़ौदा अपने होम लोन ग्राहकों को अलग-अलग ब्याज दर पर कर्ज देता है और सबसे कम ब्याज दर 6.75 फीसदी थी मगर रिस्क प्रीमियम में इजाफे के बाद यह बढ़कर 7 फीसदी हो गई। जिन लोगों का क्रेडिट स्कोर 726 या उससे अधिक होता था, उन्हें सबसे कम दर पर कर्ज मिल जाता था। मगर अब इस दर के लिए कम से कम 775 का क्रेडिट स्कोर जरूरी हो गया है। बैंक ने पहले क्रेडिट स्कोर की चार अलग-अलग श्रेणियां बना रखी थीं और उसी के मुताबिक ब्याज दर भी तय की जाती थीं। अब उसने पांच श्रेणियां कर दी हैं। सबसे कम और सबसे ज्यादा क्रेडिट स्कोर श्रेणियों वाले ग्राहकों को मिलने वाले कर्ज की ब्याज दर में पहले 100 आधार अंक का फर्क था मगर अब न्यूनतम क्रेडिट स्कोर वालों को सबसे अच्छे क्रेडिट स्कोर वालों के मुकाबले 135 आधार अंक अधिक दर पर ब्याज चुकाना पड़ रहा है।

बैंकों को लग रहा है कि उनके कर्ज खातों पर दबाव अभी बढ़ेगा। इसीलिए वे जोखिम प्रीमियम में इजाफा कर रहे हैं ताकि जोखिम बढ़े तो उसे झेलने का पूरा इंतजाम उनके पास रहे। बैंक बाजार के मुख्य कार्य अधिकारी आदिल शेट्टी कहते हैं, 'इस समय कर्ज लेने वालों की आय और उनकी वित्तीय स्थिरता पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। यह देखकर बैंक भी जोखिम से बचने की ज्यादा से ज्यादा कोशिश कर रहे हैं। यही वजह है कि अपना ऋण जोखिम कम करने के लिए वे क्रेडिट स्कोर का पैमाना ऊंचा कर रहे हैं।' शेट्टी मानते हैं कि बाकी बैंक भी अपनी उधारी दरों पर नजर डालते समय बैंक ऑफ बड़ौदा जैसा ही कदम उठा सकते हैं। इस समय ज्यादा जोखिम प्रीमियम नए कर्जदारों से ही वसूला जा रहा है मगर शेट्टी को लगता है कि यदि किसी ग्राहक के क्रेडिट स्कोर में अच्छा-खासा बदलाव आ जाता है तो उसके कर्ज से जुड़ा क्रेडिट रिस्क प्रीमियम भी बदला जा सकता है।

बैंक ऑफ बड़ौदा ने क्रेडिट स्कोर के अपने पैमाने में जो सख्ती कर दी है, उसकी वजह मुंबई में रहने वाले क्रेडिट परामर्श विशेषज्ञ और लेखक अरुण राममूर्ति आसान शब्दों में समझाते हैं। वह कहते हैं, 'बैंक की मंशा छांट-छांटकर बेहतर कर्जदारों को चुनने की है।' बैंक ऑफ बड़ौदा में नए कर्ज के लिए या पुराने कर्ज को रीफाइनैंस कराने के लिए जिन लोगों ने अर्जी डाली थीं, उनमें से कई के कर्ज ब्याज दरों में बढ़ोतरी से पहले मंजूर ही नहीं हो पाए। डिजिटल होम लोन ब्रोकर स्विचमी में संस्थापक और मुख्य कार्य अधिकारी आदित्य मिश्रा के पास उनके लिए सलाह है। मिश्रा समझाते हैं, 'जिन लोगों ने अभी तक प्रोसेसिंग शुल्क नहीं चुकाया है या जिन्हें अभी तक कर्ज की मंजूरी का पत्र नहीं मिला है, उन्हें दूसरे बैंकों के पास भी कोशिश करनी चाहिए क्योंकि वहां उन्हें 7 फीसदी से कुछ कम दर पर कर्ज मिल सकता है।' मिश्रा यह भी कहते हैं कि इस काम में देर नहीं करनी चाहिए। हालांकि सारी बातें एक तरफ रख दें तो भी होम लोन लेने के लिए यह बहुत बढिय़ा वक्त है। राममूर्ति कहते हैं, 'डेढ़ साल पहले ब्याज दरें 8 फीसदी के आसपास थीं, जो अब घटकर 7 फीसदी के करीब रह गई हैं। ऐसी सूरत में कोई बैंक जोखिम के आधार पर ब्याज दरें बढ़ा देता है तो भी आपको पहले के मुकाबले बेहतर दर पर कर्ज मिल जाएगा।' उन्हें यह भी लगता है कि कर्ज देने वाली कंपनियों और बैंकों के पास नकदी लबालब भरी है, कर्ज बांटने के मामले में मुकाबला भी बहुत अधिक है और सब रिटेल कर्ज बढ़ाने में लगे हैं, इसलिए जोखिम प्रीमियम में बहुत अधिक इजाफा करने का खतरा शायद ही कोई ले।

इन सब बातों के बीच कायदे की और सौ फीसदी सच्ची बात यही है कि अच्छा क्रेडिट स्कोर किसी भी वक्त बहुत काम आता है मगर जोखिम भरे इस दौर में अच्छे स्कोर की अहमियत और भी ज्यादा बढ़ गई है। इसीलिए पूरी कोशिश कीजिए कि आपका क्रेडिट स्कोर बरकरार रहे या बढ़ता चला जाए।

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