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वैश्विक विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में आईआईएससी अव्वल

विनय उमरजी /  September 02, 2020

भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बेंगलूरु ने टाइम्स हायर एजुकेशन (टीएचई) की वैश्विक विश्वविद्यालय रैंकिंग 2021 में देश के शीर्ष संस्थान के रूप में अपनी जगह बनाए रखी है। इसमें रिकॉर्ड स्तर पर भारत के 63 संस्थानों ने रैंकिंग में अपनी जगह बनाई है। पिछले साल से लेकर 14 अतिरिक्त विश्वविद्यालयों ने इसमें क्वालीफाई किया है जो किसी अन्य देश या क्षेत्र के मुकाबले अधिक है।

विश्व स्तर पर 301-350 के बैंड में रहने वाले आईआईएससी के बाद भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रोपड़ और आईआईटी इंदौर हैं, जिन्होंने विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग में भारतीय संस्थानों के लिहाज से अपना दूसरा और तीसरा स्थान बरकरार रखा है।

इस साल ही इस सूची में भारत के सबसे ज्यादा 14 नए संस्थान जुड़े हैं जो 2021 की रैकिंग में किसी अन्य देश या क्षेत्र के संस्थानों के इस सूची में शामिल होने की तादाद के मुकाबले अधिक है। भारतीय विश्वविद्यालयों की कुल संख्या 63 तक है इस तरह वैश्विक विश्वविद्यालय रैंकिंग में भारत के संस्थानों की तादाद रिकॉर्ड स्तर पर अधिक है।

साल की रैंकिंग में पहली बार शामिल होने वाले भारतीय संस्थानों में से इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी दिल्ली, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी और महात्मा गांधी विश्वविद्यालय को सबसे ऊंची रैंक (601-800 बैंड) मिली है।

टीएचई में चीफ नॉलेज ऑफिसर फिल बैटी के अनुसार यह रैंकिंग केवल दुनिया के सर्वश्रेष्ठ अनुसंधान संस्थानों के लिए है और इसमें भारत की रिकॉर्ड भागीदारी ने वैश्विक स्तर के श्रेष्ठ संस्थानों के साथ प्रतिस्पर्धा करने की देश की इच्छाशक्ति को जाहिर किया है। वह कहते हैं, 'रैंकिंग में शामिल होने से विश्वविद्यालय दुनिया के बाकी हिस्सों में नजर आने लगते हैं और उन्हें उच्च शिक्षा में वैश्विक मानकों के हिसाब से अपनी प्रगति की निगरानी करने की प्रेरणा भी मिलती है।'

भारत के संस्थानों का अंतरराष्ट्रीय जगत से वास्ता थोड़ा कम रहा जिसकी वजह से वैश्विक स्तर के विद्वानों, विचारकों या छात्रों का आकर्षण अन्य देशों की तरह भारत के लिए नहीं बढ़ा। हालांकि, बैटी ने कहा कि नई शिक्षा नीति की हालिया घोषणा भारत के लिए सही दिशा में बढ़ाया एक बड़ा कदम हो सकता है।

बैटी का कहना है, 'भारतीय उच्च शिक्षा में प्रस्तावित व्यापक बदलावों मसलन विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर खोलने की मंजूरी आदि मिलना देश के लिए एक व्यापक बदलाव वाला मोड़ है। यह नीति भारत के छात्रों और कर्मचारियों की प्रतिभा और अनुसंधान से लाभ उठाने के लिए दुनिया भर के विश्वविद्यालयों के लिए दरवाजा खोलती है जो भविष्य में वैश्विक विश्वविद्यालय रैंकिंग में भी देश की सकारात्मक छवि के रूप में नजर आएगी।'

वैश्विक विश्वविद्यालय रैंकिंग, अनुसंधान आधारित विश्वविद्यालयों के 13 अलग-अलग प्रदर्शन के पैमाने पर आधारित हैं जिनमें शिक्षण, अनुसंधान, ज्ञान हस्तांतरण और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण आदि शामिल हैं। इस साल की रैंकिंग में 1.36 करोड़ से अधिक अनुसंधान प्रकाशनों का विश्लेषण किया गया है और इसमें वैश्विक स्तर के 22,000 विद्वानों के सर्वेक्षण से जुड़ी प्रतिक्रियाएं शामिल हैं।

हालांकि वैश्विक स्तर पर ब्रिटेन के ऑक्सफर्ड विश्वविद्यालय ने लगातार पांचवें साल शीर्ष पायदान पर अपनी जगह बनाए रखी। चीन की शिंगुआ यूनिवर्सिटी पहला एशियाई विश्वविद्यालय है जिसने शीर्ष 20 में अपनी जगह बनाई है। रैंकिंग के 17वें संस्करण में रिकॉर्ड स्तर पर 18 देशों और क्षेत्रों ने  शीर्ष 100 में अपना प्रतिनिधित्व किया और इससे अंदाजा मिला कि वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। इस साल रिकॉर्ड स्तर पर 1,527 संस्थानों ने क्वालीफाई किया जो 2020 की रैकिंग के मुकाबले 9 फीसदी ज्यादा है क्योंकि 1,397 संस्थानों ने क्वालीफाई किया।

टाइम्स हायर एजुकेशन ने बुधवार को अपनी वैश्विक विश्वविद्यालयों की 2021 की रैकिंग के नतीजों की घोषणा की है जो दुनिया भर में उच्च शिक्षा और शोध की बदलती ताकत का अंदाजा देता है। रैंकिंग में क्वालीफाई करने वाले भारत के विश्वविद्यालयों की यह अब तक की सबसे अधिक संख्या है वहीं ब्रिटेन का ऑक्सफर्ड विश्वविद्यालय लगातार पांचवें साल भी शीर्ष स्थान पर बरकरार है। वहीं शीर्ष 10 में अमेरिका के दबदबे में कमी आई है।

इस बीच भारत के बाद अमेरिका (13), चीन (10), रूस, जापान, और ईरान (सभी 9) ने नई प्रविष्टियों के जरिये रैंकिंग में अपना प्रतिनिधित्व बढ़ाया है। फ्रांस की पेरिस-सैक्ले यूनिवर्सिटी इस साल रैकिंग में उच्च स्थान पाने वाली नई संस्था है। बोत्सवाना विश्वविद्यालय (1001 +) ने भी पहली बार इस रैंकिंग में अपनी शुरुआत की है।

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