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अनिश्चितता समाप्त

संपादकीय /  September 01, 2020

सर्वोच्च न्यायालय ने समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) से संबंधित पुराना बकाया चुकाने के मामले में जो निर्णय दिया है उसने दूरसंचार क्षेत्र के 15 वर्ष पुराने मामले का आखिरकार पटाक्षेप कर दिया है। यह निर्णय उस घटना के करीब एक वर्ष बाद आया है जब सर्वोच्च न्यायालय ने एजीआर की सरकार की परिभाषा को बरकरार रखा था। इसके तहत 15 दूरसंचार कंपनियों को सरकार को 1.47 लाख करोड़ रुपये का बकाया चुकाना था। इनमें से कई कंपनियां बंद हो चुकी हैं, बिक चुकी हैं या दिवालिया हो चुकी हैं। मंगलवार को न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाले पीठ ने दूरसंचार कंपनियों से कहा कि वे 31 मार्च, 2021 के पहले एजीआर की बकाया राशि का 10 फीसदी हिस्सा जमा करें। शेष राशि चरणबद्ध तरीके से चुकाने के लिए 10 वर्ष का समय दिया गया है जो 1 अप्रैल, 2021 से शुरू होगा।

इस निर्णय से जहां उद्योग जगत को राहत मिली है वहीं सर्वाधिक तनावग्रस्त सेवा प्रदाता वोडाफोन आइडिया (जिसने चरणबद्ध बकाया भुगतान के लिए 15 वर्ष का समय मांगा था) के लिए अभी भी कठिनाई हो सकती है क्योंकि कंपनी के पास नकदी भंडार नहीं है और वोडाफोन पीएलसी कह चुकी है कि वह इस भारतीय उपक्रम में और नकदी नहीं झोंकेगी। यहां तक कि कर्जग्रस्त भारती एयरटेल के लिए भी अदालत की राहत अस्थायी ही होगी बशर्ते कि वह अपनी बैलेंस शीट को दुरुस्त नहीं कर ले। तीन मौजूदा सेवाप्रदाताओं में भारती एयरटेल के ऊपर सरकार की 43,780 करोड़ रुपये की राशि एजीआर में बकाया है। कंपनी इसमें से 18,004 करोड़ रुपये चुकता कर चुकी है। वोडाफोन आइडिया ने 50,399 करोड़ रुपये के बकाया में से 7,854 करोड़ रुपये की राशि चुका दी है और रिलायंस जियो ने 195 करोड़ रुपये का पूरा बकाया चुका दिया है।

वोडाफोन आइडिया को बाजार में बनाए रखने और दूरसंचार उद्योग को एकाधिकार या दो कंपनियों के अधिकार वाला क्षेत्र बनने से बचाने के लिए शुल्क दरें बढ़ाना ही इकलौता विकल्प है। कुछ वर्ष पहले रिलायंस जियो के प्रवेश के साथ इस उद्योग में भारी रियायतों का दौर शुरू हुआ और शुल्क दरें अत्यधिक नीचे आ गईं। इससे दूरसंचार कंपनियों को भारी नुकसान होने लगा। भारत में जहां 16 जीबी डेटा के लिए हर महीने 2 डॉलर की राशि व्यय करनी होती है, वहीं अमेरिका और यूरोप में इतना डेटा 50 से 60 डॉलर में मिलता है। यह बात उत्साहवद्र्धक है कि उद्योग जगत को आखिरकार एक राह मिल गई है और वह शुल्क में इजाफा करने की योजना बना रहा है। एयरटेल के सुनील भारती मित्तल ने हाल ही में कहा कि प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व 200 रुपये से अधिक होना चाहिए और अगले छह महीने में डिजिटल सामग्री की मासिक खपत 250 रुपये होनी चाहिए। प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व यह बताता है कि किसी दूरसंचार कंपनी को एक ग्राहक से एक माह में कितना पैसा मिलता है। फिलहाल यह आंकड़ा 110 से 160 रुपये मासिक है। जून 2020 में भारती एयरटेल को इससे 157 रुपये, वोडाफोन आइडिया को 114 रुपये और रिलायंस जियो को 140.30 रुपये मिल रहे थे। हालांकि पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों की बात करें तो भारती और जियो के प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व में सुधार हुआ जबकि वोडाफोन आइडिया के मामले में इसमें कमी आई।

इसके साथ ही सेवा प्रदाताओं को उपभोक्ताओं की सेवा के प्रयास बढ़ाने होंगे। कॉल बीच में बाधित होने और कमजोर डेटा संपर्क लंबे समय से समस्या बने हुए हैं। सेवाप्रदाताओं को सेवा बेहतर बनाने में निवेश करना चाहिए। 5जी समेत कई बैंड में स्पेक्ट्रम नीलामी कंपनियों को इसका अवसर प्रदान करेगी लेकिन उन्हें इसके अलावा भी ग्राहकों को संतुष्ट करने के उपाय करने चाहिए।

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