बिजनेस स्टैंडर्ड - एफएटीएफ की लटकी तलवार इमरान और विपक्ष में रार
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, September 18, 2020 06:28 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

एफएटीएफ की लटकी तलवार इमरान और विपक्ष में रार

सियासी हलचल
आदिति फडणीस /  August 31, 2020

पाकिस्तान इस सप्ताह किसी भी दिन दो विधेयक पारित करने के लिए संसद के दोनों सदनों का संयुक्त सत्र बुला सकता है। ये विधेयक इस पड़ोसी देश को फाइनैंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की काली सूची में डाले जाने से बचाने के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। पाकिस्तान को जून में इस सिलसिले में मोहलत मिल गई थी। आतंकी गतिविधियों के वित्त पोषण पर नजर रखने वाली संस्था एफएटीएफ ने उस समय कोविड-19 महामारी की वजह से अपनी समीक्षा बैठक अक्टूबर तक के लिए टाल दी थी।

एफएटीएफ ने पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि उसने उन 27 कानूनी और सार्वजनिक नीति बदलावों में से केवल 14 में प्रगति की है, जो उसके 'ग्रे लिस्ट ' से बाहर आने के लिए आवश्यक हैं। सबसे विकट स्थिति यह पैदा हो सकती है कि अगर पाकिस्तान ने कदम नहीं उठाए तो उसे काली सूची में डाला जा सकता है, जिसमें उत्तर कोरिया और ईरान पहले से हैं।

इसके बाद पाकिस्तान ने तेजी से कदम उठाए। वहां के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने जुलाई में कहा कि सरकार ने धन शोधन और आतंक वित्त पोषण पर अंकुश के लिए आठ विधेयक तैयार कर लिए हैं। ये विधेयक पारित होने पर पाकिस्तान फिर से 'व्हाइट लिस्ट' में आ जाएगा। उन्होंने पिछले महीने मुल्तान में संवाददाताओं से कहा, 'भारत पाकिस्तान को काली सूची में डलवाने की कोशिश कर रहा है। अगर ऐसा हुआ तो इसका अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा, जिसके बारे में आप मुझसे बेहतर जानते हैं।'

इसके बाद के घटनाक्रम से भारत का वास्ता कम और पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक व्यवस्था के विरोधाभासों से अधिक था। पाकिस्तान की संसद के निचले सदन नैशनल एसेंबली में विधायी जांच की प्रणाली अपनाई जाती है। यह भारत में संसद की स्थायी समितियों के उन मुद्दों पर विचार-विमर्श करके सहमति बनाने के समान है, जिन पर विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच सहमति नहीं होती है। उसके बाद चर्चा बीच का रास्ता निकालने और समायोजन की प्रक्रिया चलती है। फिर विधेयक पर चर्चा होती है और उसे सदन में पारित किया जाता है। महज कुछ दिनों में नैशनल एसेंबली ने पांच विधेयकों को पारित कर दिया। इनमें आतंक रोधी (संशोधन) विधेयक 2020, सीमित उत्तरदायित्व साझेदारी (संशोधन) विधेयक 2020, कंपनीज (संशोधन) विधेयक 2020, मादक पदार्थ नियंत्रण (संशोधन) विधेयक 2020 और इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र न्यास विधेयक 2020 शामिल हैं। बाद में सरकार ने संयुक्त राष्ट्र (सुरक्षा परिषद) (संशोधन) विधेयक 2020 पारित कराया।

इन िवधेयकों को सामूहिक रूप से एफएटीएफ विधेयक के रूप में जाना जाता है। इनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को प्रभावी ढंग से लागू करने की कोशिश की गई है। इनमें ऐसेट फ्रीज पर रोक लगाना, हथियारों पर अंकुश और कंपनियों एवं लोगों पर यात्रा प्रतिबंध लगाना शामिल हैं। इसके अलावा पाकिस्तान को वित्तीय और वाणिज्यिक लेनदेन में ज्यादा निगरानी के अधिकार दिए गए हैं। ताकि राजनीतिक दल और व्यक्ति कंपनियों का आतंकी गतिविधियों के वित्त पोषण के लिए दुरुपयोग न कर सकें। ऐसा लगता है कि ऐसा कहना आसान और करना कठिन है। ऊपरी सदन- सीनेट ने दो विधेयक- धन शोधन रोकथाम (दूसरा संशोधन) विधेयक और इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र वक्फ परिसंपत्ति विधेयक खारिज कर दिए हैं। सीनेट में सरकार के पास बहुमत नहीं है।

हालांकि कानूनों को पारित कराने के लिए संयुक्त सत्र बुलाने की वैधता को लेकर तर्क-वितर्क जारी हैं, लेकिन आखिरकार इनके पारित होने को लेकर मामूली संदेह है। मगर इस बहस के साथ चल रही कड़वाहट और विद्वेष से पता चलता है कि यह दरार राजनीतिक प्रतिष्ठानों में है।

सीनेट के सदस्यों का सार्वजनिक रूप से कहना है कि एफएटीएफ की मांगें पूरी करने की आड़ में जिस तरह सरकार खुद को मजबूत कर रही है, उस पर उन्हें आपत्ति है। सीनेट के सदस्यों, विशेष रूप से विपक्षी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के सदस्यों ने कहा, 'विपक्ष केवल कानूनों का राजनीतिक उपयोग रोकना चाहता है...हम आर्थिक आतंकवाद की आड़ में 90 दिन की नजरबंदी को मंजूरी नहीं दे सकते।'

ऐसा लगता है कि वास्तविक वजह अलग है। प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि विपक्ष जानता है कि उसके पास ऊपरी सदन में बहुमत है और वह इसका इस्तेमाल 1997 में जनरल परवेज मुशर्रफ द्वारा लागू नैशनल रिकन्सीलिएशन ऑर्डिनेंस (एनआरओ) के तहत छूट मांगने के लिए कर रहा है।

इस कानून से सरकार को अफसरों, राजनेताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार और धन शोधन के आरोप हटाने की मंजूरी मिल गई थी, लेकिन इस कानून को पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। विपक्ष का कहना है कि वह यह चाहता है कि एनआरओ नहीं बल्कि नैशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (एनएबी) को खत्म किया जाए।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि राजनीतिक दबाव, तिकड़मों और इंजीनियरिंग के लिए राजनेता एनएबी के निशाने पर हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि इमरान खान सरकार ने उनके खिलाफ एनएबी का व्यापक इस्तेमाल किया है। नवाज शरीफ, शहबाज शरीफ और मरियम नवाज समेत पीएमएल-एन के नेताओं को एनएबी के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। पूर्व राष्ट्रपति एवं पीपीपी के नेता आसिफ अली जरदारी को भी पिछले साल भ्रष्टाचार के एक मामले में एनएबी हिरासत में भेजा गया।

इन सब घटनाक्रम का भारत से कोई वास्ता नहीं है। उसका केवल एफएटीएफ से मामूली वास्ता है। लेकिन यह साफ है कि अगर इमरान खान विधेयकों को पारित कराने में नाकाम रहे तो पाकिस्तान को उथल-पुथल भरे वित्तीय भविष्य का सामना करना पड़ेगा क्योंकि बहुत कम देश उसके साथ कारोबार करने को सहमत होंगे।

Keyword: एफएटीएफ, पाकिस्तान, विधेयक, संसद, काली सूची, इमरान खान, एनएबी, नवाज शरीफ,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या सरकार को वाहनों पर जीएसटी दरों में करनी चाहिए कटौती?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.