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जनधन से बैंक जमाएं और सेवाएं बढ़ीं

अभिषेक वाघमारे /  August 30, 2020

देश में सभी लोगों को वित्तीय सेवाएं मुहैया कराने की नरेंद्र मोदी सरकार की एक महत्त्वपूर्ण योजना, प्रधानमंत्री जनधन योजना (पीएमजेडीवाई) को छह साल पूरे हो चुके हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार इस योजना का लाभ करीब 40 करोड़ लाभार्थी ले रहे हैं। साल 2018 में भारत में करीब 19 करोड़ लोगों का बैंक खाता नहीं था। प्रधानमंत्री जनधन योजना से बैंकिंग सेवाओं से वंचित लोगों के अनुपात में काफी कमी आने की संभावना है।

इन खातों में जमा छह साल में छह गुना हो गई हैं। ये बैंक खाते मूलत: उन लोगों के लिए हैं जो न्यूनतम बैलेंस की अनिवार्यता होने की वजह से बैंक खाता खोलना पसंद नहीं करते थे।

लेकिन गौर करने लायक बात यह है कि वाणिज्यिक बैंकों की कुल मांग जमाओं में जनधन योजना के जमा की हिस्सेदारी, योजना के एक साल पूरा होने के समय के 2.8 फीसदी से बढ़कर 8.6 प्रतिशत हो गई है। इससे संकेत मिलता है कि जनधन खाताधारक अब पहले की तुलना में बैंकिंग सेवाओं को लेकर काफी सक्रियता दिखा रहे हैं। इसके साथ ही निष्क्रिय खातों की हिस्सेदारी में भी गिरावट आई है। मार्च 2017 में केवल 60 फीसदी जनधन खाते ही सक्रिय थे जबकि जनवरी 2020 में सक्रिय खातों का अनुपात बढ़कर 81 फीसदी हो गया है।

 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक ट्वीट में कहा, 'पीएमजेडीवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की जनता केंद्रित आर्थिक पहलों की आधारशिला है। चाहे प्रत्यक्ष लाभ अंतरण हो, कोविड-19 से जुड़ी वित्तीय सहायता हो, पीएम-किसान, मनरेगा के तहत बढ़ी हुई मजदूरी या जीवन और स्वास्थ्य बीमा कवर हो, इन सबके लिए पहला कदम यह था कि हर वयस्क का अपना बैंक खाता हो। सबके बैंक खाते के लक्ष्य को पीएमजेडीवाई ने लगभग पूरा कर लिया है।' पिछले छह सालों में जनधन खातों का इस्तेमाल विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए बड़े पैमाने पर किया गया है। पीएमजेडीवाई खातों में औसत बैलेंस अगस्त 2015 के 1,279 रुपये से बढ़कर 19 अगस्त, 2020 को 3,239 रुपये हो गया है जो पांच साल में ढाई गुना बढ़ गया है।

लेकिन इसके साथ ही इनमें से जिन खातों को रुपे डेबिट कार्ड दिया जा रहा है उन खातों का अनुपात कम हो गया है। इनमें से करीब 80 फीसदी से ज्यादा खाताधारकों के पास 2015 और 2016 तक वैसे डेबिट कार्ड थे जिन्हें देश की ही भुगतान प्रणाली तकनीक से तैयार किया गया था लेकिन अगस्त 2020 में यह अनुपात कम होकर 74 फीसदी हो गया है। पीएमजेडीवाई की शुरुआत अगस्त 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के पहले स्वतंत्रता दिवस भाषण के बाद की गई थी जिसका मकसद देश के सभी घरों को बैंक सेवाओं के दायरे में जोडऩे का था। 2018 में इसके दायरे में विस्तार किया गया ताकि इसमें सभी वयस्कों को शामिल किया जा सके।

इन विशेष बुनियादी बचत बैंक खाते पर दो लाख रुपये के दुर्घटना बीमा कवर के साथ-साथ 10,000 रुपये की उच्चतम सीमा वाले ओवरड्राफ्ट (खाते में जमा से अधिक रकम निकालने) की सुविधा भी है।

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