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मनोरंजन चैनलों के दर्शक बढ़े मगर बदल गई दुनिया

मीडिया मंत्र
वनिता कोहली-खांडेकर /  August 24, 2020

अगर वायकॉम18 और सोनी के विलय की चर्चा है तो इसके लिए मौजूदा समय से बेहतर वक्त नहीं हो सकता है। टेलीविजन दर्शकों की रेटिंग जारी करने वाली संस्था बार्क के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले छह महीनों में टीवी प्रसारण में काफी बदलाव आए हैं। टेलीविजन प्रसारण का बाजार काफी हद तक बदल गया है।

वर्ष 2020 के पहले छह महीनों में टेलीविजन दर्शकों की संख्या एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में नौ फीसदी बढ़ी है। टीवी देखने का औसत समय 3 घंटे 46 मिनट से बढ़कर 4 घंटे से अधिक हो गया। फिर भी देश के शीर्ष पांच प्रसारण नेटवर्कों की दर्शक हिस्सेदारी घटी है। करीब 18,000 करोड़ रुपये आकार वाले नेटवर्क स्टार इंडिया की हिस्सेदारी वर्ष 2019 के 19 फीसदी से घटकर 2020 के पहले सात महीनों में 16 फीसदी पर आ गई। स्टार की मालिकाना हक वाली कंपनी फॉक्स के डिज्नी द्वारा पिछले साल हुए अधिग्रहण ने इसे काफी हद तक बचा लिया। डिज्नी इंडिया और स्टार के साथ आने के बाद भारत के सबसे बड़े प्रसारक ने कमोबेश पिछले स्तर को बरकरार रखा है। करीब 8,130 करोड़ रुपये वाला ज़ी नेटवर्क भी पिछले साल के 18.7 फीसदी से गिरकर 17.2 फीसदी पर आ गया है।

इसके कारणों की तलाश अधिक मुश्किल नहीं है। करीब 79,000 करोड़ रुपये के आकार वाले भारतीय प्रसारण उद्योग की शीर्ष पांच कंपनियों के दर्शकों एवं राजस्व का बड़ा हिस्सा मनोरंजन से आता है। लॉकडाउन एवं कोविड महामारी के प्रभाव से रोजाना प्रसारित होने वाले सीरियल, रियलिटी शो और दर्शकों को बांधे रखने वाले तमाम कार्यक्रम नदारद हो गए। ऐसी स्थिति में भी दर्शक बढऩे का मतलब है कि वे समाचार कार्यक्रम देखने लगे। जबकि समाचार टीवी पर प्रोग्रामिंग के सबसे घटिया रूप माने जाते हैं।

दूसरे बड़े लाभार्थी फिल्मों एवं बच्चों के चैनल थे। स्टार के लिए एक और वजह इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का अप्रैल में प्रसारण नहीं कर पाना भी रही।

मनोरंजन चैनलों की दर्शक संख्या बढऩे के बावजूद उनकी दुनिया बदल चुकी है। दो  प्रसारकों के विलय की चर्चाएं हैं। वायकॉम18 नेटवर्क और सोनी नेटवर्क के विलय की चर्चा चल रही है। इस बारे में सोनी की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं आई है। सोनी पिक्चर्स नेटवर्क  के प्रेसिडेंट रोहित गुप्ता कहते हैं, 'महामारी के दौरान फिक्शन शो पर दांव लगे थे। उस दौरान कपिश शर्मा शो और सप्ताहांत के कार्यक्रम हमारी ताकत साबित हुए। उसकी वजह से हम शुरुआत में आगे बढ़े। सब टीवी के तारक मेहता का उलटा चश्मा ने अच्छा किया।'

बिग बॉस, खतरों के खिलाड़ी, नागिन 5 जैसे सप्ताहांत कार्यक्रमों और बालिका वधू, कर्मफल दाता शनि के पुनर्प्रसारण और डब कार्यक्रमों की भरमार ने वायकॉम18 को राहत दी। क्षेत्रीय स्तर पर इसकी दर्शक संख्या 2 फीसदी बढ़ गई। वायकॉम18 के रीजनल टीवी नेटवर्क प्रमुख रवीश कुमार कहते हैं, 'लॉकडाउन में सबसे बड़ी सीख क्रिएशन बनाम क्यूरेशन की रही है। हमने मौलिक बनाम पुराने कार्यक्रमों के बारे में बनी धारणा को भी चुनौती दी है।'

उडिय़ा, बांग्ला और अन्य भाषाओं में डब कार्यक्रमों के इस्तेमाल ने कई चैनलों के दर्शकों में दोगुनी वृद्धि कर दी। इसकी बड़ी वजह यह है कि 83.6 करोड़ दर्शकों में से अधिकतर घरों के भीतर रहने को मजबूर थे। ऐसी स्थिति में टीवी का कोई भी स्लॉट प्राइम टाइम नहीं रह गया। इसी तरह अधिकांश घरों में एक ही टीवी सेट होने से बच्चों एवं बड़ों के लिए अलग स्लॉट तय करने का भी मतलब नहीं था।

वायकॉम18 की हिंदी मनोरंजन एवं किड्स नेटवर्क प्रमुख नीना एलेविया जयपुरिया कहती हैं, 'लॉकडाउन में पूरा परिवार एक साथ होता था। सभी सदस्य साथ बैठकर टीवी देखते थे और उस पर चर्चा भी करते थे।'

रवीश कुमार कहते हैं, 'दुनिया काफी बदल गई। अब घरों में रहने वाली महिलाएं ही नहीं बल्कि पूरा परिवार दर्शक था। प्रोग्रामिंग शेड्यूल तैयार करने में इस नई हकीकत का ध्यान रखना जरूरी है।' प्राइम टाइम के दर्शक चार फीसदी बढ़े जबकि नॉन-प्राइम टाइम के दर्शक 14 फीसदी बढ़ गए।

मनोरंजन चैनलों के दर्शक बढऩे के बावजूद उनके राजस्व के मामले में कोई सुधार नहीं हुआ। रोहित गुप्प्ता कहते हैं, 'अप्रैल में हमें महज 20-25 फीसदी राजस्व ही मिला। मई में यह बढ़कर 40 फीसदी और जून में 50-60 फीसदी पर पहुंच पाया।' नीना कहती हैं, 'मार्च, अप्रैल एवं मई राजस्व के लिहाज से बहुत ही बुरे रहे। किस्मत से उन दिनों शूटिंग बंद होने से हमारे खर्चे भी घट गए थे। जुलाई, अगस्त एवं सितंबर में हालात बेहतर होते दिख रहे हैं लेकिन पिछले साल जैसे नहीं होंगे।' जुलाई से कार्यक्रमों के नए एपिसोड का प्रसारण शुरू होने के साथ ही विज्ञापन आने भी बढ़ गए। नीना कहती हैं, 'मौजूदा हालात में विज्ञापन के लिए सबसे अच्छा माध्यम टीवी ही है। हमें उम्मीद है कि त्योहारी सीजन काफी अच्छा जाएगा।' सोनी के रोहित गुप्ता भी कपिल शर्मा शो, तारक मेहता और कौन बनेगा करोड़पति के नए सीजन को लेकर विज्ञापनदाताओं के साथ हुई चर्चा को लेकर आशावान हैं। हालांकि यह सारी कवायद बाजार के सामान्य स्थिति में पहुंचने को लेकर है, वृद्धि की नहीं। मीडिया पार्टनर्स एशिया का अनुमान है कि भारतीय वीडियो उद्योग को विज्ञापन राजस्व के मामले में 2019 के स्तर को हासिल करने में तीन साल लग जाएंगे।

अगर ऐसा होता है तो भी यह सच ही रहेगा कि बीते छह महीनों ने विज्ञापनदाताओं, दर्शकों एवं प्रसारकों के संबंधों को कई तरह से बदल दिया है। इस वजह से टीवी के दर्शक अब बड़े पैमाने पर स्ट्रीमिंग वीडियो भी देख रहे हैं।

वीडियो कारोबार में अब बड़ी लड़ाई गूगल (यूट्यूब), एमेजॉन (प्राइम वीडियो), डिज्नी (स्टार) और संभवत: फेसबुक के बीच लड़ी जाएगी। ये सभी आकार में सोनी से तिगुने से लेकर पांच गुने तक हैं। अगर सोनी एवं वायकॉम18 एकसाथ आते हैं तो इस नई स्थिति का सामना करने के लिए कहीं बेहतर हालत में होंगे। सन नेटवर्क भी बाद में इस गठजोड़ को मजबूती देने के लिए साथ आ सकता है।

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