बिजनेस स्टैंडर्ड - बदलाव नहीं
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, September 18, 2020 08:29 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

बदलाव नहीं

संपादकीय /  August 24, 2020

कांग्रेस के 23 वरिष्ठ नेताओं द्वारा सोनिया गांधी को लिखे पत्र के रूप में जो बगावत सामने आई है वह पहली बगावत भले ही न हो लेकिन वह ऐसे समय में सामने आई है जब 135 वर्ष पुरानी पार्टी आजादी के बाद के इतिहास में अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। यह पराभव पार्टी में राहुल गांधी के उभार से करीब से जुड़ा रहा है। पहले 2013 में पार्टी उपाध्यक्ष के रूप में और 2017 के बाद उनके अध्यक्ष बनने के बाद। एक तथ्य जिसे स्वीकार नहीं किया जा रहा है वह यह है कि राहुल गांधी (50 वर्ष) बगावती नेताओं की दुविधा के केंद्र में हैं। एक वर्ष पहले उन्होंने चुनावी हार की जिम्मेदारी लेते हुए अध्यक्ष पद त्याग दिया और उनकी मां सोनिया गांधी (73 वर्ष) ने अंतरिम अध्यक्ष का पद संभाला। परंतु पार्टी आलाकमान की नेहरू-गांधी परिवार से परे न देखने की प्रवृत्ति के कारण उत्तराधिकारी चुनने की कोशिश में गतिरोध उत्पन्न हो गया। इस अनिर्णय के कारण ही राहुल गांधी शीर्ष पद के मुकाबले में बने हुए हैं क्योंकि वह कांग्रेस कार्य समिति में बरकरार हैं। तब से उनके कई गलत कदम इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि वह शायद शीर्ष पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में गलत ट्वीट और मध्य प्रदेश तथा राजस्थान में पार्टी के अपेक्षाकृत युवा नेताओं को साथ लेकर चलने में उनकी नाकामी इसकी बानगी हैं।

अनेक नेता जिन्होंने उस पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं वे भी शायद ऐसा ही सोचते हों लेकिन उन्हें लगा होगा कि सोनिया गांधी के साथ रहना राजनीतिक दृष्टि से सुरक्षित है। संभव है कि उनका आकलन गलत नहीं हो क्योंकि हस्ताक्षर करने वाले अधिकांश नेताओं का कोई खास जनाधार नहीं है और वे पार्टी के लिए चुनाव नहीं जीत सकते (भूपेंद्र सिंह हुड्डा को छोड़कर हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट की तरह उनका भी अपने प्रदेश के जाट बहुल इलाकों में ही सीमित जनाधार है)। ज्यादा से ज्यादा कुछ और हस्ताक्षर करने वाले नेता अपनी सीट जीतने में सक्षम हैं मसलन पूर्व विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर। बड़े जनाधार वाले नेता पहले ही कांग्रेस से अलग होकर महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में क्षेत्रीय दल बना चुके हैं। यह सोचने की कोई वजह नहीं है कि हरियाणा और पंजाब में वैसा दोबारा नहीं हो सकता। पहले पार्टी छोड़कर जाने वालों में भी कोई राष्ट्रीय पकड़ वाला नेता नहीं था। वास्तव में हस्ताक्षर करने वाले नेताओं के पास ऐसा कोई मंच भी नहीं जो उन्हें एकजुट रख सके।

सवाल यह है कि पार्टी के सामने क्या विकल्प हैं? पार्टी सामूहिक नेतृत्व का प्रयास कर सकती है और उस क्रम में पहले पार्टी छोड़ गए नेताओं को भी साथ लिया जा सकता है। सोनिया गांधी ऐसा कर सकती हैं और हस्ताक्षर करने वाले नेताओं के राजनीतिक खोखलेपन को उजागर कर उनके सामने चुनौती रख सकती हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की अगली बैठक तक सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष बने रहने का निर्णय नेहरू-गांधी कांग्रेस तथा हस्ताक्षरकर्ताओं को एक जैसी दिक्कत में छोड़ता है। इस बीच इकलौती आशा यही है कि संगठन चुनावों से मसला हल होगा। परंतु कांग्रेस में यह बात भी केवल सैद्धांतिक है। सन 1992 में तिरुपति सत्र में कांग्रेस कार्य समिति के गठन का समय याद कीजिए। उस वक्त अर्जुन सिंह, शरद पवार और राजेश पायलट प्रधानमंत्री नरसिंह राव के समक्ष चुनौती बनकर उभरे थे और चुनाव को अमान्य कर दिया गया था। कांग्रेस कार्य समिति का अंतिम चुनाव 1998 में हुआ था जब सोनिया गांधी ने औपचारिक रूप से प्रभार संभाला। इसके बाद चुनाव आयोग ने 2017 में पार्टी को आंतरिक चुनाव कराने को कहा लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है।

Keyword: कांग्रेस, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, ज्योतिरादित्य, सचिन पायलट, नरसिंह राव,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या सरकार को वाहनों पर जीएसटी दरों में करनी चाहिए कटौती?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.