बिजनेस स्टैंडर्ड - पहचानरहित अपीलों से बढ़ सकती हैं याचिकाएं
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पहचानरहित अपीलों से बढ़ सकती हैं याचिकाएं

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली August 23, 2020

पारदर्शी कर प्रणाली के कदमों के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पहचानरहित (फेसलेस) अपील की व्यवस्था की घोषणा के एक सप्ताह बाद कर अधिकारियों व सलाहकारों ने इसके प्रभावी होने को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह योजना अभी शुरू की जानी है और चिंता है कि इससे पंचाट के स्तर पर याचिकाएं बढ़ सकती हैं।

कर अधिकारियों का तर्क है कि मौजूदा अपील व्यवस्था से पहचानरहित व्यवस्था में जाने से लॉजिस्टिक्स की समस्याएं होंगी और इस बात को लेकर अनिश्चितता है कि मौजूदा मामले रोके जाएंगे या उनके लिए जारी आदेश लागू होंगे। वहीं दूसरी तरफ कर सलाहकारों की चिंता है कि पहचानरहित अपीलों से अतिरिक्त मांग आएंगी क्योंकि करदाताओं को अपने मामले को बेहतर तरीके से रखने का मौका नहीं मिल पाएगा और आयकर पंचाटों में मामले बढ़ेंगे।

पहचानरहित आकलन व्यवस्था 13 अगस्त से प्रभावी है, वहीं पहचानरहित अपील की व्यवस्था 25 सितंबर से लागू होनी है। इससे करदाताओं व कर अधिकारियों के बीच प्रत्यक्ष हस्तक्षेप खत्म होगा और इसमें कोई अधिकार क्षेत्र का मसला भी नहीं रह जाएगा।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने बिजनेस स्टैंडर्ड की ओर से मांगी गई जानकारी पर कोई जवाब नहीं दिया।  बहरहाल प्रक्ता ने कहा कि पहचानरहित अपील के दिशानिर्र्देश जल्द ही जारी किए जाएंगे।  कर विशेषज्ञों का तर्क है कि करदाता प्रत्यक्ष रूप से अपने तर्क रखना पसंद करते हैं, जिससे वे अपील के मामलों में अपना पक्ष बेहतर तरीके से रख पाएं।

एकेएम ग्लोबल के पार्टनर अंकित माहेश्वरी ने कहा कि करदाता द्वारा पहले चरण की अपील में चर्चा वास्तव में अहम होती है, जो सामान्यतया पहचानरहित अपील में नहीं हो पाएगा।  उन्होंने कहा, 'पहचानरहित अपील की प्रक्रिया के मामलों में ज्यादातर चर्चाएं इलेक्ट्रॉनिक होंंगी और इसमें व्यक्तिगत बातचीत नहीं होगी। इसकी वजह से मामला और जटिल हो जाएगा। आयुक्त को मौजूदा आदेश को पुष्ट करने, घटाने, बढ़ाने का अधिकार होता है और अगर करदाता आयुक्त को संतुष्ट करने में असफल रहता है तो उसे राहत नहीं मिलती।'  माहेश्वरी ने कहा कि ईमेल से बातचीत संचार का बेहतर साधन नहीं हो सकता।

ज्यादातर कर विशेषज्ञों की राय है कि पहचानरहित आकलन होने पर आकलन बढ़ा चढ़ाकर होगा क्योंकि इसमें उचित स्पष्टीकरण नहीं हो पाएगा। इससे अपील के स्तर पर मामले बढ़ेंगे, वह भी पहचानरहित होगा। तमाम का यह मानना है कि इससे पंचाट के स्तर पर मामले बढ़ेंगे। नांगिया ऐंड कंपनी एलएलपी के पार्टनर शैलेष कुमार ने कहा, 'पहचानरहित आकलन होने की स्थिति में वास्तविक तथ्यों की समझ को लेकर अंतर, या उचित जानकारी या स्पष्टीकरण न दे पाने की स्थिति में कर अधिकारियों द्वारा बढ़ाकर आकलन या ऐच्छिक समायोजन होगा। पहली अपील के स्तर पर तथ्यों को दुरुस्त करने के लिए ज्यादा कवायद करनी पड़ेगी।' उन्होंने कहा कि इसके अलावा अगर इस तरह के  पहचानरहित आकलन के आदेशों को पहचानरहित अपीलों में चुनौती दी जाती है तो इस  बात की संभावना ज्यादा है कि करदाता को इच्छित राहत न मिल सके और मालमला दूसरे स्तर के अपीली प्राधिकरण जैसे आयकर अपील पंचाट के पास चला जाए। वहीं कर अधिकारियों का कहना है कि अपील आयुक्त मामले को उचित तरीके से समझने की जरूरत होती है और पहचानरहित तरीके से अपील में यह बड़ी चुनौती होगी। एक कर अधिकारी ने कहा, 'ज्यादातर मामले पंचाट में जा सकते हैं क्योंकि करदाताओं को अपने मामले में स्पष्टीकरण देने का उचित अवसर नहीं होगा। कई बार अपील की ड्राफ्टिंग खराब तरीके से हो सकती है या उसकी भाषा स्पष्ट नहीं हो सकती है, जिसके लिए करदाता द्वारा स्पस्टीकरण देने की जरूरत होती है। यह अब कठिन होगा।'

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