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प्रमुख शहरों में कर संग्रह में भारी कमी

श्रीमी चौधरी / नई दिल्ली August 23, 2020

चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भी प्रत्यक्ष कर संग्रह में स्थिरता बनी रह सकती है। 20 अगस्त तक की प्राप्तियों के आंकड़ों के मुताबिक देश के प्रमुख शहरों में कर संग्रह में दो अंकों की गिरावट दर्ज की गई है।

कोलकाता सबसे ज्यादा प्रभावित महानगर बनकर उभरा है। अप्रैल-अगस्त 20 के दौरान शहर से कर संग्रह में 60 प्रतिशत की कमी आई है। उसके बाद चेन्नई और दिल्ली में क्रमश: 41 प्रतिशत और 36 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

बहरहाल मुंबई सबसे कम प्रभावित शहर है, हालांकि यहां भी संग्रह घटा है। कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह में मुंबई की हिस्सेदारी 34 प्रतिशत है, जहां कोविड-19 के लगातार मामले बढऩे के बावजूद कर संग्रह महज 13 प्रतिशत घटा है।  टेक सिटी बेंगलूरु एकमात्र शहर है, जहां कर संग्रह 10 प्रतिशत बढ़कर 30,777 करोड़ रुपये रहा है। इसके अलावा गुवाहाटी मे कर संग्रह 4.7 प्रतिशत बढ़कर 1,212 करोड़ रुपये रहा है, जो पिछले साल की समान अवधि में 1,158 करोड़ रुपये था।

20 अगस्त तक प्रत्यक्ष कर के शुद्ध संग्रह में 26.3 प्रतिशत की कमी आई है और यह पिछले साल की समान अवधि में हुए 2,56,480 करोड़ रुपये की तुलना में घटकर 1,88,985 करोड़ रुपये रह गया है। एक कर अधिकारी ने कहा कि सितंबर तिमाही में भी यह गिरावट जारी रह सकती है, जो चिंता का विषय है। पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में प्रत्यक्ष कर संग्रह 25.3 प्रतिशत गिरकर 1,25,065 करोड़ रहा था।

अन्य बड़े शहरों जैसे हैदराबाद, पुणे, चंडीगढ़, अहमदाबाद में भी इस साल 20 अगस्त तक की कर प्राप्तियों में 30 से 45 प्रतिशत तक की भारी कमी आई है।  अहमदाबाद में 44.6 प्रतिशत गिरावट के साथ 7,683 करोड़ रुपये कर संग्रह हुआ, जो पिछले साल की समान अवधि में 13,871 करोड़ रुपये था। इसी तरह हैदराबाद और पुणे में क्रमश: 29 और 37 प्रतिशत की गिरावट आई है। चंडीगढ़ मेंं 9,292 करोड़ रुपये कर संग्रह हुआ, जो पिछले साल की समान अवधि से 34 प्रतिशत कम है।

 बड़े शहरों से 20 अगस्त तक कॉर्पोरेट कर संग्रह भी बहुत ज्यादा नहीं सुधरा है। उदाहरण के लिए मुंबई में 25,611 करोड़ रुपये, बेंगलूरु में 12,521 करोड़ रुपये और दिल्ली में 7,989 करोड़ रुपये कर संग्रह हुआ है।

इन आंकड़ों ने सरकार के समक्ष कड़ी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं क्योंकि वित्त मंत्रालय ने इस वित्त वर्ष में 13.2 लाख करोड़ रुपये कर संग्रह का लक्ष्य रखा था।

विशेषज्ञों ने कहा कि सकारात्मक संकेत दिख रहे हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था अभी भी लंगड़ा रही है और  इसे पटरी पर आने में कुछ और तिमाहियां लगेंगी। खेतान ऐंड कंपनी में पार्टनर संजय सांघवी ने कहा, 'कॉर्पोरेट कर संग्रह करदाताओं के अनुमानित मुनाफे पर आधारित होता है और साथ ही वह कारोबार के प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है,जो सीधे तौर पर आर्थिक गतिविधियों व मौजूदा स्थितियों का समानुपाती है। लंबी बंदी की वजह से ज्यादातर कारोबार प्रभावित हुए हैं। ऐसे में अग्रिम कर संग्रह में सुधार तभी होगा, जब धीरे धीरे कारोबार पटरी पर आएगा। अग्रिम कर संग्रह में सुधार में वक्त लग सकता है।' 

बहरहाल सरकार को उम्मीद है कि कर संग्रह के आंकड़ों में पहली तिमाही की तुलना में सुधार होगा और उसे पूरे साल के लिए मानक नहीं माना जा सकता है। वहीं उद्योग जगत इससे सहमत नहीं है क्योंकि उनका मानना है कि अग्रिम कर/कॉर्पोरेट कर के संग्रह में कमी से संकेत मिलता है कि उद्योगों पर दबाव है और नकदी का मसला बना हुआ है।

इसके पहले के वित्त वर्ष में मंदी और कोरोनावायरस के असर के कारण प्रत्यक्ष कर संग्रह में 20 प्रतिशत की कमी आई थी। सरकार ने घटाकर रखे लक्ष्य 10.27 लाख करोड़ रुपये से 1.42 लाख करोड़ रुपये कम कर संग्रह किया था।

चालू वित्त वर्ष के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने क्षेत्रवार लक्ष्य भेजा है। इस वित्त वर्ष में सरकार ने कॉर्पोरेट कर का 6.81 लाख करोड़ रुपये और आयकर का 6.38 लाख करोड़ रुपये लक्ष्य रखा है, जिसमें प्रतिभूति लेन देन कर भी शामिल है।

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